राजनीति किसकी लडाई लड रहे हैं ये माओवादी?

किसकी लडाई लड रहे हैं ये माओवादी?

-समन्वय नंद सर्वहारा की लडाई लडने का दावा करने वाले माओवादियों के संबंध में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बंगलूरू पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया…

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राजनीति ये है दिल्ली मेरी जान

ये है दिल्ली मेरी जान

-लिमटी खरे राहुल शरणम जाने की तैयारी में सुरेश कलमाड़ी जनता के हजारों करोड़ रूपए हवा में उड़ाने के बाद अब कामन वेल्थ गेम्स आयोजन…

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विविधा गांधी दर्शन से उबने लगी है कांग्रेस

गांधी दर्शन से उबने लगी है कांग्रेस

-लिमटी खरे नई दिल्ली 16 अगस्त। समूचा देश मोहन दास करमचंद गांधी को राष्ट्रपिता कहकर ही संबांधित करता है। बापू के सादा जीवन उच्च विचारों…

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कविता आजादी का तिरसठवाँ साल

आजादी का तिरसठवाँ साल

-नागेन्‍द्र पाठक वर्षों बीते आजादी के क्या कीमत ईमान की बच्चा बच्चा देख रहा है करतब कुछ इंसान की वंदेमातरम वंदेमातरम वंदेमातरम वंदेमातरम लूट मची…

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राजनीति बंद कीजिए ये बेशर्म नौटंकी

बंद कीजिए ये बेशर्म नौटंकी

-हरे राम मिश्र पिछले कई सालों की तरह इस साल भी हम अपना स्वतंत्रता दिवस पूरे ताम झाम के साथ मना रहे है। जाहिर सी…

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राजनीति आजादी की 63वीं वर्षगाठ पर विशेष

आजादी की 63वीं वर्षगाठ पर विशेष

-अशोक बजाज आज हम आजादी की 63वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। किसी भी देश के विकास के लिए 63 वर्ष कोई कम नहीं है। वर्षों…

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विविधा लो फिर आ गया स्वाधीनता दिवस!

लो फिर आ गया स्वाधीनता दिवस!

-लिमटी खरे 14 और 15 अगस्त की दर्मयानी रात को 1947 में गोरे ब्रितानियों ने भारत को अपनी गुलामी की जंजीरों से आजादी दी थी।…

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विविधा हम सभी भूल चुके हैं राष्ट्रीय ध्वज के निर्माता “पिंगली वेंकैय्या” को

हम सभी भूल चुके हैं राष्ट्रीय ध्वज के निर्माता “पिंगली वेंकैय्या” को

-प्रदीप श्रीवास्तव पंद्रह अगस्त को जहाँ हम स्वतंत्रता दिवस कि 63 वीं वर्ष गांठ मना रहे होंगे वहीँ दूसरी ओर अपने राष्ट्रीय झंडे क़ी संरचना…

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कविता जनता के नाम

जनता के नाम

-पीयूष पंत मना लो तुम आज़ादी, फ़हरा लो तिरंगा कौन जाने कल, अब क्या होगा, जिस तरह हमारी अभिव्यक्ति पर पहरा लगाया जा रहा है,…

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कविता क्या जिंदगी है और भूख है सहारा…..सारे जहां से अच्छा

क्या जिंदगी है और भूख है सहारा…..सारे जहां से अच्छा

-केशव आचार्य क्या जिंदगी है और भूख है सहारा सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा सौ करोड़ बुलबुले जाने शाने गुलिस्तां थी उन बुलबुलों के…

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विविधा कहां है आज़ादी का पहला प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज

कहां है आज़ादी का पहला प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज

-सरफ़राज़ ख़ान देश को स्वतंत्र हुए छह देशक से भी ज्यादा का समय हो गया है। हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले…

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विविधा दो लड्डू और पंद्रह अगस्त

दो लड्डू और पंद्रह अगस्त

-लोकेन्द्र सिंह राजपूत कई साल बीत गए बोलते हुए गांधी जी की जय। वह वर्षों से देखता आ रहा है, स्कूल, तहसील और पंचायत की…

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