लेख साहित्य अत्याचारों की करूण गाथा के उस काल में भी आशा जीवित रही January 11, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य सिकंदर के शासन काल में हिंदुओं की स्थिति कश्मीर में सिकंदर का शासन और हिंदुओं की स्थिति इस प्रकार थी कि सिकंदर का शासन मानो खौलते हुए तेल का कड़ाह था और हिंदू उसमें तला जाने वाला पकौड़ा। ऐसी अवस्था में बड़ी क्रूरता से हिंदुओं से जजिया वसूल किया जाता था। […] Read more » सिकंदर के शासन काल में हिंदुओं की स्थिति Featured अत्याचारों का करूण क्रंदन अत्याचारों की करूण गाथा अलबेरूनी केवल 11 हिंदू परिवार ही बचे थे कश्मीर ज्ञान छिपाने की भावना हिंदुओं में क्यों वर्तमान न्यायपालिका के प्रति अश्रद्घा क्यों? हिंदुओं के धर्मप्रेमी स्वरूप का गौरवमयी वर्णन
लेख साहित्य जब कश्मीर के राजा जशरथ ने बढ़ाया भारत का ‘यश’ रथ January 10, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य संसार एक सागर है संसार एक सागर है, जिसमें अनंत लहरें उठती रहती हैं। ये लहरें कितने ही लोगों के लिए काल बन जाती हैं, तो कुछ ऐसे शूरवीर भी होते हैं जो इन लहरों से ही खेलते हैं और खेलते-खेलते लहरों को अपनी स्वर लहरियों पर नचाने भी लगते हैं। ऐसा संयोग इतिहास […] Read more » Featured कश्मीर कश्मीर के राजा जशरथ जशरथ राजा जशरथ लोदी वंश
कविता आज नया कुछ लिख ही दूँ January 9, 2017 by बीनू भटनागर | 3 Comments on आज नया कुछ लिख ही दूँ कुछ नया करने की चाह में, अपनी ही कविताओं के, अंग्रेज़ी में अनुवाद कर डाले, या उन्हे ही उलट पलट कर, दोहे कुछ बना डाले। जो कल नया था आज पुराना सा लगने लगा है अब….. तो सोचा….. आज कुछ नया ही लिख दूँ। रोज़ होते रहे बलात्कार, उनपर टीका टिप्पणी और विश्लेषण तो अब […] Read more » आज नया कुछ लिख ही दूँ
कविता साहित्य दिल्ली पुस्तक मेला January 9, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment प्रगति मैदान लग गया,पुस्तक का भण्डार अपना अपना शोर है, अपनी अपनी रार! बड़े-बड़े लोगों के ,अपने अपने स्टाल, वे ही सब ले जायेंगे,पुरुस्कार या शाल! बड़े बड़े अब रचयिता, आये दिल्ली द्वार, किसकी किताब ने किया,सर्वाधिक व्यापार? कवि व्यापारी से लगें,जब बेचते किताब, आज एक से लग रहे, आफ़ताब महताब! मेला किताब का लगा,होगा […] Read more » दिल्ली पुस्तक मेला
कविता माँ तुम्हें पुकारती, माँ तुम्हें पुकारती ।। January 4, 2017 by शकुन्तला बहादुर | 2 Comments on माँ तुम्हें पुकारती, माँ तुम्हें पुकारती ।। एक आह्वान एवं भावांजलि – वीर सेनानियों को । देश के सपूतों ! मातृभू के रक्षकों ! शूरवीर सैनिकों ! क्रान्तिवीर बन्धुओं ! साहसी सेनानियों ! माँ तुम्हें पुकारती , माँ तुम्हें पुकारती ।। * आज सब आतंकियों को, आक्रमणकारियों को, और देशद्रोहियों को , भेज दो यमलोक को । माँ तुम्हें पुकारती, माँ तुम्हें […] Read more » माँ तुम्हें पुकारती
कविता साहित्य याद तुम्हारी January 3, 2017 / January 3, 2017 by मधु शर्मा कटिहा | Leave a Comment मधु शर्मा कटिहा खुश बहुत थी याद तेरी अब मुझे आती नहीं, डूबकर इक अक्स में अब मैं खो जाती नहीं। उफ़! भूलते ही याद आ गया फिर से तू क्यों? कोई रिश्ता ही नहीं तो दर्द भी देते हो क्यों? चल रही हवा तो पत्ते चुप से हैं मायूस क्यों? रोशनी सूरज की […] Read more » याद तुम्हारी
गजल शख्सियत साहित्य मिर्जा ग़ालिब का जीवन व आगरा की हवेली January 3, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 1 Comment on मिर्जा ग़ालिब का जीवन व आगरा की हवेली डा. राधेश्याम द्विवेदी जन्म व परिवार :- मिर्जा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर सन् 1796 को आगरा के काला महल में हुई थी । गालिब ने अपनी जिंदगी का लंबा वक्त आगरा शहर के बाजार सीताराम की गली कासिम जान में बनी हवेली में गुजारा है। इस हवेली को संग्रहालय का रुप दे दिया गया […] Read more » मिर्जा गालिब
कविता यादेँ व उम्मीद :-सौरभ चतुर्वेदी December 31, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment मयस्सर डोर से फिर एक मोती झड़ रहा है , तारीखों के जीने से दिसम्बर उतर रहा है | कुछ चेहरे घटे , चंद यादें जुड़ीं गए वक़्त में, उम्र का पंछी नित दूर और दूर उड़ रहा है |… गुनगुनी धूप और ठिठुरती रातें जाड़ो की, गुजरे लम्हों पर झीना-झीना पर्दा गिर रहा है। […] Read more » यादेँ व उम्मीद
कविता साहित्य ऐसा ही कुछ करना होगा December 31, 2016 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment लम्बे अर्से बीत चले हैं, इनसे कुछ सबक लेना होगा, उम्मीदों की सतत् कड़ी में, इस बार नया कुछ बुनना होगा, अपने समाज के अन्तिम जन को, अब तो बेहतर करना होगा, शिक्षित और जागरूक बनाकर, इनके हक में लड़ना होगा, कुछ न कुछ पाने का सबका, अपना अपना सपना होगा, सूख चुके आँसुओं को […] Read more » ऐसा ही कुछ करना होगा
लेख साहित्य तैमूर लंग को किसने हराया? December 29, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ विवेक आर्य हिन्दू समाज ने एकजुट होकर अक्रान्तायों का न केवल सामना किया अपितु अपने प्राणों की बाजी लगाकर उन्हें यमलोक भेज दिया। तैमूर लंग के नाम से सभी भारतीय परिचित है। तैमूर के अत्याचारों से हमारे देश की भूमि रक्तरंजित हो गई। उसके अत्याचारों की कोई सीमा नहीं थी। तैमूर लंग ने मार्च […] Read more » Featured Taimur Lang who defeated Taimur Lang तैमूर लंग तैमूर लंग पूर्णत: धर्मांध था तैमूर लंग
कला-संस्कृति लेख साहित्य चौसठ योगिनी मंदिर, जिसकी अनुकृति से भारतीय संसद भवन बना है December 29, 2016 / December 29, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी योगाभ्यास करने वाली स्त्री को योगिनी या योगिन कहा जाता है। पुरुषों के लिए इसका समानांतर योगी है। अष्ट या चौंसठ योगिनियां प्रायः आदिशक्ति मां काली का अवतार या अंश होती है। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए माता ने उक्त चौंसठ चौंसठ अवतार लिए थे । यह भी माना […] Read more » चौसठ योगिनी मंदिर
कविता साहित्य इस साल न हो पुर-नम आँखें December 28, 2016 by डॉ.कुमार विश्वास | Leave a Comment “इस साल न हो पुर-नम आँखें, इस साल न वो खामोशी हो इस साल न दिल को दहलाने वाली बेबस-बेहोशी हो इस साल मुहब्बत की दुनिया में, दिल-दिमाग की आँखें हों इस साल हमारे हाथों में आकाश चूमती पाँखें हों ये साल अगर इतनी मुहलत दिलवा जाए तो अच्छा है ये साल अगर हमसे हम […] Read more » इस साल न हो पुर-नम आँखें