मणिपुर

मणिपुर में शुरु की भाजपा ने पहली पारी

ऐसा नहीं कि कांग्रेस अपनी सत्ता पर आया संकट देख कर भी चुपचाप देखती रही । पन्द्रह साल से मणिपुर में कांग्रेस की सरकार चला रहे इबोबी सिंह ने अन्ततः वही पत्ता चला जिसके बलबूते कांग्रेस लम्बे अरसे से पूर्वोत्तर में अपना शासन चलाती रही है । उसने राज्य के नौ जिलों को तोड़ कर उनके सोलह ज़िले बना दिए । मणिपुर के नौ जिलों में से चार ज़िले तो घाटी में हैं और पाँच ज़िले पहाड़ में हैं ।

मणिपुर में अलगाववादियों को सर उठाने का मौका क्यों मिला ?

मणिपुर में लंबे समय से सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून का विरोध होता आ रहा है . राज्य में एकबार फिर से कई संगठन इसके विरोध के लिए एकजुट होकर सडकों पर उतरे हैं. मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इस विशेषाधिकार क़ानून के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए इन संगठनों ने राज्य में 60 घंटे का बंद बुलाया जिसमें जनजीवन पर मिलाजुला असर दिखाई पड़ा . मामले के अभी गरम होने की वजह पहले चरमपंथी रहे और अब सामान्य जीवन में वापसी कर चुके संजीत की कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में हत्या को समझा जा रहा है .