लेखक परिचय

लक्ष्मी जायसवाल

लक्ष्मी जायसवाल

स्वतंत्र लेखिका, ब्लॉगर व टिप्पणीकार

डरता है मन मेरा

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डरता है मन मेरा कहीं हो न जाए तेरे भी जीवन में अंधेरा नाजों से पली थी मैं अपनी बगिया की कली थी एक दिन उस बगिया को छोड़ चली थी मैं नए सपनों को देख मचली थी मैं जैसे बहारों के मौसम में खिली थी मैं पर अगले ही दिन मुस्कान खो चुकी थी… Read more »

बचपन की कैद  

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नन्हें नन्हें कांधों पर वजन उठाये कौन सी जंग लड़ रहे हैं ये ज़िन्दगी के मासूम सिपाही। क्या यही है इनके लिये ज़िन्दगी की अनमोल सौगात? कब तक यूँ ही बोझा ढोयेंगे ये नन्हें-नन्हें कोमल हाथ? क्या यही है इनके लिये ज़िन्दगी के असली मायने? या देख पाएंगे ये भी कभी बचपन के सपने सुहाने? गुड्डे-गुड़ियों का घर सजाने… Read more »



विवशता

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माफ कर देना मुझे  गर हो सके तो क्योंकि मेरी लाडो ये दुनिया नहीं है  तेरे लिए यहां पग-पग  तेरी राहों पर  बिछे होंगे कांटे तेरे पैदा होते ही  शुरू हो जाएगा  चारों ओर मातम। जैसे-जैसे बड़ी होगी तू मेरी रानी शुरू हो जाएगी तेरे जीवन में परेशानी समाज नहीं देगा हक  तुझे कोई गर… Read more »