राजनीति व्यंग्य भारत खुला, मुंह बंद November 30, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment जब से मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की है, देश के अधिकांश राजनेताओं, काले धन पर ऐश कर रहे सरकारी अधिकारियों और कारोबारियों की तरह शर्मा जी भी बहुत बेचैन हैं। वैसे शर्मा जी बहुत सज्जन आदमी हैं। उनका मन भले ही काला हो, पर काले धन से उनका कोई खास लेना-देना नहीं है। फिर […] Read more » bharat band against notebandi Featured भारत खुला भारत बंद मुंह बंद
कला-संस्कृति लेख साहित्य द्रोपदी के पांच नही, एक मात्र पति युधिष्ठिर November 29, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 1 Comment on द्रोपदी के पांच नही, एक मात्र पति युधिष्ठिर डा. राधेश्याम द्विवेदी महाभारत ग्रंथ की मूल कथा में अनेक परिवर्तन हुए हैं. इन परिवर्तनों से आर्य-संस्कृति का रूप काफी दयनीय स्थिति को प्राप्त हुआ है. द्रौपदी के पांच पति वाली कथा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है. महाभारत के आदि-पर्व में द्रौपदी के पांच पतियों का उल्लेख पाया जाता है. महाभारत की द्रौपदी तथा परवर्ती किसी […] Read more » द्रोपदी
व्यंग्य साहित्य समय की रेत, घटनाओं के हवा महल … November 28, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा बचपन में टेलीविजन के प र्दे पर देखे गए दो रोमांचक दृश्य भूलाए नहीं भूलते। पहला क्रेकिट का एक्शन रिप्ले और दूसरा पौराणिक दृश्यों में तीरों का टकराव। एक्शन रिप्ले का तो ऐसा होता था कि क्रिकेट की मामूली समझ रखने वाला भी उन दृश्यों को देख कर खासा रोमांचित हो जाता […] Read more » घटनाओं के हवा महल समय की रेत
व्यंग्य ऊ लाला! उनका रस्म उठाला November 27, 2016 by अशोक गौतम | Leave a Comment वे जो कल तक हर किसीका सिर बड़े इतमिनान से मंूडा करते थे, मुंडे सिर जब उनको किराए की गाड़ी से सफेद कपड़ों में उतरते देखा तो पैरों तले से जमीन सरक गई। ये क्या हो गया? कब हो गया?? कैसे हो गया?? मुहल्ले में रहते हुए भी मुझे पता नहीं कि…. आखिर मैं रहता […] Read more »
लेख सिनेमा फिल्म समीक्षा –फिल्म “डियर जिंदगी” November 27, 2016 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment बैनर : होप प्रोडक्शन्स, धर्मा प्रोडक्शन्स, रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट निर्माता : गौरी खान, करण जौहर, गौरी शिंदे सितारे : शाहरुख खान, आलिया भट्ट, कुणाल कपूर, अली जफर, अंगद बेदी, ईरा दुबे, यशस्विनि दायमा निर्देशक-लेखक-पटकथा : गौरी शिंदे संगीत : अमित त्रिवेदी गीत: कौसर मुनीर सेंसर सर्टिफिकेट : यूए * 2 घंटे 29 मिनट 53 सेकंड […] Read more » डियर जिंदगी फिल्म समीक्षा --फिल्म "डियर जिंदगी"
राजनीति व्यंग्य आ आ पा के 50 % से अधिक विधायको ने अपने “विधायक-कोष” में से एक भी पैसा ख़र्च नहीं किया November 21, 2016 by अमित शर्मा (CA) | 3 Comments on आ आ पा के 50 3 से अधिक विधायको ने अपने “विधायक-कोष” में से एक भी पैसा ख़र्च नहीं किया सोशल मीडिया पर चल रहे ताज़ा ट्रेंड की माने तो आप विधायको ने इसलिए भी अपने कोष से कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं करवाया क्योंकि मार्केट में सारे नोट्स पर "सोनम गुप्ता बेवफा है "लिखा है जबकि केजरीवाल जी चाहते थे किसी भी परियोजना की शुरुवात "मोदी बेवफा है" लिखे नोट्स से होनी चाहिए। सरकार बनने के बाद से आप विधायको पर अलग अलग अपराधों में इतने आरोप लगे है और इतने विधायक तिहाड़ जेल की हवा खा चुके है की, लगता है विधायक कोष का पैसा अपने विधानसभा क्षेत्र में खर्च करने के बजाय विधायको ने ये पैसे अपना केस लड़ने के लिए और वकील की फीस के लिए बचा रखे है। Read more » Featured
व्यंग्य साहित्य #नोटबंदी पर रामभुलावन ने कहा, हम कितने ढीठ किस्म के हो गए हैं साहब ! November 20, 2016 by मयंक चतुर्वेदी | 1 Comment on #नोटबंदी पर रामभुलावन ने कहा, हम कितने ढीठ किस्म के हो गए हैं साहब ! हम कितने ढीठ किस्म के हो गए हैं, वह ऐसे ही नहीं कह रहा, उसके पीछे ओर भी कई कारण है। रामभुलावन आगे बोला..मसलन लोगों ने लाइन में लगने को ही धंधा बना डाला, सरकार ने बैंक से नोट बदलने की सुविधा एटीएम का उपयोग करने वालों की तुलना में जो लोग इस का उपयोग नहीं करते हैं, उनको ध्यान में रखकर की थी लेकिन हुआ क्या ..... लोग चंद रुपयों के लालच में लाइन में लगकर काले को सफेद करने के फेर में पड़ गए। जिसके बाद मजबूरी में सरकार को 4 हजार 500 की नगद राशि परिवर्तन किए जाने के निर्णय को वापिस लेकर उसे 2 हजार रुपए करना पड़ा। Read more » Featured नोटबंदी
कविता नन्हें बच्चे November 18, 2016 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment नन्हें बच्चे Read more » Featured नन्हें बच्चे
कविता साहित्य अधूरी दास्ताँ November 17, 2016 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment कुछ पुरानी यादें… और तुम्हारा साथ… वही पुराने प्रेम पत्र और अपनी बात… पलभर की गुस्ताख़ी, और अंधेरी रात… टूटें हुए मकान और सुना पड़ा खाट.. ‘अवि‘ के दिल के अरमान और आँसुओं की बरसात… सवेरे की लालिमा और घायल ज़ज्बात… सबकुछ सिर्फ़ तुम पर ही आकर ख़त्म हो जाता है… और तुमसे […] Read more » अधूरी दास्ताँ
कविता डरता है मन मेरा November 17, 2016 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment डरता है मन मेरा कहीं हो न जाए तेरे भी जीवन में अंधेरा नाजों से पली थी मैं अपनी बगिया की कली थी एक दिन उस बगिया को छोड़ चली थी मैं नए सपनों को देख मचली थी मैं जैसे बहारों के मौसम में खिली थी मैं पर अगले ही दिन मुस्कान खो चुकी थी […] Read more » डरता है मन मेरा
व्यंग्य साहित्य पप्पू गिरी November 16, 2016 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment खबरियों के लिए खबर थी और मनचलों के लिए सेल्फी लेने का एक मौका पप्पू महज़ ४००० हज़ार के गाँधी बैंक में बदलने जा पहुंचे ..... गाड़ियों का काफिला और अनगिनत अंग रक्षक साथ में पप्पू के पप्पियों की फौज ,ऊपर से खबरियों का झुण्ड - मधुमखियों की भांति पप्पू पर मंडरा रहा था ..... पप्पू इतरा रहे थे ....मैं इन लोगों के लिए लाइन में लगा हूँ ..... मोदी के सताए हुए हैं ये सब। Read more » पप्पू गिरी
लेख साहित्य खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी : रानी लक्ष्मीबाई November 16, 2016 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (रानी लक्ष्मीबाई के 181वें जन्मदिवस 19 नवंबर 2016 पर विशेष) 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त् रता संग्राम में अहम् भूमिका नि भाने वाली झाँसी की रानी लक्ष् मीबाई का जन्म मोरोपन्त तांबे औ र भागीरथीबाई के घर वाराणसी जि ले के भदैनी में 19 नवम्बर 1935 को हुआ था। रानी लक्ष्मीबा ई के बचपन का नाम मणिकर्णिका था । परन्तु प्यार से लोग उसे मनु कहकर पुकारते थे। रानी लक्ष्मी बाई जब 4 साल की थी तब उनकी माँ भागीरथीबाई का देहांत हो गया। इसलिए मणिकर्णिका का बचपन अपने पिता मोरोपन्त तांबे की देखरेख में बीता। मनु ने बचपन में शा स्त्रों की शिक्षा ग्रहण की। मणि कर्णिका बचपन में ही तलबार, धनुष सहित अन्य शस्त्र चलाने में नि पुण हो गयीं थी। और छोटी सी उम्र में ही घुड़सवारी करने लगी थीं । मोरोपन्त मराठी मूल के थे और मराठा बाजीराव द्वितीय की सेवा में रहते थे। माँ की मृत्यु के बाद घर में मणिकर्णिका की देखभाल के लिये कोई नहीं था। इसलिए पिता मोरोपन्त मणिकर्णिका को अपने साथ बाजीराव के दरबार में ले जा ने लगे। दरबार में सुन्दर मनु की चंचलता ने सबका मन मोह लिया। मणिकर्णिका बाजीराव द्वितीय की भी प्यारी हो गयीं। बाजीराव मनु को अपनी पुत्री की तरह मानते थे। और मनु को प्यार से छबीली कहकर बुलाते थे। सन् 1842 में मणिकर्णिका का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव निम्बालकर के साथ हुआ और मनु छोटी सी उम्र में झाँसी की रानी बन गयीं। विवाह के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई रखा गया। सन् 1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया पर चार महीने की आयु में गम्भीर रूप से बीमार होने की वजह से उसकी मृत्यु हो गयी। सन् 1853 में राजा गंगाधर राव का स्वास्थ्य बहुत अधिक बिगड़ जाने पर उन्हें दरबारियों ने दत्तक पुत्र लेने की सलाह दी। दरबारि यों की सलाह मानते हुए रानी ने पुत्र गोद लिया दत्तक पुत्र का नाम दामोदर राव रखा गया। पुत्र गोद लेने के कुछ दिनों बाद बीमारी के कारण 21 नवम्बर 1853 को रा जा गंगाधर राव का देहांत हो गया । अब रानी लक्ष्मीबाई अकेली पड़ गयीं और दरवारियों की सलाह पर झाँ सी की गद्दी पर बैठकर झाँसी का कामकाज देखने लगी। उस समय भारत के बड़े क्षेत्र पर अंग्रेजों का शासन था। और ईस्ट इंडिया कंपनी का राज चलता था। अंग्रेज झाँसी को भी ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन करना चाहते थे। राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद अंग्रेजों को यह एक उपयुक्त अवसर लगा। उन्हें लगा रानी लक्मीबाई स्त्री है और उनका का प्रतिरोध नहीं करेगी। राजा गंगाधर राव का कोई पुत्र न होने का कह कर अंग्रेजों ने रानी के दत्तक- पुत्र दामोदर राव को राज्य का उत्तराधिकारी मानने से इंकार कर […] Read more » रानी लक्ष्मीबाई