चीन

चीन, भारत और दलाईलामा

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने तिब्बत को हड़पते हुए चीन को रोकने का उचित प्रयास नहीं किया। यदि इस घटना के घटित होते समय ही पंडित नेहरू के नेतृत्व में भारत उठ खड़ा होता तो संपूर्ण विश्व उस समय भारत के साथ होता। उस समय प्रथम विश्वयुद्घ को समाप्त हुए मात्र चार वर्ष का ही समय हुआ था। विश्व के लोग युद्घों की विनाशलीला से पहले से ही भय खा रहे थे, तब वह नहीं चाहते थे कि द्वितीय विश्वयुद्घ के समाप्त होते ही चीन जैसा कोई देश तीसरे विश्वयुद्घ की पृष्ठभूमि तैयार करने लगे। तब विश्व के देश साम्राज्यवाद को ‘पाप’ समझ रहे थे और इस दिशा में बढ़ते चीन को रोकने के लिए तब सारा विश्व एक हो सकता था, परंतु भारत चूक गया।

बात मुद्दे की करो, बकवास न करो चीन

चीनी सरकार के साथ चीन की मीडिया का भारत के प्रति रुख लगातार धमकाने वाला है, जिससे भारत कतई नहीं डरने वाला। हाल ही में चीन के सरकारी मीडिया ने बीजिंग द्वारा अरुणाचल प्रदेश के छह स्थानों का नाम रखने पर भारत की प्रतिक्रिया को ‘बेतुका’ कहकर खारिज करते हुए चेताया कि अगर भारत ने दलाई लामा का ‘तुच्छ खेल’ खेलना जारी रखा तो उसे ‘बहुत भारी’ कीमत चुकानी होगी। दलाई लामा की अरूणाचल यात्रा से बौखलाये चीन ने इन छह स्थानों के ‘मानकीकृत’ आधिकारिक नामों की घोषणा कर पहले से जटिल चल रही स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।

चीन की बेचैनी

दीगर मुल्कों में भारतीय प्रोडक्ट क्वालिटी और साख में चीन के माल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं, जिससे चीन बुरी तरह चिढ़ा हुआ है। चीन की चीप-टाइप बिजनेस ट्रिक्स के कारण कई मुल्कों के साथ तो उसके कारोबार और मुनाफे में गिरावट भी आई है। कुछ माह पहले, चीन ने कुछ अफ्रीकी देशों में अपने कारोबार को भारत से कड़ी चुनौती मिलने के बाद वहां भारतीय प्रोडक्ट्स को बदनाम करने की मुहिम छेड़ दी थी, और ‘मेड इन इंडिया’ के नकली ठप्पे लगाकर बड़े पैमाने पर अपना घटिया माल बाज़ार में उतार दिया था। ज़ाहिर है बिजनेस में सीधे ढंग से भारत का मुकाबला न कर पाने के कारण चीन खामख्वाह अरुणाचल जैसे मुद्दे उठाकर इसकी बांहें मरोड़ने की चाल चल रहा है।

अरुणाचल पर चीन का बार-बार दुस्‍साहस नेहरू की देन

चीन लगातार यह दावा पेश कर रहा है कि अरुणाचल प्रदेश चुंकि तिब्बत से लगा क्षेत्र है, इसलिए वह भारत का नहीं उसका हिस्‍सा है, जबकि सत्‍य यही है कि चीन का क्षेत्र तो तिब्‍बत भी नहीं है, वहां की निर्वासित सरकार भारत में शरणार्थी के रूप में इजरायलियों की तरह अच्‍छे दिन आने का इंतरजार करते हुए स्‍वतंत्र तिब्‍बत इस दिशा में विश्‍व जनमत तैयार करने के लिए प्रयास कर रही है।

चीन ने रोका ब्रह्मपुत्र का पानी

2013 में एक अंतरमंत्रालय विशेष समूह गठित किया गया था। इसमें भारत के साथ चीन का यह समझौता हुआ था कि चीन पारदर्षिता अपनाते हुए पानी के प्रवाह से संबंधित आंकड़ों को साझा करेगा। लेकिन चीन ने इस समझौते का पालन नहीं किया। वह जब चाहे तब ब्रह्मपुत्र का पानी रोक देता है, अथवा इकट्ठा छोड़ देता है। पिछले वर्षों में अरुणाचल और हिमाचल प्रदेशों में जो बाढ़ें आई हैं

चीन की गिरगिट वाली औकात?

चीन ने ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी रोका अब हम सब चीन की कोई भी प्रोडक्ट बाजार से न खरीदें अब हम सब भारतवासी हैं तो चीन को सबक सिखाने का इससे अच्छा मौका कभी नहीं मिलेगा। आज पुरी दुनिया में चाईनीज चीजों का बोल बाला है और यह हम सब जानते हैं। बाजारों में जहां नजर उठाकर देखो वहीं चाइनीज चीजें ही दिखाई देती हैं।