कविता साहित्य कुलभूषण जाधव की फाँसी पर सवाल करती कविता April 17, 2017 / April 17, 2017 by हेमंत कुमावत 'हेमू ' | 4 Comments on कुलभूषण जाधव की फाँसी पर सवाल करती कविता ना मानेगा धूर्त पड़ौसी , शांति की वार्ताओं से अब हल नहीं निकलेगा , सिर्फ कड़ी निंदाओ से कुलभूषण की फाँसी पर ,क्यों मौन साधना साधे हो अफजल के चाचाओं ,क्या सिर्फ दुश्मन के प्यादे हो सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर , रतजागा सा कर डाला एक आतंकी की फांसी पर , रोये थे जो […] Read more » Featured कुलभूषण जाधव कुलभूषण जाधव को मौत की सजा
लेख शख्सियत रंग नारायण पाल जूदेव वीरेश ‘रंगपाल’ April 16, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी कवियित्री मां से मिली प्रेरणा :- रंगपाल नाम से विख्यात महाकवि रंग नारायण पाल जूदेश वीरेश पाल का जन्म नगर पंचायत हरिहरपुर में फागुन कृष्ण 10 संवत 1921 विक्रमी को हुआ था। उनके पिता का नाम विश्वेश्वर वत्स पाल तथा माता का नाम श्रीमती सुशीला देवी था । उनके पिता जी राजा […] Read more » रंग नारायण पाल जूदेव वीरेश ‘रंगपाल’
लेख शख्सियत साहित्य मानवीय चेतना और राष्ट्रीयता के कवि : पंडित बलराम प्रसाद मिश्र ‘द्विजेश’ April 16, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधे श्याम द्विवेदी ‘नवीन’ पारिवारिक परिचय:-बस्ती जिले का मिश्रौलिया गांव में हर दयाल मिश्र का एक अच्छा खाता पीता घराना था। वह एक जमीदार थे। वे अपनी पालकी के साथ बस्ती राजा के यहाँ भी आया जाया करते थे। उन पर राजा साहब की कृपा दृष्टि बनी रहती थी। उनके पुत्र का नाम उदित […] Read more » Featured पंडित बलराम प्रसाद मिश्र ‘द्विजेश’
कविता साहित्य कोई मिल पल में चल देता ! April 16, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment कोई मिल पल में चल देता, कोई कुछ वर्ष संग देता; जाना सबको ही है होता, मिलन संस्कार वश होता ! विदा क्षण क्षण दिये चलना, अलविदा कभी कह देना; यही कर्त्तव्य रह जाता, मुस्करा भाव भव देना ! चले सब जाते अपनी धुन, झाँकते चलते दे चितवन; नज़र में रखे निज मंज़िल, कभी उर्मिल […] Read more » कोई मिल पल में चल देता !
व्यंग्य दिमागीन सर्विस सेंटर April 15, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment बचपन में एक कहावत सुनी थी, ‘सिर बड़े सरदारों के, पैर बड़े कहारों के।’ बुजुर्ग बताते थे कि सरदार यानि सिख पगड़ी बांधते हैं, इसलिए उनका सिर बड़ा दिखायी देता है। दूसरी ओर कहार दिन भर सामान उठाकर इधर-उधर भागता रहता है। पैरों पर अधिक बोझ पड़ने के कारण उसके पैर बड़े हो जाते हैं। […] Read more » दिमागीन सर्विस सेंटर
दोहे बाबा तेरी ज्योति से ज्योति April 15, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी ‘नवीन’ आचार्य पं. मोहन प्यारे द्विवेदी ‘मोहन’ (01.04.1909-15.04.1989) स्मृति पखवारा 29वी पुण्य तिथि पर सादर श्रद्धांजलि बाबा तेरी ज्योति से ज्योति, हर पल जलती जाती है । दुनिया की झंझावातों से वह, कभी नहीं बुझ पाती है ।। जब एक भी दीया जलता है, सारी दुनिया प्रकाशित होती है। जब एक बुद्धत्व […] Read more » बाबा तेरी ज्योति से ज्योति
लेख साहित्य लछिराम भट्ट : बस्ती के छन्द परम्परा के जनक April 15, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment लछिराम की प्रसादगुणयुक्त ब्रजभाषा में रचनाएँ है। कुछ के नाम ये हैं - मुनीश्वर कल्पतरु, महेंद्र प्रतापरस भूषण, रघुबीर विलास, लक्ष्मीश्वर रत्नाकर, प्रतापरत्नाकर, रामचंद्रभूषण, हनुमंतशतक, सरयूलहरी, कमलानंद कल्पतरु, मानसिंह जंगाष्टक, , सियाराम चरण चंद्रिका, करुणाभरण नाटक, प्रेम रत्नाकर, राम रत्नाकर, लक्ष्मीश्वर रत्नाकर, रावणेश्वर कल्पतरु ,महेश्वर विलास ,नायिका भेद, देवकाली शतक, राम कल्पतरु, गंगा लहरी और नखशिख परम्परा आदि उनकी उत्कृष्ट रचनायें है। Read more » लछिराम भट्ट
लेख साहित्य मुगल वंश से पहले ही हो गया था कश्मीर का पीड़ादायक धर्मांतरण April 14, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment हैदरशाह का विश्वास पात्र भ्रत्यपूर्ण नामक एक नापित था। वह लोगों का अंग विच्छेद करवा देता था, यह उसके लिए एक साधारण बात हो गयी थी। उसने ठक्कुर आदि जैनुल आबेदीन के विश्वासपात्रों को आरों से चिरवा दिया था। राह चलते लोगों को अनायास पकडक़र पांच-पांच, छह-छह को एक साथ सूली पर चढ़वा दिया। वैदूर्य और भिषग को दूषक तथा परपथगामी जानकर हाथ, नाक और ओष्ठ पल्लव कटवा दिये। शिख, नोनक आदि संभ्रांत पांच छह व्यक्तियों की जीभ, नाक व हाथ कटवा दिये। लोग इतने आतंकित हो गये थे कि भय से स्वयं वितस्ता व झेलम में डूबकर भीम व जज्ज के समान प्राण विसर्जन कर देते थे। (भीम एवं जज्ज इन दोनों लब्धप्रतिष्ठित पंडितों ने नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या की थी) राजा स्वयं भी इन क्रूर हत्याओं के लिए प्रेरणा देता था। Read more » conversion of hindus to muslims in Kashmir Featured कश्मीर का धर्मांतरण मुगल वंश
कविता बच्चों का पन्ना साहित्य सुबह सुबह से ही रोजाना April 13, 2017 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment सुबह सुबह से ही रोजाना Read more » Featured सुबह सुबह से ही रोजाना
व्यंग्य लिबरल्स की दुखती रग पर देशभक्ति के पग April 12, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अक्षय कुमार को अपनी फ़िल्म “रुस्तम” के लिए नेशनल अवार्ड क्या मिला लिबरल खेमे में रुदाली शुरू हो गई। वैसे लिबरल खेमे के लिए दुःख की बात ये है कि अक्षय कुमार को नेशनल अवार्ड देने का निर्णय अप्रैल में लिया गया, अगर यही निर्णय मार्च में ले लिया जाता तो सारे लिबरल्स “मार्च-एंडिंग” में […] Read more » देशभक्ति
व्यंग्य साहित्य सुबह लाठी, शाम चपाती …!! April 11, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment बिल्कुल बचपन में देखी गई उन फिल्मों की तरह कि जब मार - कुटाई की औपचारिकता पूरी हो जाए और हीरो पक्ष के लोग एक - दूसरे के गले मिल रहे होते तभी सायरन बजाती पुलिस की जीप वहां पहुंचती। अक्सर ऐसा होताा भी था। कभी किसी के पीछे हाथ धो कर पड़ जाते और जब बेचारा शिकार की तरह आरोपी बुरी तरह फंस जाता तो खुद ही वकील बन कर उसे बचाने भी पहुंच जाते। Read more »
व्यंग्य जनकल्याणकारी क्रोध से रचनात्मक हवाई चिंतन पर बैन April 10, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment बैन के दौरान, सांसद महोदय को जो मानसिक संताप झेलना पड़ा और कष्टपूर्ण रेल यात्रा करनी पड़ी उसकी ज़िम्मेदारी लोकतंत्र का कौनसा खंभा उठाएगा ? इस बैन की वजह से सांसद जी के रचनात्मक हवाई चिंतन में जो व्यवधान आया इसके लिए संसद के कौन से सदन में शून्यकाल के दौरान निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा? क्या सबसे बड़े लोकतंत्र के जनप्रतिनिधि अब इतने निःसहाय कर दिए जाएंगे की उन्हें मूड फ्रेश करने के लिए की गई मारपीट और हाथापाई के बाद कानूनी कार्यवाही और प्रतिबंध झेलना पड़ेगा? Read more » Featured हवाई चिंतन पर बैन