कविता दुनिया भर के बच्चे, मां और भाषाएं January 31, 2021 / January 31, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकएक जैसे होते दुनिया भर के बच्चे!एक ही बाल-सुलभ हंसी-रुदन-कौतुकबच्चे चाहे हों अमेरिकी/अफगानी/तालिबानी/ब्रितानी/ईरानी/पाकिस्तानीभारतीय सप्तद्वीप-नौखण्ड में कहीं केएक जैसे होते दुनिया भर के बच्चे! दुनिया भर के बच्चों के,मां की कोख सेनिकलते ही के हूं—के हूं–कहां—कहां? केपहले सबाल में ही छिपी होतीविश्वभर की तमाम मानवीय भाषाएं! जिसे समझ लेती विश्वभर की मांएंदूध उतर आए […] Read more » Children mothers and languages around the world दुनिया भर के बच्चे मां और भाषाएं
लेख गांधी से क्या सीखें हम ? January 31, 2021 / January 31, 2021 by अरुण तिवारी | Leave a Comment अरुण तिवारी वर्ष-2021 की गांधी पुण्य तिथि ऐसे मौके पर आई है, जब खुद को लोक प्रतिनिधि सभा कहने वाली संसद में खेती से जुड़े ऐसे तीन प्र्रस्तावों को बिना बहस क़ानून बना दिया गया है, जिन्हे खुद खेतिहर अपने खिलाफ बता रहे हैं। वे क़ानूनों को रद्द कराने की जिद्द पर अडे़ हैं। कृषि […] Read more » What should we learn from Gandhi? गांधी से क्या सीखें हम
लेख हम जो कुछ भी होते हैं वह मां के कारण होते हैं January 31, 2021 / January 31, 2021 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment मां का हमारे जीवन में अमूल्य योगदान है । संसार के जितने भर भी महापुरुष हुए हैं उनके निर्माण में सबसे बड़ा योगदान मां का रहा है। जो महापुरुष युगधारा को परिवर्तित करते हैं और इतिहास को मोड़ने की क्षमता रखते हैं उन सबके निर्माण में मां का विशेष योगदान रहा है । इस प्रकार […] Read more » मां
कविता हारा-थका किसान ! January 31, 2021 / January 31, 2021 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment बजते घुँघरू बैल के, मानो गाये गीत ! चप्पा चप्पा खिल उठे, पा हलधर की प्रीत !! देता पानी खेत को, जागे सारी रात ! चुनकर कांटे बांटता, फूलों की सौगात !! आंधी खेल बिगाड़ती, मौसम दे अभिशाप ! मेहनत से न भागता, सर्दी हो या ताप!! बदल गया मौसम अहो, हारा-थका किसान ! सूखे […] Read more » हारा-थका किसान
कविता बापू की पुण्यतिथि पर January 31, 2021 / January 31, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बापु तुम्हारी पुण्यतिथि पर तुमको क्या मै बताऊं,आज तिरंगा रो रहा है किस किस को मै समझाऊं । नाम किसानों का लेकर ये झंडा खालिस्तानी फहराते,शोरगुल व तोड़ फोड़ कर अपनी बाते मनवाते। अब तो तुम्हारे तीनों बंदर भी गूंगे बहरे अंधे हो गए है,सत्य अहिंसा का मार्ग छोड़कर,ये मस्त कलंदर हो गए हैं। शायद […] Read more » बापू की पुण्यतिथि
कविता विदाई January 31, 2021 / January 31, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment आँसुओं के संग जबहोती है ठठोलीमुश्किल है समझनातब नैनों की बोली पिता दिखता है परेशानमाँ लगती है बेचैनबहन दिनभर हँसती हैरोती है सारी रैन भाई की आँखों मेंदिखता है तब ग़म का रेलानिकट आती है जबबहन के विदाई की बेला अजीब-सी घड़ी होती हैजब बजती है शहनाईकिसी से होता है मिलनहोती है किसी से जुदाई […] Read more » विदाई
व्यंग्य हे भाय ! कम्बल है कि पद्मश्री सम्मान…? January 31, 2021 / January 31, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल भगवान ने ठंड और गरीबों की जोड़ी काफी शोध के बाद बनाई है। गरीबी को लेकर रोना आम है। लेकिन उनकी हस्ती है कि मिटती नहीं है। गरीबी मिटाने को अनगिनत लोग आए और नारे भी लाए। गरीबी तो नहीं मिटा पाए, समय […] Read more » कम्बल वितरण समारोह कम्बल है कि पद्मश्री सम्मान
कविता फिर क्यों बहाते हो मातृ कोख का खून? January 29, 2021 / January 29, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकनदी-पहाड़-झील-झरने-पौधे और खूनक्या हम बना सकते? भगीरथ से पूछो जिसने बीड़ा उठाया थाएक हरकुलियन टास्क गंगा बनाने कापर क्या बना पाया था उन्होंने एक गंगा? जो हिमालय का वक्ष फोड़करगोमुख तोड़कर, शिलाखंड मोड़करअपने गोद में आबाद करतीइलाहाबाद, बनारस, पटना, भागलपुर जैसेविशाल जन आबादी वाले शहरऔर खो जाती समुद्री गर्भ में! फिर क्यों नहीं […] Read more » क्यों बहाते हो मातृ कोख का खून
कविता जवानी January 29, 2021 / January 29, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment हो जाती है हर किसी सेकोई-ना-कोई नादानीआती है जब जीवन मेंखिलती हुई जवानी मोहब्बत भी लेती हैपहली बार अँगड़ाईछूती है जब प्यार सेजिस्म को तरुणाई पतझड़ का मौसम भीउसे लगता है सावनबहार बनकर आता हैजिस किसी पर यौवन हर पल होता है द्वंद्वदिल और दिमाग़ मेंजब जल रहा होता हैकोई जवानी की आग में ✍️ […] Read more » जवानी
राजनीति व्यंग्य चौथी कसम उर्फ दिल्ली पहुंचकर मारे गये गुलफाम January 28, 2021 / January 28, 2021 by नवेन्दु उन्मेष | Leave a Comment नवेन्दु उन्मेष तीसरी कसम फिल्म का हीरामन अपनी बैल गाड़ी हांकता हुआ किसान आंदोलन मेंशामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गया। उसके दिल्ली पहुंचते ही अन्यकिसानों ने उसका जमकर स्वागत किया। हीरामन से कहा कि अच्छा हुआ हीरामनतुम दिल्ली आ गये। यहां तो सिर्फ बिहार के किसानों की कमी खल रही थी। कुछदलों की ओर […] Read more » दिल्ली पहुंचकर मारे गये गुलफाम हीरामन अपनी बैल गाड़ी हांकता हुआ किसान आंदोलन में
कविता अच्छा इंसान January 28, 2021 / January 28, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment किसी देश का फ़ौजी होया हो कहीं का किसानयह ज़रूरी नहीं हैवह होगा अच्छा इंसान पेशे से नहीं बनतीइंसान की परिभाषाहर पुष्प की नहीं होतीएक जैसी अभिलाषा बेइमानों की जहान मेंमुश्किल है पहचानकिंतु सत्य यह भी हैसब नहीं एक समान इंसानियत जिसमें ज़िंदाजो संवेदनहीन नहींनेक हो जिसकी नीयतहै अच्छा इंसान वही Read more » अच्छा इंसान
कविता अल्लाह, ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा January 28, 2021 / January 28, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअल्लाह, ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा,आ मेरे मौला आ, संग-संग होली मना! राधा-कान्हा के संग में तुम भी आज रंग जाआ मेरे मौला आ,संग-संग होली मना! तेरे मिल्लत में हमने ईद की सेवईयां खाई,तुम भी होली उत्सव का थाली भर पुआ खा! अल्लाह,ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा!आ मेरे मौला […] Read more » अल्लाह ईश्वर रब