व्यंग्य सेल ! सेल ! पर एक गजल September 15, 2018 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on सेल ! सेल ! पर एक गजल सेल लगाकर दुकानदार,ग्राहकों को आकर्षित करते अधिक है जब ग्राहक दुकान में घुस जाये,उसकी जेब काटते अधिक है देते है जो डिस्काउंट,चीजो की प्राइस बताते अधिक है इस तरह दुकानदार ग्राहकों का,ऊल्लू बनाते अधिक है लालच करना बुरी बला है,उसमे ग्राहक फसते अधिक है जो फस जाते है उसमे,बाद में पछताते बहुत अधिक है सेल […] Read more » दुकानदार ग्राहकों लालच सेल ! सेल ! पर एक गजल
कविता हिन्दी की व्यथा September 14, 2018 by डॉ छन्दा बैनर्जी | 6 Comments on हिन्दी की व्यथा डॉ. छन्दा बैनर्जी हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य पर जहाँ एक ओर हम हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की बात करते हैं, वहीं दबे स्वर यह भी स्वीकार करते हैं कि अंग्रेजी अभी भी हमारे व्यवसाय का प्रमुख भाषा है । अपने ही देश में खुद के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार से व्यथित […] Read more » आज़ाद हिन्दुस्तान भजन राष्ट्रभाषा संगीत हिन्दी पढ़ो
कविता हिंदी भाषा पर कुछ दोहे September 14, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है,इसका करो विकास हिन्दी में सब काम करो,ऐसा करो सब प्रयास हिन्दी बोलोगे तो होगा देश का तभी विकास दूसरी भाषा बोलोगे, होगा हिंदी का परिहास अगर छोड़ते अपनी भाषा,ये हिंदी का अपमान है लिखे और बोले अपनी भाषा,ये हिंदी की शान है भारत माँ के भाल पर, जो सजी हुई […] Read more » भारत माँ राष्ट्र भाषा हिंदी भाषा पर कुछ दोहे
व्यंग्य बदहाल अर्थ व्यवस्था में आखिर क्या करे आदमी ….!! September 14, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा कहां राजपथों पर कुलांचे भरने वाले हाई प्रोफोइल राजनेता और कहां बाल विवाह की विभीषिका का शिकार बना बेबस – असहाय मासूम। दूर – दूर तक कोई तुलना ही नहीं। लेकिन यथार्थ की पथरीली जमीन दोनों को एक जगह ला खड़ी करती है। 80 के दशक तक जबरन बाल विवाह की सूली […] Read more » दिल्ली-मुंबई फिजूलखर्ची बदहाल अर्थ व्यवस्था
साहित्य ‘आर्यसमाज विश्व की प्रथम धार्मिक सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर वेदों का प्रचार किया’ September 14, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, आर्य समाज की स्थापना गुजरात में जन्में स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई नगरी में की थी। आर्यसमाज क्या है? यह एक धार्मिक एवं सामाजिक संस्था है जिसका उद्देश्य धर्म, समाज व राजनीति के क्षेत्र से असत्य को दूर करना व उसके स्थान पर सत्य को स्थापित […] Read more » अध्यापक कवि पत्रकार प्रोफेसर वेदभाष्यकार स्वतन्त्रता आन्दोलन
समाज साहित्य हिन्दी आत्मा है भारत की September 14, 2018 by डॉ. मधुसूदन | 13 Comments on हिन्दी आत्मा है भारत की डॉ. मधुसूदन युनो में हिन्दी अटल जी ने, युनो में हिन्दी में, भाषण दे कर इतिहास रचा, उसी अंतराल में मैं म. प्रदेश, अपने ननिहाल गया था. और पुराने राम-मंदिर समीप नीम तले, मण्डली मुझे सुनने इकठ्ठी हुई थी. वही गाँव, जिसे ’मेरा गाँव कहीं खोया है’ कविता में मैंने गाया है. क्या बोलता हूँ […] Read more » बंगला. कन्नड. तमिल सुब्रह्मण्यन स्वामी हिन्दी आत्मा है भारत की
कविता उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग को बदलते देखा है September 13, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment हमने हर रोज जमाने को नया रंग बदलते देखा है उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग को बदलते देखा है वो जो चलते थे,तो शेर के चलने का होता था गुमान उनको भी पैर उठाने के लिये सहारे को तरसते देखा है जिनकी नजरों की चमक देख सहम जाते थे लोग उन्ही नजरों को बरसात […] Read more » कुदरत पत्थर बिजली रंग
साहित्य हिंदी बिना हिंदुस्तान अधूरा September 13, 2018 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment ब्रह्मानंद राजपूत, हिंदी शब्द है हमारी आवाज का हमारे बोलने का जो कि हिन्दुस्तान में बोली जाती है। आज देश में जितनी भी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं, उन सबकी जननी हिंदी है। और हिंदी को जन्म देने वाली भाषा का नाम संस्कृत है। जो कि आज देश में सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से हिंदी माध्यम के स्कूलों […] Read more » अधूरा इंस्टाग्राम गूगल प्लस ट्विटर फेसबुक हिंदी बिना हिन्दुस्तान राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त
साहित्य हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न September 13, 2018 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | 1 Comment on हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न लोकेन्द्र सिंह सर्वसमावेशी भाषा होना हिन्दी का सबसे बड़ा सौन्दर्य है। हिन्दी ने बड़ी सहजता और सरलता से, समय के साथ चलते हुए कई बाहरी भाषाओं के शब्दों को भी अपने आंचल में समेट लिया है। पहले से ही समृद्ध हिन्दी का शब्द भण्डार और अधिक समृद्ध हो गया है। हिन्दी को कभी भी अन्य भाषाओं […] Read more » इंजन इंजेक्शन एम्बुलेंस कन्नड़ कम्पनी कोंकणी गुजराती डीजल नर्स बांग्ला मणिपुरी मलयालम स्टेशन असमिया कश्मीरी कार चैनल टेलीविजन ट्रेन डॉक्टर तमिल नेपाली पेट्रोल बस मराठी संस्कृत हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न
कविता ब्रज की सुधि हौं ना विसरावहुँ ! September 12, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | 1 Comment on ब्रज की सुधि हौं ना विसरावहुँ ! (मधुगीति १८०८१४ अ) ब्रज की सुधि हौं ना विसरावहुँ, जावहुँ आवहुँ कान्हा भावहुँ; वाल सखा संग प्रीति लगावहुँ, साखन सुरति करहुँ विचलावहुँ ! सावन मन भावन जब आवतु, पावन जल जब वो वरसावत; वँशी की धुनि हौं तव सुनवत, हिय हुलसत जिय धीर न पावत ! झोटा लेवत सखि जब गावत, ब्रह्मानन्द उमगि उर आवत; शीरी वायु गगन ते धावत, ध्यानावस्थित मोहि करि जावत ! श्याम- शाम शीतल सुर करवत, गान बहाय श्याम पहुँचावत; तानन तिरिया पियहिं बुलावत, मात पिता ग्रह अमृत घोलत ! पूछत कुशल भाव बहु भीने, चीन्हे अनचीन्हे सुर दीन्हे; ‘मधु’ माखन गोकुल कौ खावहुँ, मधुवन में मुरली सुनि जावहुँ ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » ब्रज ब्रह्मानन्द वँशी श्याम
कविता प्रतिभाओ को मत काटो आरक्षण की तलवार से September 12, 2018 by आर के रस्तोगी | 2 Comments on प्रतिभाओ को मत काटो आरक्षण की तलवार से नम्र निवेदन है मेरा भारत की इस सरकार से प्रतिभाओ को मत काटो,आरक्षण की तलवार से इन रेल पटरियों पर फैला,आज क्यों तमाशा है जाट-आन्दोलन से फैली,चारो ओर निराशा है अगला कदम पंजाबी बैठेंगेr,महाविकट हडताल पर महाराष्ट में प्रबल मराठा, चढ़ जायेगे भाल पर राजपूत भी मचल उठेंगे,भुजबल के हथियारों से प्रतिभाओ को मत काटो […] Read more » आरक्षण जाति गरीबी महाराष्ट माता पिता राजपूत
कविता मेरी आँखों के सामने अब कोई अँधेरा नही, September 10, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on मेरी आँखों के सामने अब कोई अँधेरा नही, लेखक : बबली सिंह मेरी आँखों के सामने अब कोई अँधेरा नही, कि हर धूल मैंने झाड़ दी है अब, मुझे अब अपने दर्द की नुमाइश भी नही करनी, कि हर मर्ज़ की दवा ढूंढ़ ली है अब, हाँ मुझे देखते है लोग भरी बाज़ारों में, सड़कों पे,गाड़ियों में, देखते नही घूरते है, हाँ! तो […] Read more » अँधेरा नही अस्तित्व दुत्कारा मारा मेरी आँखों मैला-कुचैला कर डाला