आर्थिकी लेख विकसित देशों की तुलना में भारत में तेजी से कम हो रही है गरीबी October 12, 2022 / October 12, 2022 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र डेवलपमेंट प्रोग्राम ने मानव विकास सूचकांक (एचडीआर) प्रतिवेदन 2021-22 जारी किया है। एचडीआर की वैश्विक रैंकिंग में भारत 2020 में 130वें पायदान पर था और 2021 में 132वें पर आ गया है, ऐसा इस प्रतिवेदन में बताया गया है। Read more » Poverty is decreasing faster in India than developed countries
कविता गुजर जाती है उम्र,रिश्ते बनाने में। October 11, 2022 / October 11, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment गुजर जाती है उम्र,रिश्ते बनाने में।पर पल नही लगता इसे ठुकराने में।। वक्त लगता है,अपना घर बनाने में।पर पल नही लगता,इसे गिराने में।। उम्र खत्म हो जाती है,धन कमाने में।पर पल नही लगता है,उसे गवांने में।। बड़ी मुश्किलें आती है,एक सच्चा दोस्त बनाने में,पर पल भर नही लगता,उससे दुश्मनी बनाने में।। जिंदगी घटती जाती है,पल […] Read more » गुजर जाती है उम्र रिश्ते बनाने में
कविता महाभारत हकमार व हकवंचित के मध्य जंग था October 11, 2022 / October 11, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment महाभारत हकमार व हकवंचित के मध्य जंग था Read more » Mahabharata was a war between Hakmar and Hakwanchit महाभारत हकमार व हकवंचित के मध्य जंग था
कविता कोई धर्म मजहब बुरा नहीं धर्मगुरु ही पूर्वाग्रही होता October 11, 2022 / October 11, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकउसने नारी को जला दिया फिर इसने भी जला दियाउसने बलात्कार किया फिर इसने भी बलात्कार कियावो दुष्ट अगर मोमिन था तो ये दुष्ट काफिर निकला! आखिर क्यों हर मतावलंबी बुराई का ही नकल करताधर्म और मजहब से आचार-विचार क्यों निकल जाता? आखिर क्यों नहीं मानव सद्विचार को ग्रहण करता?दुष्कर्म करके आखिर क्यों […] Read more » No religion religion is bad only the religious leader is prejudiced कोई धर्म मजहब बुरा नहीं धर्मगुरु ही पूर्वाग्रही होता
मनोरंजन लेख सिनेमा क्रिएटिव लिबर्टी के बहाने, आस्था पर निशाने October 10, 2022 / October 10, 2022 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment बुद्धिजीवियों और बॉलीवुड को इस बात पर मंथन करना चाहिए। भगवान् श्री राम और रामायण से हमारी आस्था जुडी हुई इसलिए उनसे जुडी हुई किसी भी चीज़ का लोकतान्त्रिक तरीके से विरोध करना हमारा संवैधानिक अधिकार है। सबसे बड़ा सवाल है की अगर आने वाली पीढ़ी रामायण को इस तरह देखेंगी तो वो उसके महत्त्व […] Read more » adipurush saif ali khan as ravan
लेख विश्ववार्ता दुनिया को नहीं चाहिए हिज़ाब तो भारत में क्यों विवाद? October 10, 2022 / October 10, 2022 by डॉ राघवेंद्र शर्मा | Leave a Comment हिजाब के विरोध में जिस तीव्र गति से आंदोलन बढ़ रहे हैं, उनसे एक बात स्पष्ट हो चली है कि अब मुस्लिम महिलाओं ने भी अपने अधिकार जान लिए हैं और स्वयं को इस लायक समझने लगी हैं कि अपने दायित्वों को अब हमें खुद तय करना है। इन का निर्धारण कोई दूसरा व्यक्ति नहीं कर सकता। भविष्य के प्रति खुलेपन का भरोसा इसलिए भी आशाओं की नई उजास पैदा कर रहा है, क्योंकि अब इस आंदोलन को मुस्लिमों के अलावा दुनिया भर की सभी वर्गों की महिलाओं का समर्थन मिलना शुरू हो गया है। Read more » The world does not want hijab why hijab dispute in India? दुनिया को नहीं चाहिए हिज़ाब
पर्यावरण लेख दिल्ली हो सकती है पूरी तरह से रिन्यूबल एनेर्जी पर निर्भर, अगर… October 8, 2022 / October 8, 2022 by निशान्त | Leave a Comment रिन्यूएबल एनर्जी नामक पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित एक लेख से इस बात की प्रबल संभावना जाहिर हुई है कि दिल्ली वर्ष 2050 तक जीवाश्म ईंधन से छुटकारा पाकर 100% अक्षय ऊर्जा पर निर्भरता का लक्ष्य हासिल कर सकती है। अपनी तरह के इस पहले शोध में दिल्ली जैसे उत्तर भारतीय महानगर में 100% अक्षय ऊर्जा प्रणालियों […] Read more »
कविता सबका देह देवालय है सबकी दुआ और वफा करना October 8, 2022 / October 8, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकसारे मानव भाई है सबके सब एक हीसबका देह देवालय है सबकी दुआ और वफा करना! हर देवालय में देव बसे हैं एक ही जैसेउन्हें खुद से अलग नहीं कोई दूजा पराया समझना! सबकी देह से नेह स्नेह कर ले बन्देदेह सभी मंदिर है जिसमें एक रब का है आशियाना! मंदिर मस्जिद गिरजाघर […] Read more »
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म लेख महाकाल लोक : आस्था और आध्यात्म का नवीन प्रकल्प October 8, 2022 / October 8, 2022 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमारमहाकाल को साक्षी बनाकर, उनके समक्ष नतमस्तक होकर सरकार जब खड़ी होती है तो महाकाल का आशीष बरसने लगता है. राज्य के विकास के विकास के रास्ते खुद ब खुद खुलने लगते हैं. महाकाल लोक भी महाकाल के आशीष से आरंभ हो रहा है. बोलचाल में जब हम एक और एक ग्यारह बोलते हैं […] Read more » Mahakal Lok
लेख 5G और गांव में नेटवर्क की समस्या October 7, 2022 / October 7, 2022 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment बबली सोरागी कपकोट, उत्तराखंड भारत भले ही आज 5G नेटवर्क की तरफ तेजी से कदम बढ़ रहा हो, लेकिन देश के कई ऐसे ग्रामीण क्षेत्र हैं जहां लोगों को मामूली नेटवर्क तक उपलब्ध नहीं हो पाता है. उन्हें इंटरनेट स्पीड मिलना तो दूर की बात है, अपनों से फोन पर भी बात करने के लिए गांव से कई किमी दूर […] Read more » 5G and network problems in the village
कहानी रिश्ते October 6, 2022 / October 6, 2022 by डॉ० शिबन कृष्ण रैणा | Leave a Comment जिस दिन मिस्टर मजूमदार को पता चला कि उनका तबादला अन्यत्र हो गया है, उसी दिन से दोनों पति-पत्नी सामान समेटने और उसके बण्डल बनवाने, बच्चों की टी०सी निकलवाने, दूधवाले, अखबार वाले आदि का हिसाब चुकता करने में लग गए थे। पन्द्रह वर्षों के सेवाकाल में यह उनका चौथा तबादला था। सम्भवत: अभी तक यही […] Read more » रिश्ते
लेख समाज पेशा अध्यापन का मनोवृत्ति राक्षसीय ? October 6, 2022 / October 6, 2022 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी स्कूली शिक्षा ग्रहण करने वाला लगभग प्रत्येक भारतवासी संत कबीर के उन दोहों से भली भांति परिचित है जो हमें गुरु के रुतबे व उनके महत्व से परिचित कराते हैं। संत कबीर का सबसे प्रसिद्ध व प्रचलित दोहा ‘गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरू आपने गोविन्द दियो बताय’।। अर्थात […] Read more » Attitude of teaching profession demonic? पेशा अध्यापन का मनोवृत्ति राक्षसीय