विविधा भ्रष्टाचार की शुरुआत कहाँ से…?

भ्रष्टाचार की शुरुआत कहाँ से…?

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ आजादी के बाद से अनेक मोर्चों पर मनमानी और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ छोटे-बड़े अनेक आन्दोलन देश में होते रहे हैं।…

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महत्वपूर्ण लेख थायलॅंन्ड पर संस्कृत का प्रभाव — डॉ. मधुसूदन

थायलॅंन्ड पर संस्कृत का प्रभाव — डॉ. मधुसूदन

 (१) विकलांग मानसिकता सफलता प्राप्ति के लिए, सबसे पहले हमें, अपनी विकलांग मानसिकता से ऊपर उठना होता है। ”अहं ब्रह्मास्मि” (मैं ब्रह्म हूँ।) का घोष,…

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कहानी नियम

नियम

पियूष द्विवेदी ‘भारत’ आज दो दिन हो गए थे उसको गाँव आए! करीब दस साल बाद वो गाँव आया था! इन दस सालों में उसके…

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शख्सियत माई एहा पूत जण जेहा दुर्गादास

माई एहा पूत जण जेहा दुर्गादास

 13 अगस्त वीर दुर्गादास जयंती पर विशेष भारतीय इतिहास में वीर शिरोमणि दुर्गादास के नाम को कभी परिचय की आवश्यकता नहीं रही. मारवाड़ के इस…

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गजल देख दौलत की खनक हम भी फिसल सकते थे…..

देख दौलत की खनक हम भी फिसल सकते थे…..

इक़बाल हिंदुस्तानी   सबको संग लेके बड़ी दूर निकल सकते थे, तूने चाहा ही नहीं हालात बदल सकते थे।   तुम तो उलझे रहे वंदना…

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राजनीति ‘क्रांति अन्ना’ की असफलता के निहितार्थ

‘क्रांति अन्ना’ की असफलता के निहितार्थ

तनवीर जाफ़री गत् तीन दशकों से भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुखरित होकर अपनी आवाज़ बुलंद करने वाले तथा गांधीवादी सिद्धांतों पर चलते हुए अनशन व सत्याग्रह…

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कविता कविता:थार रेगिस्तान से….

कविता:थार रेगिस्तान से….

बीनू भटनागर रेत के टीले रेत का सागर, मीलो तक इनका विस्तार, तेज़ हवा से टीले उड़कर, पंहुच रहे कभी दूसरे गाँव, दूर दूर बसे…

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कविता कविता:ये मेरा देश

कविता:ये मेरा देश

राजेश कुमार ये मेरा देश है, जहां अजीब से किस्से होते हैं रोने वाली बात पर हंसते हैं लोग, और चुटकुलों पर रोते हैं बदलाव…

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चिंतन व्यक्तित्व को ढालना है हमारे हाथ

व्यक्तित्व को ढालना है हमारे हाथ

डॉ. दीपक आचार्य व्यक्तित्व को ढालना है हमारे हाथ रचनात्मक बनायें या विध्वंसात्मक व्यक्तित्व का निर्माण व्यक्ति के अपने हाथ में होता है। इसे वह…

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कविता कविता – महानगर के मायने

कविता – महानगर के मायने

मोतीलाल यहाँ मुझे कोई नहीँ पहचानता आकाश की तरह शून्य   यहाँ मुझे कोई नहीँ जानता हवाओँ की तरह मुक्त   यहाँ मुझे कोई नहीँ…

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हिंद स्‍वराज कैसे कहूं ‘मेरा भारत’ “महान” !

कैसे कहूं ‘मेरा भारत’ “महान” !

मेरा भारत महान…… ! हर ट्रक के पीछे लिखने का जारी हुआ फरमान, एक ट्रक ड्राईवर ने फरमान निभाते हुआ लिखा अपने ट्रक के पीछे,…

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राजनीति विभाजन की वो अस्थायी मजबूरी…

विभाजन की वो अस्थायी मजबूरी…

1947 के भारत विभाजन की घटना को बीते साढ़े छह दशक का समय हो गया है। कुछ लोगों के हृदय में विभाजन की पीड़ा का…

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