जन-जागरण क्या बाकियों के फंदे तैयार हैं?

क्या बाकियों के फंदे तैयार हैं?

 सिद्धाथ मिश्र‘स्वतंत्र’ मुंबई हमले के दोषी कसाब की फांसी ने जाहिर तौर पर देशवासियों को सुकून दिया है । इस विषय में सबसे महत्पूर्ण बात…

Read more
विविधा जहाँ चप्पे चप्पे में सो रहा है इतिहास, वहाँ की नमन यात्रा

जहाँ चप्पे चप्पे में सो रहा है इतिहास, वहाँ की नमन यात्रा

डा कुलदीप चंद अग्निहोत्री भारत ितब्बत सहयोग मंच ने इस वर्ष से तवांग यात्रा की शुरुआत की है । तवांग अरुणाचल प्रदेश का अंतिम छोर…

Read more
समाज बुरके के पीछे सिर्फ कट्टरपंथ

बुरके के पीछे सिर्फ कट्टरपंथ

अनिल अनुप नकाब, हिजाब या बुरके के पीछे सिर्फ मुस्सिम कट्टरपंथ की शिकार ही नहीं छिपी होती, बल्कि रेडिकल विचार भी पनप रहे होते हैं,…

Read more
धर्म-अध्यात्म हुसैन दीन भी हैं दीन की पनाह भी हैं

हुसैन दीन भी हैं दीन की पनाह भी हैं

तनवीर जाफ़री इस्लाम धर्म के आखिरी पैगंबर हज़रत मोहम्मद के नवासे तथा हज़रत अली के पुत्र इमाम हुसैन व उनके 72 परिजनों व साथियों की…

Read more
विविधा पतन की राह पर अग्रसर संघ (भाग 3)

पतन की राह पर अग्रसर संघ (भाग 3)

पवन कुमार अरविंद यह मृत्यु लोक है। यहां आत्मा और कीर्ति को छोड़कर कुछ भी अमर नहीं है। यदि आप अच्छा कार्य करते हैं तो…

Read more
विविधा पानी की इस बर्बादी को कौन रोकेगा…?

पानी की इस बर्बादी को कौन रोकेगा…?

 डॉ. आशीष वशिष्ठ तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा ये कोरी बयानबाजी या कल्पना नहीं है क्योंकि जिस तेजी से पीने के पानी के…

Read more
समाज परंपराओं के अजीबोगरीब घालमेल

परंपराओं के अजीबोगरीब घालमेल

अनिल अनुप नसीब खान ने हाल ही में अपने बेटे प्रकाश सिंह की शादी राम सिंह की बेटी गीता से की. तीन महीने पहले हेमंत…

Read more
आर्थिकी धनकुबेरों का कालाधन

धनकुबेरों का कालाधन

प्रमोद भार्गव अभी तक विदेशो में नेताओं और अधिकारियों का ही कालाधन जमा होने की जानकारियां जनचर्चा में थीं, लेकिन अरविंद केजरीवाल के नए खुलासे…

Read more
राजनीति रोशनी में कपड़े बदलती कांग्रेस

रोशनी में कपड़े बदलती कांग्रेस

अरविंद जयतिलक अनुकूल परिस्थितियां तभी निर्मित होती है जब लक्ष्य का पता हो। लक्ष्य के विपरित दौड़ने वाला चूक जाता है। कांग्रेस लक्ष्य के विपरित…

Read more
व्यंग्य Default Post Thumbnail

स्वच्छंदजी बोले

अशोक गौतम हम जैसों को तो नरक की न जिंदे जी चिंता होती है न मरने के बाद, क्योंकि हमें पता होता है कि हमें…

Read more
आर्थिकी नये बैंकों से किसकी भरेगी झोली

नये बैंकों से किसकी भरेगी झोली

बैंकों के राष्ट्रीयकरण के पीछे सरकार की मंशा थी, आम आदमी को बैंकों से जोड़ना। उसके स्वरुप को कल्याणकारी बनाना। सरकारी योजनाओं का लाभ जनता…

Read more
टॉप स्टोरी दास्ताँ-ए-कसाब का हुआ अंत

दास्ताँ-ए-कसाब का हुआ अंत

बुधवार की सुबह १६६ परिवारों सहित देश की जनता के लिए सुखद अहसास लेकर आई। भारत की धर्मनिरपेक्ष अस्मिता व मुंबई में २६/११ हमले के…

Read more