राष्ट्रवाद

राष्ट्रवाद से जुड़े विमर्शों को रेखांकित करती ” राष्ट्रवाद, भारतीयता और पत्रकारिता” किताब 

पुस्तक समीक्षा राष्ट्रवाद से जुड़े विमर्शों को रेखांकित करती एक किताब :  राष्ट्रवाद, भारतीयता और पत्रकारिता लोकेन्द्र

सुशासन के कीर्तिमान गढ़ने का समय

अब समय आ गया है जब भाजपा को प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के लिए विशिष्ट आचार संहिता का प्रावधान करना चाहिए , जिसमें नैतिकता , सदाचार , इमानदारी, संवेदनशीलता और सहृदयता जैसे उच्च मानक हो जिनके पालन को सुनिश्चित कराया जाए । क्योंकि भले ही जनता ने मोदी जी और पार्टी की विचारधारा पर विश्वास करके भाजपा को वोट दिया हो परंतु रोजमर्रा की समस्याओं के लिए कार्यकर्ताओं जनता का साबका पार्षद , विधायको और सांसदों से ही पड़ता है ।अगर इन लोगों का आचरण विपरीत किस्म का होगा तो जनता का विश्वास टूटेगा और उसे दूसरे विकल्प की तरफ देखना पड़ेगा ।

आखिर लोगों को कितनी अभिव्यक्ति की आजादी चाहिए ?

यह देश का एक बेहद कठिन व दुर्भाग्यपूर्ण दौर है कि वर्तमान में भारत में देशविरोधी नारे लगाने वालों व की भीड़ लग गयी है। ऐसे तत्वों को राजनैतिक समर्थन भी हासिल हो रहा है। यह लोग आतंकियों के प्रति हमदर्दी दिखाते हैं और उनके पीछे उने समर्थकों की फौज खड़ी हो जाती है। खबरें यह भी हैं कि आने वाले दिनों में आतंकवादी समर्थक सांसदों ने गुलमेहर की आड़ में पीएम मोदी की सरकार को घेरने के लिए संसद ठप करने की भी निर्लज्ज योजना बना ली है।