व्यंग्य लालबत्ती का फ्यूज हो जाना April 24, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment लालबत्ती हटाकर सरकार न केवल उस महान वीआईपी परंपरा ,जिसे कई नेताओ और अधिकारियों ने अपनी कार और अहंकार से सजाकर इस मुकाम तक पहुँचाया है, को लांछित करने का प्रयास कर रही है बल्कि आम आदमी की छवि को धूमिल करने का प्रयास भी कर रही है। क्योंकि जब तक समाज में वीआईपी रहेंगे तब तक आम आदमी उनको देखकर अपने को छोटा महसूस करता रहेगा और सरकारे उसके उत्थान हेतु कदम उठाती रहेगी। अगर समाज से वीआईपी सभ्यता ख़त्म होकर सभी आम आदमी हो गए तो सरकारे आम आदमी के कल्याण के लिए कहाँ से प्रेरणा लेगी। असली समाजवाद लाने के लिए देश में विशिष्ट और विशिष्टता का रहना अत्यंत आवश्यक है। विशिष्टता का शिष्टता में बदल जाना लोकतांत्रिक और सामाजिक मूल्यों के लिए खतरा है। Read more » लालबत्ती
व्यंग्य साहित्य सफ़र के हमसफ़र April 23, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment माता-पिता और गुरुओ के बाद मुझे बस कंडक्टर ही सबसे प्रेरणास्पद व्यक्तित्व लगता है क्योंकि वो भी तमाम कठिनाईयो के बावजूद आपको हमेशा "आगे बढ़ने" की प्रेरणा देता है। मुझे हमेशा से ही कंडक्टर नाम का व्यक्तित्व असामान्य और अद्भुत लगता रहा है क्योंकि जब रजनीकांत जैसा "महामानव असल ज़िंदगी में "कंडक्टर" की भूमिका निभा चुका हो तो कंडक्टर एक सामान्य व्यक्ति भला कैसे हो सकता है! मेरी राय में कंडक्टर किसी पार्टी हाई-कमान से कम हैसियत नहीं रखता है क्योंकि पार्टी हाई-कमान के बाद कंडक्टर ही एक ऐसा ऐसा व्यक्ति है जो "टिकट"देने में सबसे ज़्यादा आनाकानी करता है। विज्ञान के लिए टच-स्क्रीन पद्धति भले ही नई हो लेकिन कंडक्टर तो सदियो से "टच-पद्धति" का उपयोग कर खचाखच भरी बस में भी किसी भी कोने सेे किसी भी कोने तक पहुँचते रहे है। कंडक्टर के पास समय और "छुट्टे" की हमेशा किल्लत रहती है। Read more » Featured सफ़र के हमसफ़र
लेख साहित्य सिकंदर लोदी बारादरी पर मरियम उज-जमानी का मकबरा April 23, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment शाहजहां ने अपनी प्रेमिका मुमताज के लिए ताजमहल बनवाया, तो वहीं शाहजहां के पिता जहांगीर ने अपनी मां की याद में एक भव्य स्मारक बनवाया। नेशनल हाईवे दो पर अकबर टॉम्ब से महज 500 मीटर की दूरी पर यह मथुरा सड़क पर बायीं ओर तथा अकबर का मकबरा, सिकंदरा से पश्चिम की ओर मरियम का मकबरा स्थित है। मरियम उज-जमानी की मृत्यु 1622 में हुई और उसके बेटे जहांगीर ने उनके नाम पर इस महल का निर्माण करवाया था। यह महल अकबर के मकबरे के करीब ज्योति नगर में तंतपुर रोड पर स्थित है। पहले इस महल का निर्माण पर्दे में रहने वाली शाही औरतों के आवास के रूप में किया गया था। इस महल के प्रांगण के चारों ओर कई सारे कमरे बने हुए हैं। Read more » मरियम उज-जमानी का मकबरा
कला-संस्कृति लेख आगरा का इकलौता राजपूत सती स्मारक जसवंत की छतरी April 23, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी अमर इतिहास:- अमर सिंह राठौर जोधपुर के राजा गजसिंह के बड़े बेटे थे। मतभेद के बाद उन्होंने पिता का घर छोड़ दिया। अमर सिंह उस वक्त वीर योद्धाओं में गिने जाते थे और मुगल शहंशाह शाहजहां के दरबार में खास अहमियत रखते थे। सन् 1644 में अन्य दरबारियों ने उन पर जुर्माना […] Read more » सती स्मारक जसवंत की छतरी
कविता साहित्य धरती बेहद उदास है.. April 22, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment २२ अप्रैल – पृथ्वी दिवस पर विशेष कहते हैं, इन दिनों धरती बेहद उदास है इसके रंजो-गम के कारण कुछ खास हैं। कहते हैं, धरती को बुखार है; फेफङें बीमार हैं। कहीं काली, कहीं लाल, पीली, तो कहीं भूरी पङ गईं हैं नीली धमनियां। कहते हैं, इन दिनों…. कहीं चटके… कहीं गादों से भरे हैं […] Read more » धरती बेहद उदास है पृथ्वी दिवस
कविता साहित्य उठे कहाँ मन अब तक ! April 22, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment शब्द परश रूप गंध, रस हैं तन्मात्रा; छाता जब श्याम भाव, होता मधु-छत्ता ! राधा भव-बाधा हर, मिल जाती भूमा; अणिमा महिमा गरिमा, भा जाती लघिमा ! तनिमा तरती जड़ता, सुरभित कर उर कलिका; झंकृत तन्त्रित झलका, सुर आता रस छलका ! Read more » उठे कहाँ मन अब त
लेख ज़हरीली होती यमुना आचमन योग्य नहीं April 21, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी यमुना की त्रासद व्यथा:- कालिंदी का कल-कल निनाद शांत होता जा रहा है। उसकी धारा सिकुड़ती जा रही है । उसका पवित्र जल आचमन योग्य नहीं रहा है । जिससे यमुना प्रेमियों का मन आहत है। यमुना से कृष्ण का अटूट नाता रहा है और इसकी पवित्रता को बरकरार रखने के लिए […] Read more » Featured ज़हरीली होती यमुना यमुना यमुना आचमन योग्य नहीं
लेख साहित्य सिकन्दर लोदी ने बसाया था सिकन्दरा April 21, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment अकबर टॉम्ब में रहने वाले ब्लैक बक तकरीबन सवा सौ साल से भी अधिक समय से रह रहे हैं। अकबर टॉम्ब के अंदर का एरिया ब्लैक बक के लिए लम्बे समय से नेचुरल हैबिटेट बना हुआ है। ब्लैक बक के साथ ही साथ बीते समय में यह मॉन्युमेंट लंगूरों की उपस्थिति के लिए भी खासा फेमस रहा है। सिकन्दरा में अकबर के मकबरे के परिसर में घूमने आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण के केन्द्र दुर्लभ ब्लैक बक (हिरन) के संरक्षण की एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की जा रही है। Read more » अकबर का मकबरा सिकन्दर लोदी सिकन्दरा
व्यंग्य साहित्य #लाल_बत्ती_भाई_को_मेरा_ख़त April 21, 2017 by अश्वनी कुमार, पटना | Leave a Comment #लाल_बत्ती भाई, इतने दिनों तक नेताओं, अफसरों और अमीरों के सर पर चढ़े रहने के बावजूद भी तुम्हें देश याद नहीं करता था| जो देश की सवारी करता था तुम उसकी सवारी करते थे, इसलिए हम तुम्हें याद कर रहे हैं, देश याद कर रहा है| क्योंकि तुम 1 मई से किसी कबाड़ख़ाने में पड़े […] Read more » #लाल_बत्ती
कविता नन्हीं जी April 21, 2017 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment आज हमारी नन्हीं जी ने, रोटी सुन्दर गोल बनाई। कई दिनों से सीख रही थी, रोटी गोल बनेगी कैसे। बन जाता आकार चीन सा, कभी बना रशिया के जैसे। बहुत दिनों के बाद अधूरी, साध आज पूरी हो पाई। हँसा गैस का चूल्हा,काला, गूँगा ,गोल तवा मुस्काया। पटा और बेलन ने उससे, हलो कहा और […] Read more » नन्हीं जी
व्यंग्य साहित्य नींद क्यों रात भर नहीं आती April 18, 2017 / April 18, 2017 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment ड़ोस में नई नई उसारी गई मस्जिदों से लाउड स्पीकरों से 'आज़ान ' अल्लाहो अकबर के कर्कश आगाज़ से जगा देती है ..... पी जी आई के सबसे बड़े ख्याति प्राप्त न्यूरो डाक्टर हैरान हैं ..... कि यह शख्स सोता क्यों नहीं ..... इस बार तो डाक्टर साहेब ने दुखी हो कर मेरा केस 'पागलों 'के एक्सपर्ट को रैफर कर दिया है .... मैं सोचता हूँ 'वह ' भी क्या करेगा ..... फिर से ग़ालिब की याद ! ...... मौत का एक दिन मय्यन है ...नींद क्यों रात भर नहीं आती। Read more » Featured
कविता साहित्य पूरा हिमालय मेरा घर April 17, 2017 / April 17, 2017 by आशुतोष माधव | 1 Comment on पूरा हिमालय मेरा घर बाहें फैलाए मिलता है नगाधिराज अपने पूरे मन से अब हिमालय आपका है शतद्रु की दूधधारा और लाल दहकते बुरांश सब, आपके हैं Read more » मेरा घर हिमालय