क्यों कहा जस्टिस काटजू ने ‘बेवक़ूफ़’ हैं 90 प्रतिशत भारतीय’
Updated: December 17, 2012
तनवीर जाफ़री अपनी तीखी व तल्ख़ टिप्पणी, स्पष्टवादिता तथा न्यायधीश रहते हुए कई मुकद्दमों में बेबाक व ऐतिहासिक निर्णय सुनाए जाने के लिए चर्चा में…
Read moreवही सफलता पाता है
Updated: December 17, 2012
पीपल मेरे पूज्य पिताजी, तुलसी मेरी माता है| बरगद को दादा कहने से, मन पुलकित हो जाता है| बगिया में जो आम लगा है,…
Read more
हाथी मामा
Updated: December 15, 2012
हाथी मामा पहिन पजामा, पहुंच गये स्कूल| जैसे ही पढ़ने वह बैठे, टूट गया स्टूल| चित्त गिरे धरती पर मामा, कुछ भी समझ न पाये|…
Read more
के. रहमान और शिक्षा का विषाक्तीकरण-डॉ. मनोज चतुर्वेदी
Updated: December 15, 2012
संप्रग-1 तथा संप्रग-2 ने आपने नए-नए कारनामों से भारतीय राजनीति तथा शिक्षा को विषाक्त करने का प्रयास किया है। सोनिया गांधी-मनमोहन सिंह सरकार के नए-नए…
Read more
प्रजातंत्र का राजा
Updated: December 15, 2012
एक कहानी बड़ी पुरानी, कहती रहती नानी| शेर और बकरी पीते थे, एक घाट पर पानी| कभी शेर ने बकरी को, न घूरा न गुर्राया|…
Read more
चूहा भाई
Updated: December 15, 2012
सुबह सुबह चूहा भाई ने, संपादक को डांटा| “चार लेख भेजे थे मैंने, नहीं एक भी छापा|” संपादक ने एक पत्रिका, उसकी तरफ बढ़ाई|…
Read more
खुला पुस्तकालय जंगल में
Updated: December 15, 2012
बालवाटिका पढ़ पढ़कर, कालू बंदर हो गये विद्वान| इसी बात का हाथीजी ने ,शेर चचा का खींचा ध्यान| देखो तो यह कालू बंदर, पढ़ लिखकर…
Read more
विवाह में सामाजिक दखल बंद हो
Updated: December 15, 2012
अनूप आकाश वर्मा बात, पिछले वर्ष की है जब दिल्ली विश्वविद्यालय की एक दलित छात्रा ने अपने ही विभाग के विभागाध्यक्ष पर ये आरोप लगा…
Read more
राष्ट्र से बड़ा नहीं अफजल ?
Updated: December 15, 2012
प्रमोद भार्गव सामंती युग में जिस तरह से देश के वजूद के प्रतीक दुर्ग हुआ करते थे और दुर्ग पर हमले का मतलब राष्ट्र पर…
Read more
लाई डिटेक्टर पर पत्रकारिता…
Updated: December 15, 2012
डॉ. आशीष वशिष्ठ स्वतंत्रता की लड़ाई में जितनी लड़ाई स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों ने बंदूक और तलवार से लड़ी थी कमोबेश उतनी ही लड़ाई कलम…
Read more
अनुवर्त्ती रात
Updated: December 15, 2012
विजय निकोर दीवार पर दो घड़ियाँ लगा देने से रात कभी जल्दी नहीं कटती । कोई हादसा नया छोटा-सा, बड़ा-सा ढीठ और बेअदब संतरी-सा…
Read more
सचिन की नीयत पर सवाल उठाने वाले मूर्ख
Updated: December 15, 2012
-बी.पी. गौतम दुनिया को रंगमंच की तरह देखा जाए, तो यहाँ प्रत्येक इंसान रंगमंच की तरह ही भूमिका निभाता नज़र आता है। प्रत्येक इंसान के…
Read more