कविता आरम्भ में ब्रह्म एक था September 28, 2020 / September 28, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआरंभ में ब्रह्म एक था,‘एको ब्रह्म दूजा नास्ति’ब्रह्म द्विजाकर हो बनापुरुष-प्रकृति और सृष्टि! आरंभ में वेद तीन थाऋक्,साम, और यजुर्वेदबाद में चौथा अथर्ववेद;सभी वेदों का समाहार! मानवीय आचार-विचार,जन्म, विवाह, अंत्येष्टिऔषधि, चिकित्सा,जादू,मातृभूमि प्रेम,ब्रह्मज्ञानअथर्ववेद से मिला हमें! आरंभ में ब्रह्म एक था,बाद में त्रिदेव बन गयाब्रह्मा विष्णु और शिव,फिर तैंतीस कोटिक देवजन जातियों से आया! […] Read more » आरम्भ में ब्रह्म एक था
कविता बिन बेटी सब सून ! September 27, 2020 / September 27, 2020 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment जीवन में आनंद का, बेटी मंतर मूल !इसे गर्भ में मारकर, कर ना देना भूल !! बेटी कम मत आंकिये, गहरे इसके अर्थ !कहीं लगे बेटी बिना, तुझे सृष्टि व्यर्थ !! बेटी होती प्रेम की, सागर सदा अथाह !मूरत होती मात की, इसको मिले पनाह !! छोटी-मोटी बात को, कभी न देती तूल !हर रिश्ते […] Read more » daughters day बिन बेटी सब सून
कविता प्रभु से प्रार्थना September 27, 2020 / September 27, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जो जग का करता है लालन पोषणकभी किसी का करता नहीं शोषणउस प्रभु की सदा आरती हम उतारेउसको हम कभी भी नहीं बिसरावे कोरोना काल में ही कर रहा रक्षाशायद लेे रहा हो हमारी वह परीक्षाउसकी परीक्षा में सफल हम हो जाएउसे सदा हम अपना शीश झुकाए।। जो लिखने की देता है हमें शक्तिउसकी सदा […] Read more » प्रभु से प्रार्थना
कविता नारी ने नर को जन्म दिया September 27, 2020 / September 27, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment नारी ने नर को जन्म दियानर ने उसे है बाजार दियाजिस नारी ने नर को पाला हैउस नर ने उस पर अत्याचारकिया।। समय अब बदल रहा हैनारी अब बदल रही हैंवह अपने अधिकारों कोकाफी अब समझ रही हैं।। पहले नारी अशिक्षित थीअब नारी काफी शिक्षित हैअब इस शिक्षा के कारण हीनारी नर पर अब भारी […] Read more » Woman gave birth to a male नारी ने नर को जन्म दिया
कविता सृष्टि के आरंभ से हम कहांतक गुजरे September 26, 2020 / September 26, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकसृष्टि के आरम्भ से!वैदिक कर्मकाण्डी ब्राह्मणयोग ज्ञानी क्षत्रिय बनेऋग्वेद पुरुषसुक्त कहताब्रह्मा के मुख ब्राह्मण होते,क्षत्रिय ब्रह्मा के बाहु!मुख ने श्राप दिया बाहु को,बाहु ने मुख को दंड!मुख में राम बगल में परशु,बाहु बना सहस्त्रबाहु!परशुराम और सहस्त्रार्जुन मेंयुद्ध चला कई पुश्त!मुख ने तोड़ दिया भुज दंड!ब्राह्मण ब्राह्मण ही रहा,क्षत्रिय होने लगा श्रमण!श्रषभ देव से […] Read more » From the beginning of the world we passed सृष्टि के आरंभ से हम कहांतक गुजरे
कविता महादेवी जी की मन की भावना September 26, 2020 / September 26, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment इच्छाएं मेरी अनेक अनंत थीउनका मैंने अब त्याग कियाइच्छाएं ही दुख की कारण थीउनका नहीं मैंने स्मरण किया साथी मेरा अब चला गयाउसका शोक अब क्या करनाजीवन की बची है पगडंडियांउन पर चल जीवन पूरा करना भू की न प्यास बुझा पाईउसकी भी मै न कुछ दे पाईप्रयत्न किए थे बहुत कुछ मैंनेपर अंत समय […] Read more » महादेवी जी
कविता हे भगवन!मुझे आत्मज्ञान दें September 25, 2020 / September 25, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकहे भगवन!मुझे आत्मज्ञान दें!मैं मंत्रवेत्ता;चतुर्वेद/पंचमवेद/वेदों का वेदकल्पसूत्र-निरुक्त-शास्त्र-गणित-विज्ञान का ज्ञाता!किन्तु दुर्बलचित्/कर्मवित्/मंत्रवित्शोकाकुल रहता हूंअस्तु;आत्मवेत्ता नहीं हूं!हे भगवन!मैं शब्दज्ञानी/अभिधानी/नाम का ज्ञानीसिर्फ नाम गिना सकता हूंअस्तु;आत्मवेत्ता नहीं हूं!हे भगवन!मुझे आत्मज्ञान की नौका सेशोक सागर पार करा दें!‘नाम वा ऋग्वेदो यजुर्वेद–ऋग्वेद,यजुर्वेदादि नाम ही हैब्रह्मबुद्धि में प्रतिमा सी-यह ब्रह्म हैअस्तु नाम की उपासना करो!यदि नाम की उपासना करता हूं!सिर्फ […] Read more »
कविता पीड़ा के दो छोर September 24, 2020 / September 24, 2020 by बीनू भटनागर | Leave a Comment १ज़िंदगी समय मेंघुलती जा रही है।समय में घुलने कीअनंत पीड़ा है।पीड़ा से बचने के लिये,शब्दों और सुर तालका सहारा है।संगीत में डूब जाऊं याकाव्य में बिखर जाऊँ,घुलने के कष्ट कोथोड़ा सा बिसराऊँफिर उठकर पीड़ा कोथोड़ा सा सहलाऊँ,फिर अपनी जीत परयूँ मुस्किराऊं…जानती हूँवो दरवाज़े की ओट मेेेंखड़ी हैअभी ज़राकिसी दवा से डरी हैअब तो ये लड़ाईजीवन […] Read more » the two ends of pain पीड़ा के दो छोर
कविता हे ईश्वर यदि तुम एक हो September 23, 2020 / September 23, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे ईश्वर! यदि तुम एक हो,मानव-मन में एकता भर दे!असिधर को मसीधर कर दे!मसीधर में सद्विवेक भर दे! हे ईश्वर! यदि तुम नेक हो,अपने अंधभक्तों के चक्षु मेंज्ञान की ज्योति को भर दे!उनके तम कलुष को हर ले! हे ईश्वर! यदि तुम ईश्वर हो,भक्तों को सब्जबाग ना दिखाअप्सरा, हूर, परी जन्नत वालीजन्नत,दोजख से […] Read more » हे ईश्वर यदि तुम एक हो
कविता जब अपने सृष्टा कवियों से दुखी हो कविताओं ने की सामूहिक आत्महत्या September 23, 2020 / September 23, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव विश्व के तमाम देश के कवि अपना दिमाग लगाकर जितनी कविताए एक साल में लिखते है, उतनी कविताए भारत देश के तथाकथित कविगण एक सप्ताह में लिख लेते है। या कहिए भारत एकमात्र देश है जिसके हर शहर, मोहल्ले, गली ओर हर गाँव में एक से एक धुरंधर कवि मिल जाएँगे। या […] Read more » When poets are saddened by their creation poems commit mass suicide कविताओं ने की सामूहिक आत्महत्या
कविता मेरे मन के भाव September 22, 2020 / September 22, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कुछ स्वप्न थे मेरे धुंधलेे से,कुछ चाहत मेरी उजली थी।कोई आहट थी धीमी सी ,उनके लिए मै पगली सी थी।। कुछ मन में भाव अजीब से थे ,दिल में मिलने कुछ चाहत थी ।।न मै मिल सकी न तुम मिल सके,दोनों के दिल में घबराहट थी।। कुछ पगडंडी टेढ़ी सी थी,दिल में कुछ झुंझलाहट थी […] Read more » मेरे मन के भाव
कविता ये देश है अपना September 21, 2020 / September 21, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment ये देश है अपनाहिम शिखर सिरहाने मेंकैलाश मानसरोवर उपरगंगा जमुना का कछारदेश का बिछौना! ये देश है अपनाकश्मीर बड़ी हसीन हैवादियां बड़ी रंगीन हैछोड़ो संगीन की बोलीछेड़ो राग तराना! ये देश है अपनादिल्ली देश का दिलहरियाणा की हरियालीपंजाब की गेहूँ बालीपूर्व में सतबहना! ये देश है अपनागुजरात शेर का जब्ड़ाअरावली महाबली हैविंध्याचल झुकल, मानअगस्त का […] Read more »