व्यंग्य मुझको लाओ, देश बचाओ ! February 3, 2014 / February 4, 2014 by अशोक गौतम | Leave a Comment -अशोक गौतम- आजकल देश में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के लिए मारो मारी चली है। जिसे घर तक में कोई नहीं पूछता वह भी प्रधानमंत्री के पद के लिए दावेदारी सीना ठोंक कर ठोंक रहा है, भले बंदे के पास सीना हो या न! मित्रों! दावेदारी के इस दौर में मैं भी देश की सेवा […] Read more » satire on politics देश बचाओ ! मुझको लाओ
व्यंग्य दयालु सरकार : नथ्थू खुश February 2, 2014 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment -जगमोहन ठाकन- जब से नमो ने बचपन में चाय की दुकान पर काम करने की बात स्वीकारी है तभी से नथ्थू की दुकान पर छुटभैये राजनितिक आशान्वितों की गर्मागर्म बैठकें बढ़ गयी हैं. हाल में सरकार द्वारा गैस सिलेंडर के दाम साढ़े बारह सौ रुपये तक बढ़ाकर पुनः एक सौ सात रुपए की कमी […] Read more » satire on government दयालु सरकार : नथ्थू खुश
व्यंग्य दल बदलन के कारने नेता धरा शरीर February 1, 2014 / February 1, 2014 by एम. अफसर खां सागर | 1 Comment on दल बदलन के कारने नेता धरा शरीर -एम. अफसर खां सागर- सियासत क्या बला है और इसके दाव पेंच क्या हैं, इसका सतही इल्म न मुझे आज तक हुआ और न मैने कभी जानने की कोशिश की। अगर यूं समझें कि सियासी के हल्के में फिसड्डी हूं तो गलत न होगा। मगर सियासत ऐसी बला है कि आप इससे लाख पीछा छुड़ाएं मगर छूटने […] Read more » satire on politics दल बदलन के कारने नेता धरा शरीर
कविता चोर के घर चोरी January 31, 2014 / January 31, 2014 by बीनू भटनागर | Leave a Comment चोर की चोरी, चोरी की कार, कैसा लगा अनुप्रास अलंकार? होंडा सिटी में धन था अपार, सामने से आगई वैगनार। लूट के धन सब हुए फरार, कुछ दूर जाकर छोड़ी कार।… दिल्ली पोलिस बड़ी बेकार, शिंदे से जाकर करो तकरार। सट्टे का धन है या कालाबज़ार, कहां से आया धन का अंबार? संसद मे जाओ […] Read more » poem चोर के घर चोरी
व्यंग्य … जब नारद जी सम्मानित हुए January 31, 2014 / January 31, 2014 by सुधीर मौर्य | 1 Comment on … जब नारद जी सम्मानित हुए – सुधीर मौर्य- युग पर युग बदल गए, पर अपने नारद भाई जस के तस। रत्ती पर भी बदलाव नहीं। हाथ में तानपूरा, होठों पे नारायण – नारायण और वही खबरनवीसी का काम।जाने कहां से टहलते-घूमते आपके चरन भारत मैया की धरती पर आटिके। तनिक देर में हीनारायनी शक्ति केबल पर आपने खबरनवीसी के हायटेक टेक्नोलॉजी की महत्ता समझली। इस टेक्नोलॉजी की महत्तासे घबराकर बेचारे पतली गली ढूंढ़ ही रहे थे कि एक उपकरणों से लैस पत्रकार के हाथों धरे गये। देखते ही पत्रकार मुस्कराकर बोला, क्या हल है तानपुरा मास्टर ? बेचारे नारद जी पत्रकार की स्टाइल से सिटपिटा गए। संभल के बोले अरे बोलने की गरिमा रखो। गरिमा को बांधो, कंधे पर पड़े अंगोछे में मिस्टर जानते नहीं हमारे सर […] Read more » ... जब नारद जी सम्मानित हुए satire on indian politics
कविता कुछ बात है यार की हस्ती में … January 31, 2014 / January 31, 2014 by मनीष मंजुल | 1 Comment on कुछ बात है यार की हस्ती में … -मनीष मंजुल- इस छप्पन इंच के सीने में, कोई ऐसी लाट दहकती है, कुछ बात है यार की हस्ती में, यूं जनता जान छिड़कती है! कभी गौरी ने कभी गोरों ने, फिर लूटा घर के चोरों ने छोड़ों बुज़दिल गद्दारों को, ले आओ राणों, सरदारों को मुझे सम्हाल धरती के लाल, ये भारत मां सिसकती है, कुछ बात […] Read more » poem कुछ बात है यार की हस्ती में ...
व्यंग्य आम और खास January 30, 2014 / January 30, 2014 by बीनू भटनागर | 3 Comments on आम और खास -बीनू भटनागर- ‘आप’ के नेता आम से ख़ास होते जा रहे हैं… बिलकुल सही, ’आप’ के विरोधी और मीडिया लगातार उन्हें ख़ास बनाने मे लगे हुए हैं, बहुत मेहनत कर रहे हैं। वो आम बने रहना चाहें, तो भी ये उन्हें ख़ास बनाये बिना चैन की सांस नहीं लेंगे। अभी विरोधी दल का एक कार्यकर्ता […] Read more » AAP Arvind Kejrival आम और खास
व्यंग्य तुम आदमी हो या… January 29, 2014 / January 29, 2014 by विजय कुमार | Leave a Comment -विजय कुमार- शर्माजी को हम सबने मिलकर एक बार फिर ‘वरिष्ठ नागरिक संघ’ (वनास) का अध्यक्ष चुन लिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच वर्मा जी ने उनकी झूठी-सच्ची प्रशंसा के पुल बांधे और बाबूलाल जी ने उन्हें माला पहनायी। शर्मा जी ने सबको धन्यवाद दिया और फिर परम्परा के अनुसार उनकी ओर से […] Read more » satite on politics तुम आदमी हो या...
कविता बड़े घरों में पड़ा ताला January 29, 2014 / January 29, 2014 by मिलन सिन्हा | Leave a Comment -मिलन सिन्हा- खस्ता हाल साल दर साल क्या करे मजदूर -किसान हैं सब बहुत परेशान या तो बाढ़ या फिर सूखा आधी उम्र गरीब रहता है भूखा हर गांव में महाजन देते ऊंचे ब्याज पर रकम पर कैसे चुकाए उधार कहां मिले रोजगार बेचना पड़े घर – द्वार शहर भी कहां खुशहाल गरीब यहां […] Read more » poem बड़े घरों में पड़ा ताला
कविता बेटी को प्रणाम January 29, 2014 / January 29, 2014 by विपिन किशोर सिन्हा | 2 Comments on बेटी को प्रणाम हे दिव्य प्रेम की शिखर मूर्ति तुम ही हो जननी भगिनी तुम्हीं तुम्हीं हो पत्नी पुत्री तुम्हीं। हे कोटि कंठों का दिव्य गान तुम ही हो भक्ति शक्ति तुम्हीं तुम ही हो रिद्धि सिद्धि तुम्हीं तुम ही हो शान्ति क्रान्ति तुम्हीं तुम ही हो धृति कृति तुम्हीं तुम ही हो मृत्यु सृष्टि तुम्हीं तुम ही […] Read more » poem बेटी को प्रणाम
व्यंग्य हजाम और अर्थशास्त्री के वार-पलटवार January 29, 2014 / January 29, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी- शाम को शहर की सड़क पर ‘इवनिंग वॉक’ के लिए निकला था, तभी एक हजाम (नाई/बारबर) का सैलून खुला दिखा। बड़ी लकदक दुकान और दूधिया प्रकाश से रौनक महंगी कुर्सियाँ और आगे-पीछे शीशे लगे हुए थे। युवा हज्जाम से सड़क की ऊबड़-खाबड़ पटरी पर खड़ा ही लगभग चिल्लाकर जोर की […] Read more » satire on indian politics हजाम और अर्थशास्त्री के वार-पलटवार
लेख बेरोजगारी की मार से बेहाल युवा वर्ग January 28, 2014 / January 28, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -ओपी सोनिक- कुछ दिन पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रीय युवा नीति-2014 को मंजूरी दी गई। इसका मुख्य उद्देश्य युवा वर्ग को क्षमता एवं दक्षता हासिल करने के लिए सशक्त बनाना है, ताकि युवा शक्ति को देश के विकास में लगाया जा सके। नई युवा नीति में निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पांच […] Read more » Unemployment in India बेरोजगारी की मार से बेहाल युवा वर्ग