दोहे दोहे December 26, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment नींद नहीं मेरी सखी,मुश्किल से है आय, चौक कर खुल जाय कभी,फिर नख़रा दिखलाय। सपनों का घर नींद है , निंदिया का घर नैन नींद नैन आवे नहीं , ना सपनों को चैन। कच्चा घर है नींद का , टूट कभी भी जाय बार- बार टूटे कभी , बन न निशा भर पाय। शाम रात […] Read more » दोहे
कहानी साहित्य डायल कुमार फॉर किलिंग December 26, 2016 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment “कुमार तुम्हारे कारण मेरी ज़िन्दगी खराब हुई और मैंने तुम्हें इस बात की सजा दी. एक महीने पहले उन तीनों ने मुझे जहर देकर मार डाला था और किरण ने ये इसलिए किया था ताकि वो मेरी दौलत के साथ तुमसे मिलकर जीवन जी सके. लेकिन जैसे कि कहते है कि बुरा करो तो वो वापस जरूर आता है. मेरी आत्मा भटकती रही और तुम्हारी राह देखती रही. किरण ने तुम्हें बुलाया और मैंने तुम्हारे बनाए हुए प्लान के अनुसार ही उन्हें डरा कर आत्महत्या करने पर मजबूर किया. वो हत्या भी थी और आत्महत्या भी और तुम्हें आज यहाँ तक पहुंचा दिया ! चलो जल्दी जाओ ! मैं तुम सबसे नफरत करता हूँ. तुम सब अब नरक में मिलना !” Read more » Featured डायल कुमार फॉर किलिंग
कविता शख्सियत साहित्य शमशेर की कविता December 24, 2016 / December 24, 2016 by पिन्टू कुमार मीणा | Leave a Comment पिन्टू कुमार मीणा शमशेर बहादुर सिंह दूसरे सप्तक के कवि है । इनके 1956 और 1961 में दो काव्य संग्रह प्रकाशित हुए- ‘कुछ कविताएँ’ और ‘कुछ और कविताएँ’ । शमशेर आधुनिक दौर के सबसे जटिल कवि माने जाते हैं । इसका कारण कविता को समझने की पाठक / आलोचक की वह पारंपरिक धारणा रही है […] Read more » Featured Shamsher Bahadur Singh शमशेर बहादुर सिंह
लेख साहित्य भारतीय समाज की विविधता का इतिहाय बयां करता फिल्मी दुनियां का सफर…. December 24, 2016 by अनिल अनूप | Leave a Comment -अनिल अनूप हिंदी सिनेमा का बीते सालों का इतिहास हम से बहुत कुछ कहता है । यह सिर्फ हिंदी सिनेमा का इतिहास नहीं अपितु भारतीय समाज के आर्थिक,सांस्कृतिक,धार्मिक एवं राजनीतिक नीतियों,मूल्यों और स्ंवेदनाओं का ऐसा इंद्र्धनुष है जिसमें भारतीय समाज की विविधता उसकी सामाजिक चेतना के साथ सामने आती है । भारतीय समाज का हर […] Read more » फिल्मी दुनियां का सफर.... भारतीय समाज की विविधता रतीय समाज की विविधता का इतिहाय बयां करता
कहानी साहित्य अकबर बीरबल के मुलाकात की दो प्रमुख प्रारम्भिक कहानियां December 21, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा.राधेश्याम द्विवेदी पहली कहानी अकबर को शिकार का बहुत शौक था. वह किसी भी तरह शिकार के लिए समय निकल ही लेते थे. बाद में वे अपने समय के बहुत ही अच्छे घुड़सवार और शिकरी भी कहलाये. एक बार राजा अकबर शिकार के लिए निकले, घोडे पर सरपट दौड़ते हुए उन्हें पता ही नहीं चला […] Read more » अकबर बीरबल
लेख साहित्य अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल और उनके तीन शहीद साथियों को सादर नमन और श्रद्धांजलि’ December 20, 2016 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल और उनके तीन शहीद साथियों को सादर नमन और श्रद्धांजलि’ -मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। आज ऋषि दयानन्द के शिष्य और आर्यसमाज के अनुयायी अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जी और उनके तीन साथी रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां तथा राजेन्द्र सिंह लाहिड़ी का शहीदी दिवस अर्थात् पुण्य तिथि है। इन चार देशभक्त सपूतों को सन् 1927 में गोरखपुर की जेल में आज ही के दिन […] Read more » Featured अशफाक उल्ला खां राजेन्द्र सिंह लाहिड़ी रामप्रसाद बिस्मिल रोशन सिंह
लेख साहित्य क्या आप अकबर के नवरत्नों को जानते हैं :? December 20, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment क्या आप अकबर के नवरत्नों को जानते हैं, आइये, मैं बताता हूं डा.राधेश्याम द्विवेदी सिर्फ किस्सागोई नहीं:-इतिहास किसी ग्रंथ में उल्लखित विवरणों की पुष्टि मात्र नहीं होता है, अपितु तत्कालिक परम्परा, मान्यता, कला, संस्कृति तथा समाज मे फैली धारणाओं का संवाहक भी होता है। आगरा मुगलकाल की सर्वाधिक समय तक राजधानी रही है। बहुत ही […] Read more » Navratnas of Akbar अकबर के नवरत्न
लेख साहित्य भारत के नये पर्व December 13, 2016 / December 13, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on भारत के नये पर्व चुनाव की आहट आते ही ये भी शुरू हो जाते हैं। राजनीतिक दल और उनके नेता घोषणाएं करने लगते हैं कि सत्ता में आकर हम ये करेंगे और वो करेंगे। कुछ लोग तो आकाश से तारे तोड़ लाने की बात करने लगते हैं, भले ही उनकी झोली में घर के वोट भी न हों। इसे ‘घोषणा पर्व’ कहते हैं। इससे मिलता हुआ ‘उद्घाटन पर्व’ है। सत्ताधारी नेता आधी हो या अधूरी, पर हर सप्ताह किसी न किसी योजना का उद्घाटन कर देते हैं। Read more » Featured भारत के नये पर्व
आर्थिकी आलोचना जिन पर देश बदलने की जिम्मेदारी है वो नहीं बदल रहे तो देश कैसे बदलेगा December 12, 2016 by डॉ नीलम महेन्द्रा | 1 Comment on जिन पर देश बदलने की जिम्मेदारी है वो नहीं बदल रहे तो देश कैसे बदलेगा कभी हमारी सरकार ने सोचा है कि भारत के जिस आम आदमी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में देश के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया था औरतों ने अपने गहने कपड़े ही नहीं अपने बच्चों तक को न्यौछावर कर दिया था , वो आम आदमी जो मन्दिरों में दान करने में सबसे आगे होता […] Read more » currency crisis created by banks Featured money laundering by banks
लेख साहित्य कीमत और मूल्य December 9, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment सामान्य रूप से ये दोनों एक से लगते हैं; पर थोड़ा गहरे में जाएं, तो ध्यान आता है कि जब कोई व्यक्ति, गांव, समाज या देश लम्बे समय तक कोई कीमत चुकाता है, तो दुनिया में कुछ मूल्य स्थापित होते हैं। फिर उन्हीं का अनुसरण कर लोग आगे बढ़ते हैं। ऐसे उदाहरण हर युग में […] Read more » कीमत कीमत और मूल्य मूल्य
व्यंग्य चल चमेली लैन में.. December 8, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment कई दिन से शर्मा जी के दर्शन नहीं हो रहे थे। अतः कल मैं उनके घर चला गया; पर वे वहां भी नहीं थे। भाभी जी से पूछा, तो गुस्से में बोली, ‘‘सुबह से ‘मोदी लैन’ में लगे हैं।’’ – ये मोदी लैन क्या चीज है भाभी जी ? – वर्मा जी, आप किस […] Read more » चल चमेली लैन में..
लेख शख्सियत फिदेल कास्त्रो : एक किवदंती December 5, 2016 by उपासना बेहार | Leave a Comment फिदेल कास्त्रो का नाम सामने आते ही लोह पुरुष की छबी उभर आती है. इन्हें क्यूबा में कम्युनिस्ट क्रांति का जनक माना जाता है. क्यूबा के इस महान क्रांतिकारी और पूर्व राष्ट्रपति का 90 साल की आयु में 26 नवम्बर 2016 को हवाना में निधन हो गया. फिदेल कास्त्रो ने 49 साल तक क्यूबा में शासन किया जिसमें वे फरवरी 1959 से दिसंबर 1976 तक क्यूबा के प्रधानमंत्री और फरवरी 2008 तक राष्ट्रपति रहे. 2008 में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया. Read more » Featured Fidel Castro फिदेल कास्त्रो