राजनीति विधि-कानून चुनाव सुधार : बस, चार कदम चलना होगा February 23, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment जनगणना-2011 के अनुसार, कुल भारतीय ग्रामीण आबादी में से 74.5 प्रतिशत परिवारों की आय पांच हजार रुपये प्रति माह से कम है। इसके विपरीत भारत की वर्तमान केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के 78 मंत्रियों में से 76 करोड़पति हैं। राज्य विधानसभाओं के 609 मंत्रियों में से 462 करोड़पति हैं। स्पष्ट है कि भारत की जनता गरीब है, […] Read more » Featured काॅरपोरेट फंडिग बंद हो चुनाव आयोग चुनाव आयोग को मिलें न्यायिक शक्तियां दलविहीन चुनाव दलविहीन चुनाव शुरु हों स्वयं सुधरे चुनाव आयोग
विधि-कानून विविधा अदालतों से अंग्रेजी को भगाओ February 21, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 5 Comments on अदालतों से अंग्रेजी को भगाओ कानून और न्याय की संसदीय कमेटी ने बड़ी हिम्मत का काम किया है। उसने अपनी रपट में सरकार से अनुरोध किया है कि वह सर्वोच्च और उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को शुरु करवाए। उसने यह भी कहा है कि इसके लिए उसे सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति या सहमति की जरुरत नहीं है, […] Read more » Featured कानून और न्याय की संसदीय कमेटी
विधि-कानून समाज शादी को तमाशा न बनाएं! February 17, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment कांग्रेस की सांसद श्रीमती रंजीत रंजन एक ऐसा विधेयक पेश कर रही हैं, जो अगर कानून बन गया तो सारे देश का बड़ा लाभ होगा। यह ऐसा कानून बनेगा, जिससे सभी जातियों, सभी मजहबों और सभी प्रांतों के लोगों को लाभ मिलेगा। यह विधेयक शादी में होने वाले अनाप-शनाप खर्चे पर रोक लगाने की मांग […] Read more » #Ranjeet Ranjan #डा वेदप्रताप वैदिक कालम Congress marriage bill कांग्रेस कानून रंजीत रंजन शादी को तमाशा न बनाएं
राजनीति विधि-कानून माननीयों को उच्चतम न्यायालय का संदेश February 17, 2017 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारतीय परिवेश में तोहफों का अपना एक महत्व हैं। भारत में ही क्यों दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ, गिफ्ट देने और लेने का अपना आनन्द है, लेकिन जिस तरह इन तौहफों के फेर में स्वार्थी तत्व अपने कार्यों को करवाने में माननीयों से कामयाब हो जाते हैं, तब जरूर […] Read more » Featured आय से अधिक संपत्ति के मामले उच्चतम न्यायालय उच्चतम न्यायालय का संदेश जयललिता जयललिता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले
विधि-कानून विविधा जस्टिस कर्णन लड़ें जरुर लेकिन…. February 13, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक कोलकाता उच्च न्यायालय के चर्चित जज सी.एस. कर्णन ने अब एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। वैसे भी जब वे मद्रास उच्च न्यायालय में थे, तब भी उन्होंने अपनी साथी जजों के विरुद्ध आदेश जारी कर दिए थे। उन्हें सबसे बड़ी शिकायत यह है कि मद्रास हाईकोर्ट के कई जज […] Read more » Justice CS Karnan did not appear before court जस्टिस कर्णन
विधि-कानून विविधा कठघरे में संविधान !? January 28, 2017 by मनोज ज्वाला | 6 Comments on कठघरे में संविधान !? मनोज ज्वाला हमारे देश भारत का संविधान ‘भारतीय संविधान’ नहीं है , यह ‘अभारतीय संविधान’ है । मतलब यह कि जिसे भारतीय संविधान कहा जा रहा है , इसका निर्माण हम भारत के लोगों ने अथवा हमारे पूर्वजों ने हमारी इच्छानुसार नहीं किया है । वैसे कहने-कहाने देखने-दिखाने को तो इस संविधान की मूल प्रति […] Read more » constitution of India Featured Indian constitution कठघरे में संविधान
विधि-कानून विविधा जजों की नियुक्ति का विकल्प तलाशना महत्वपूर्ण January 15, 2017 by महेश तिवारी | 1 Comment on जजों की नियुक्ति का विकल्प तलाशना महत्वपूर्ण संवैधानिक देश के लिए यह नितान्त महत्वपूर्ण तथ्य होता है कि वहां के नागरिकों को ऐसी सुविधाएं नसीब हो, जिससे उन्हें अपना सामाजिक और आर्थिक जीवन में रूकावट न हो. देश के लोगों को भारतीय संविधान के द्वारा कुछ अधिकार दिये गए है जिसकी रक्षा करना हमारे संवैधानिक तंत्र की जिम्मेदारी बनती है। आज देश […] Read more » appointment of judges collegium system Collegium System of judges Featured जजों की नियुक्ति न्याय प्रक्रिया की गति धीमी
राजनीति विधि-कानून धर्म के अंसैवाधानिक चुनावी प्रयोग पर अंकुश January 4, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव सर्वोच्च न्यायालय की सात सदस्यीय पीठ के ताजा फैसले से राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को धर्म, जाति, नस्ल, समुदाय और भाषा के आधार पर वोट मांगना मुश्किल होगा। वोट मांगे तो उम्मीदवारी को अंसैवाधानिक ठहराया जा सकता है ? हालांकि ऐसा तभी संभव होगा जब आचार-संहिता के उल्लघंन की उच्च न्यायालय में अपील […] Read more » Featured अंसैवाधानिक चुनावी प्रयोग पर अंकुश
विधि-कानून विविधा न्यायपालिका और बढती पेंडेंसी January 4, 2017 by अनिल गुप्ता | Leave a Comment एक समाचार के अनुसार कल सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर के विदाई समारोह में भारी भीड़ को देख कर जस्टिस ठाकुर ने कहा कि सात साल के सर्वोच्च न्यायालय के कार्यकाल में अट्ठाईस विदाई समारोह देखे हैं लेकिन इतनी भीड़ पहले कभी नहीं देखी!उन्होंने मनोनीत मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर से कहा कि […] Read more » Cheif Justice of India J S Khehar Featured जजों की कमी न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार न्यायाधीशों की कमी मनोनीत मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर
विधि-कानून विविधा इससे लोकतंत्र का बागवां महकेगा December 15, 2016 / December 15, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment विमुद्रीकरण के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब मोदी सरकार चुनाव सुधार की दिशा में भी बड़ा निर्णय लेने की तैयारी में है। संभव है सारे राष्ट्र में एक ही समय चुनाव हो- वे चाहे #लोकसभा हो या #विधानसभा। इन चुनाव सुधारों में दागदार नेताओं पर तो चुनाव लड़ने की पाबंदी लग ही सकती है, वहीं शायद एक व्यक्ति एक साथ दो सीटों पर भी चुनाव नहीं लड़ पाएगा? Read more » Featured one India one election tainted politicians deprived of election चुनाव चुनाव आयोग दागदार नेताओं पर चुनाव लड़ने की पाबंदी नोटबंदी लोकसभा विधानसभा विमुद्रीकरण सारे राष्ट्र में एक चुनाव
विधि-कानून विविधा समाज मानव अधिकारों का संरक्षण और भारतीय मीडिया December 11, 2016 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment मानव अधिकारों के संरक्षण की चर्चा आरंभ करने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर यह मानवाधिकार क्या हैं और इसके बाद यह जानेंगे कि भारतीय मीडिया का इनके विकास में क्या योगदान रहा है। वस्तुतः मानव अधिकारों से अभिप्राय ‘‘मौलिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता से है जिसके सभी मानव प्राणी हकदार है। Read more » Featured भारतीय मीडिया मानव अधिकार मानव अधिकारों का संरक्षण मानव अधिकारों के संरक्षण की चर्चा
विधि-कानून विविधा आमने-सामने : न्यायाधीशों की नियुक्ति December 7, 2016 by वीरेंदर परिहार | 2 Comments on आमने-सामने : न्यायाधीशों की नियुक्ति उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सर्वोच्च न्यायालय के काॅलेजियम द्वारा भेजे गए 77 नामों में से 34 नामों की स्वीकृति केन्द्र सरकार द्वारा दिए जाने से ऐसा लगने लगा था कि न्यायपालिका और सरकार के बीच बर्फ गलने लगी है, और अंतोगत्वा दोनों के बीच जजों की नियुक्तियों को लेकर कोई आम सहमति बन जाएगी। लेकिन 43 नामों को केन्द्र सरकार द्वारा वापस कर दिए जाने और उन नामों को पुनः काॅलेजियम द्वारा केन्द्र सरकार के पास भेजे जाने से ऐसा लगता है कि न्यायपालिका और सरकार आमने-सामने आ गए हैं। Read more » Collegium System of judges Featured काॅलेजियम काॅलेजियम व्यवस्था न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रधान न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर सर्वोच्च न्यायालय सशक्त एवं निष्पक्ष लोकपाल गठन