साहित्य श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-६ August 10, 2011 / December 7, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | 4 Comments on श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-६ विपिन किशोर सिन्हा छद्म धर्मनिरपेक्षवादियों का श्रीमद्भगवद्गीता पर एक आरोप यह भी है कि गीता जाति-व्यवस्था को न सिर्फ स्वीकृति देती है, वरन् इसे ईश्वरीय भी मानती है। अपने समर्थन में वे गीता के अध्याय चार के निम्न श्लोक का उद्धरण देते हैं – चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः। तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्॥ “चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं” […] Read more » Srimadbhagwat Gita छद्म धर्मनिरपेक्षवादी श्रीमद्भगवद्गीता श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी
साहित्य पत्रों में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम August 10, 2011 / December 7, 2011 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on पत्रों में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम प्रमोद भार्गव पाश्चात्य इतिहास लेखकों की स्वार्थपरक और कूटनीतिक विचारधारा से कदमताल मिलाकर चलने वाले कुछ भारतीय इतिहास लेखकों के चलते आज भी इतिहास की कुछ पुस्तकों और ज्यादातर पाठ्य पुस्तकों में यह मान्यता चली आ रही है कि 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम अंग्रेजी मान्यता के खिलाफ बर्बरतापूर्ण संघर्ष था। वह संग्राम तत्कालीन ब्रितानी […] Read more » First War प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
आलोचना असमानता की आजादी का जश्न! August 7, 2011 / December 7, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 5 Comments on असमानता की आजादी का जश्न! डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ 15 अगस्त, 2011 को हम आजादी की 65वीं सालगिरह मनाने जा रहे भारत में कौन कितना-कितना और किस-किस बात के लिये आजाद है? यह बात अब आम व्यक्ति भी समझने लगा है| इसके बावजूद भी हम बड़े फक्र से देशभर में आजादी का जश्न मनाते हैं| हर वर्ष आजादी के जश्न […] Read more » independence आजादी आजादी का जश्न
साहित्य श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-२ August 6, 2011 / December 7, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | 5 Comments on श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-२ विपिन किशोर सिन्हा श्रीकृष्ण को अच्छी तरह समझे बिना गीता तक नहीं पहुंचा जा सकता। शरीर और आत्मा जैसी दो चीजें नहीं हैं। आत्मा का जो छोर दिखाई देता है, वह शरीर है और शरीर का जो छोर दिखाई नहीं पड़ता, वह आत्मा है। परमात्मा और संसार जैसी दो चीजें नहीं हैं। परमात्मा और प्रकृति […] Read more » Srimadbhagwat Gita कृष्ण छद्म धर्मनिरपेक्षवादी श्रीमद्भगवद्गीता
गजल दौरे-उल्फत की हर बात याद है मुझे August 6, 2011 / January 4, 2012 by सत्येन्द्र गुप्ता | 1 Comment on दौरे-उल्फत की हर बात याद है मुझे दौरे-उल्फत की हर बात याद है मुझे तुझसे हुई वह मुलाकात याद है मुझे। बरसते पानी में हुस्न का धुल जाना दहकी हुई वह बरसात याद है मुझे। तेरा संवरना उसपे ढलका आंचल संवरी बिखरी सी हयात याद है मुझे। सर्द कमरे में गर्म साँसों की महक हसीं लम्हों की सौगात याद है मुझे। दिल […] Read more »
कविता अलग थलग दुनियाँ से फिर भी इस दुनियाँ में रहता हूँ August 6, 2011 / December 7, 2011 by श्यामल सुमन | 2 Comments on अलग थलग दुनियाँ से फिर भी इस दुनियाँ में रहता हूँ श्यामल सुमन भावना अलग थलग दुनियाँ से फिर भी इस दुनियाँ में रहता हूँ अनुभव से उपजे चिन्तन की नव-धारा संग बहता हूँ पद पैसा प्रभुता की हस्ती प्रायः सब स्वीकार किया अवसर पे ऐसी हस्ती को बेखटके सच कहता हूँ अपना कहकर जिसे संभाला मेरी हालत पे हँसते ऊपर से हँस भी […] Read more »
लेख अराजकता के इस दौर में देश में सैनिक शासन की संभावनायें August 6, 2011 / December 7, 2011 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 1 Comment on अराजकता के इस दौर में देश में सैनिक शासन की संभावनायें मेरा बड़ा बेटा स्टेशनरी की दुकान चलाता है|वहीं पर कम्प्यूटर फोटो कापी इत्यादि भी उपलब्ध हैं सेवा निवृति के बाद मैं भी इस दुकान में बैठकर कंप्यूटर पर लेखन का काम करता हूं|कभी कभी काउंटर पर बैठकर रुपये गिनकर दुकान की आर्थिक हैसियत का अंदाज भी लगा लेता हूं|एक दिन एक ग्यारह बारह साल का […] Read more » Military rule सैनिक शासन
व्यंग्य भ्रष्टाचार है कि मुरब्बा August 5, 2011 / December 7, 2011 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू देखो भाई, यदि आपने भ्रष्टाचार नहीं किया हो तो लगे हाथ यह सौभाग्य पा लो और बहती गंगा में हाथ धो लो। फिर कहीं समय निकल गया तो फिर लौटकर नहीं आने वाला है। भ्रष्टाचार की अभी खुली छूट है, जब जैसा चाहो, कर सकते हो। बाद में न जाने मौका मिलेगा कि नहीं, […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
लेख गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र August 5, 2011 / December 7, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 2 Comments on गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र शादाब जफर “शादाब’’ 15 अगस्त बहुत ही करीब है। में सोच रहा हॅू कि आखिर हमारे भोले भाले नादान प्रधानमंत्री जी लाल किले की प्राचीर से गणतंत्र का झंडा फहरायेगे या भ्रष्टतंत्र का कहना मुश्किल है। आईपीएल घोटाला, राष्ट्रमंडल खेलो में घोटाला, मुंबई के आदशर आवास सोसायटी घोटाला, टुजी स्पेक्ट्रस आवंटन घोटाला, सतर्कता अधिष्ठान में […] Read more » independence गणतंत्र गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र भ्रष्टतंत्र
व्यंग्य व्यंग्य – अनजाने चेहरों की दोस्ती August 4, 2011 / December 7, 2011 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू यह बात अधिकतर कही जाती है कि एक सच्चा दोस्त, सैकड़ों-हजारों राह चलते दोस्तों के बराबर होता है। यह उक्ति, न जाने कितने बरसों से हम सब के दिलो-दिमाग में छाई हुई है। दोस्ती की मिसाल के कई किस्से वैसे प्रचलित हैं, चाहे वह फिल्म ‘शोले’ के जय-वीरू हों या फिर धरम-वीर। साथ […] Read more » vyangya दोस्ती
साहित्य मरुभूमि में बही कथा-सरिता August 3, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment प्रसिद्ध उपन्यासकार प्रेमचंद की जयंती के मौके पर देश भर में तरह-तरह के आयोजन किए गए। कहीं भाषणों का सिलसिला परवान चढ़ा, कहीं शोध-समीक्षा पत्रों और ताज़ा मुद्दों पर बहस हुई। इसी क्रम में राजस्थान की राजधानी जयपुर के झालाना सांस्थानिक क्षेत्र स्थित राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी सभागार में प्रगतिशील लेखक संघ की तरफ से […] Read more » Katha Sarita
साहित्य कहो कौन्तेय-१० August 2, 2011 / December 7, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा द्रुपद को मैंने ससम्मान रथ से उतारा, गुरुवर के सम्मुख प्रस्तुत किया और विनम्र स्वर में निवेदन किया – “गुरुदेव! अपनी गुरुदक्षिणा स्वीकार करें।” मैं हर्षित हो उनके चरणों में गिर पड़ा। उन्होंने मुझे उठाकर वक्षस्थल से लगा लिया। यज्ञसेन द्रुपद ने अतीत में कभी गुरु द्रोण की मित्रता का अपमान किया […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय-१०