वैश्विक मंदी के दौर में गांधी का चरखा

Posted On by & filed under आर्थिकी

प्रमोद भार्गव वैश्वीकरण के दौर में चरखे के व्यवसाय में उछाल के आंकड़े अविश्वसनीय एवं हास्यापद लगते हैं। लेकिन हकीकत को झुठलाया नहीं जा सकता। महात्मा गांधी के स्वरोजगार और स्वावलंबन के विचार का प्रतीक चरखा प्रौद्योगीकीय तकनीक और पाश्चात्य जीवनशैली अपनाने की होड़ में हस्क्षेप कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है, यह हैरानी… Read more »

महात्मा के ब्रह्मचर्य प्रयोग

Posted On by & filed under विविधा

शंकर शरण नोट : संपादकीय भूलवश लेखक का पुराना लेख प्रकाशित हो गया था। अब इसका अद्यतन पाठ यहां प्रस्‍तुत है। (सं. 19.10.2011) जोसेफ लेलीवेल्ड की नई पुस्तक ‘ग्रेट सोलः महात्मा गाँधी एंड हिज स्ट्रगल विद इंडिया’ पर गुजरात में प्रतिबन्ध लगा दिया गया। महाराष्ट्र में भी वही तैयारी शुरू हुई थी। पुस्तक में विवादास्पद… Read more »

गांधीजी के विचार और जलवायु परिवर्तन की चुनौती

Posted On by & filed under पर्यावरण

नवनीत कुमार गुप्ता राष्‍ट्रपिता महात्मा गांधी संसार के उन चंद महापुरूषों में से एक हैं जिनके विचार सदैव मानव सभ्यता के विकास में बहुमूल्य साबित होते रहे हैं। गांधी जी ने केवल सामाजिक और राजनीतिक ही नहीं बल्कि जीवन के सभी क्षेत्रों में अपना दृष्टिकोण व्यक्त किया है। आज जबकि मानवीय मूल्यों और पर्यावरण में… Read more »

वोट-बैंक राजनीति के पहले शिकार

Posted On by & filed under महत्वपूर्ण लेख, राजनीति

शंकर शरण  अच्छा होता कि मोहनदास करमचंद गाँधी की विरासत का सम्यक मूल्यांकन करके उन के विचार व कर्म से दूध और पानी अलग कर के लाभ उठाया जाता। तब उन के महान कार्यों के साथ-साथ भयंकर गलतियों से भी सीख ले कर हम आगे बढ़ सकते थे। किंतु भारी अज्ञान, कांग्रेसी-वामपंथी दुष्प्रचार और राजनीतिक… Read more »

अस्तित्व के संकट से जुझ रहे विश्व को संबल देता है गांधी दर्शन

Posted On by & filed under विविधा

गांधी जयंती (2 अक्‍टूबर) पर विशेष समन्वय नंद विश्व आज अनेक समस्याओं से दो- चार हो रहा है, और इनके कारण उनके अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं । तापमान बढने व ओजोन में छेद होने के कारण इस प्लैनेट पर जीवन के अस्तित्व ही खतरे में पड गया है अब ऐसा… Read more »

हिन्द स्वराज का दूसरा पलड़ा

Posted On by & filed under महत्वपूर्ण लेख, विविधा

शंकर शरण डॉ. राममनोहर लोहिया ने 1963 में लिखा था, “गाँधीजी ने दार्शनिक और कार्यक्रम-संबंधी उदारवाद का जो मेल बिठाया, उसका मूल्यांकन करने का समय शायद अभी नहीं आया है। … अधिकांश देशवासी आजादी की प्राप्ति को ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। दरअसल वह कोई उपलब्धि नहीं है। उनके बिना भी देश अपनी… Read more »

क्या यही है गांधी और नेहरू की कांग्रेस?

Posted On by & filed under विविधा

डॉ. वेदप्रताप वैदिक प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से कोई यह आशा नहीं करता कि वे जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी या अटल बिहारी वाजपेयी की तरह लालकिले से कोई ओजस्वी या प्रेरणादायक भाषण देंगे। वे जन नेता नहीं हैं। वे नेता भी नहीं हैं, लेकिन जो व्यक्ति सात बार लालकिले से राष्ट्र को संबोधित कर चुका… Read more »

स्त्री अधिकार और गांधी चिंतन

Posted On by & filed under महिला-जगत

सुभाष सेतिया महिलाओं के प्रति गांधीजी के सकारात्मक दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक सुदृढ़ और सहृदय मानते थे। वे नारी को अबला कहने के भी सख्त खिलाफ थे। उनकी यह धारणा उनके आचरण, लेखों तथा व्याख्यानों में अनेक बार प्रकट हुई। इस संदर्भ में महात्मा… Read more »

बिना क्रांति के विकास की कल्पना कोरी गल्प

Posted On by & filed under विविधा

बृजेन्द्र अग्निहोत्री महात्मा गाँधी का नाम सुनते ही हमारी स्मृति में एक देवतुल्य आकृति आ उभरती है। आजादी की चर्चा होते ही, महात्मा गाँधी का स्मरण अनासास हो जाता है। हमें यह स्वीकार करना ही पड़ता है कि आज दासता की जंजीरों से मुक्त, हम जो खुले आसमान के नीचे सांस ले रहे है वह… Read more »

दूसरी आजादी की लड़ाई में है विराट जन-भागीदारी : प्रो. कुसुमलता केडिया

Posted On by & filed under साक्षात्‍कार

प्रख्यात समाजवैज्ञानिक एवं गांधी विद्या संस्थान, राजघाट, वाराणसी की कार्यकारी निदेशक प्रो. कुसुमलता केडिया का मानना है कि स्वामी रामदेव और श्री अन्ना हजारे के नेतृत्व में जो जनान्दोलन चल रहे हैं, उनमें दोनों में मिलाकर विराट जन-भागीदारी है और ये आन्दोलन पूर्णत: सफल हैं। स्वयं महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले आन्दोलन में इतनी… Read more »