खेत-खलिहान नए कृषि कानून खुशहाली की गारंटी

नए कृषि कानून खुशहाली की गारंटी

● मुख़्तार अब्बास नकवीदेश का यह दुर्भाग्य है, किसानों के खेत पर सियासत की खेती करने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस अपनी बंजर सियासी…

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राजनीति बिहारः सत्ता ब्रह्म है, गठबंधन मिथ्या

बिहारः सत्ता ब्रह्म है, गठबंधन मिथ्या

डॉ. वेदप्रताप वैदिकबिहार के चुनाव के बाद किसकी सरकार बनेगी, कहा नहीं जा सकता। यदि दो प्रमुख गठबंधन सही-सलामत रहते तो उनमें से किसी एक…

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महिला-जगत ख़ुद की तक़दीर लिखने के लिए आधी आबादी को आगे आना होगा

ख़ुद की तक़दीर लिखने के लिए आधी आबादी को आगे आना होगा

महिलाएं देश की आधी आबादी हैं। महिलाओं के बिना किसी भी राष्ट्र की तरक्की और उन्नति की कल्पना करना बेमानी लगता है। फ़िर इक्कीसवीं सदी…

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धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द ने सत्य के निर्णयार्थ सब धर्माचार्यों से शास्त्रार्थ किये थे

ऋषि दयानन्द ने सत्य के निर्णयार्थ सब धर्माचार्यों से शास्त्रार्थ किये थे

–मनमोहन कुमार आर्य                 सभी मनुष्य बुद्धि रखते हैं जो ज्ञान प्राप्ति में सहायक होने के साथ सत्य व असत्य का निर्णय कराने में भी…

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लेख विष्णुगुप्त चाणक्य कौटिल्य

विष्णुगुप्त चाणक्य कौटिल्य

—विनय कुमार विनायकईसा पूर्व तीन सौ पचास में चमकाएक सितारा भारत भूमि मगध में,ब्राह्मण चणक का पुत्र विष्णुगुप्तचाणक्य कौटिल्य; कूटनीतिज्ञ गुरुमगध सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का!…

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राजनीति समान नागरिक संहिता से ही संभव है सबका साथ सबका विकास

समान नागरिक संहिता से ही संभव है सबका साथ सबका विकास

-अशोक “प्रवृद्ध” संसार के किसी भी देश में पन्थ, मजहब के आधार पर पृथक- पृथक कानून नहीं होते, बल्कि सभी नागरिकों के लिए एक समान…

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कविता परिवर्तन

परिवर्तन

अचानक कैसे बदल जाता है सब कुछराह चलते चलते आदमी तक बदल जाता है।गांव से शहर जाने वाले का पता बदल जाता हैऔर तो और…

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कविता रिश्तों का भ्रम

रिश्तों का भ्रम

हर रिश्ते की बुनियाद में स्वार्थ छिपा है,हर बात के पीछे कुछ न कुछ भावार्थ छिपा है,पैसों की इस दुनिया में भावनाओं का क्या काम,खोखले…

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कविता नारी

नारी

उठो, जागो और लड़ोखुद के आत्मसम्मान के लिएखुद के अस्तित्व के लिए।सुना है न, भगवान भीउनकी मदद करता हैजो अपनी मदद खुद करते है।तो फिर…

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कविता आर्य कौन, कहां से आए

आर्य कौन, कहां से आए

—विनय कुमार विनायकआर्य कौन है?आर्य कहां से आए?यह आज भी पहेली हैकोई नही बुझा पाए हैंयह गुत्थी खुलती नहीकोई खोल नही पाए हैंसभी धारणा भटकाए!…

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दोहे कितने कल्पों से संग रहा!

कितने कल्पों से संग रहा!

कितने कल्पों से संग रहा,कितने जीवन ग्रह छुड़वाया;रिश्ते नाते कितने सहसा,मोड़ा तोड़ा छोड़ा जोड़ा! परिवार सखा जीवन साथी,वह बना रहा सब में साक्षी;हर राही से…

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दोहे झरने की हर झरती झलकी!

झरने की हर झरती झलकी!

झरने की हर झरती झलकी,पुलकी ललकी चहकी किलकी;थिरकी महकी कबहुक छलकी,क्षणिका की कूक सुनी कुहकी! कब रुक पायी कब देख सकी,रुख़ दुख सुख अपना भाँप…

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