विधि-कानून हम भ्रष्ट हैं ? लोकपाल बिल पास होना चाहिए! October 31, 2011 / December 5, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 3 Comments on हम भ्रष्ट हैं ? लोकपाल बिल पास होना चाहिए! शादाब जफर ‘शादाब बचपन में कक्षा तीन या चार के कोर्स में एक कहानी थी। एक बूढा व्यक्ति अपनी मृत्यु करीब होने पर अपने पांच बेटों को बुलाकर लकड़ी का एक गठ्ठर उनके हाथो में देकर कहता है इसे तोड़ो पाचो बेटे बारी बारी से जोर लगाते है पर लकड़ी का गठठर नही टूटता। फिर […] Read more » lokpal लोकपाल
विधि-कानून जनलोकपाल लाओ, फिर अन्ना की टीम को भी फांसी लगाओ! October 27, 2011 / December 5, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 5 Comments on जनलोकपाल लाओ, फिर अन्ना की टीम को भी फांसी लगाओ! 0 हां जनता और सरकार की गल्ती में बड़ा फर्क होता है ! इक़बाल हिंदुस्तानी जब से टीम अन्ना ने सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलकर जनलोकपाल लाने की मांग की है तब से ही सरकार और खासतौर पर कांग्रेस टीम अन्ना के सदस्यों पर लगातार कीचड़ उछालने का अभियान चला रही है। कभी […] Read more » Team Anna जनलोकपाल टीम अन्ना
विधि-कानून टीम अन्ना के ‘कांग्रेस विरोध’ के निहितार्थ October 11, 2011 / December 5, 2011 by तनवीर जाफरी | 6 Comments on टीम अन्ना के ‘कांग्रेस विरोध’ के निहितार्थ तनवीर जाफरी समाजसेवी अन्ना हज़ारे की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम तथा जनलोकपाल विधेयक संसद में पेश किए जाने की उनकी मांग को लेकर पिछले दिनों जिस प्रकार देश की जनता उनके साथ व उनके समर्थन में खड़ी दिखाई दे रही थी अब वही आम जनता उनके ‘राजनैतिक तेवर’ को देखकर उनके आंदोलन को संदेह की नज़रों […] Read more » Anna Hazare opposition of congress अन्ना हजारे कांग्रेस
विधि-कानून साम्प्रदायिकता निरोधक विधेयक अर्थात भारत के पुनः विभाजन का षड्यंत्र October 9, 2011 / December 5, 2011 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | 2 Comments on साम्प्रदायिकता निरोधक विधेयक अर्थात भारत के पुनः विभाजन का षड्यंत्र डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री सोनिया कांग्रेस धीरे-धीरे अपने गुप्त एजेंडे को लागू करने की दिशा में सक्रिय हो रही है। अरसा पहले यह षडयंत्र ब्रिटिश साम्राज्यवाद के अंतर्गत यूरोप की गोरी शक्तियों ने भारत में किया था। इस प्रयोग के लिए उन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना का प्रयोग किया था। गोरी शक्तियों के षडयंत्र के तहत […] Read more » साम्प्रदायिकता निरोधक विधेयक
विधि-कानून त्वरित अन्वीक्षा : एक स्वप्न October 9, 2011 / December 5, 2011 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | 1 Comment on त्वरित अन्वीक्षा : एक स्वप्न एडवोकेट मनीराम शर्मा भारत में न्यायिकतंत्र इससे जुड़े पेशेवरों के लिए स्वर्ग है| मामलों के शीघ्र निपटान की ओर देश के कर्णधारों, न्यायविदों, वकीलों या पुलिस अधिकारियों का कभी भी गंभीर ध्यान नहीं गया है| मात्र कुछ विचार मंचों पर लुभावने भाषणों के अतिरिक्त इस महान देश ने स्वतंत्रता के 64 वर्षों में शायद ही […] Read more » one dream quick anvicsha त्वरित अन्वीक्षा
विधि-कानून सरकारी दमन: हिरासती मौतें और फर्जी मुठभेड़ October 5, 2011 / December 5, 2011 by पूजा शुक्ला | Leave a Comment पूजा शुक्ल कश्मीर हो या उ० प्र० हिरासती मौतों व् फर्जी मुठभेड़ो का सिलसिला रुक नहीं रहा है , सरकारें चिंतित है पर है पर पुलिसिया दमन बदस्तूर जारी हैपिचले कुछ वर्षो से ऐसी घटनाएं अपवाद से आम हो गयी है, ऐसा नहीं है इन बढ़ रही घटनाओ से संसद चिंतित नहीं है , वहां […] Read more » फर्जी मुठभेड़ सरकारी दमन हिरासती मौतें
विधि-कानून अनिवार्य मतदान की जरूरत September 14, 2011 / December 6, 2011 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव भारत में चुनाव सुधारों को लेकर बहुत ज्यादा संजीदगीं नहीं है। ऐसे में गांधीवादी अन्ना हजारे का यह सुजाव कि मतदाताओं को प्रत्याशी को खारिज करने का हक और उम्मीद पर खरा नहीं उतरने पर बीच मे वापस बुलाने का अधिकार मिलना चाहिए, तमाम राजनीतिकों को ये मांगें रास नहीं आ रही हैं। […] Read more » Compulsory Voting Indian Voters Right to Vote अनिवार्य मतदान
विधि-कानून सरकारी दबाव से हलकान हैं सरकारी बैंक September 14, 2011 / September 14, 2011 by सतीश सिंह | Leave a Comment अभी चालीस हजार करोड़ रुपयों के कर्ज माफी के दुष्परिणामों से सरकारी बैंक निकल भी नहीं पाए थे कि अब फिर से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले भूमिहीन मजदूरों को 10,000 रुपयों तक के ऋण देने की योजना सरकार ने बनाई है। इसके लिए उनकी संपत्ति को बंधक नहीं बनाया जाएगा। पर गारंटी जरुर लगेगी। […] Read more » Gramin Banks State Banks सरकारी दबाव सरकारी बैंक
विधि-कानून क्या उम्र कैद फांसी का विकल्प है ? September 4, 2011 / December 6, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment मनीराम शर्मा फांसी की सजा के विषय में हमेशा से ही विवाद बना रहा है| कुछ उदारवादी लोगों का कहना है कि जब जीवन देना मनुष्य के वश में नहीं है तो जीवन लेने का अधिकार भी नहीं है | ऐसी परिस्थितियों में फांसी की सजा या मृत्यु दण्ड का औचित्य नहीं रह जाता है| […] Read more » fansi फांसी
विधि-कानून नीम-हकीमी न्याय व्यवस्था September 1, 2011 / December 6, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | Leave a Comment भ्रष्टाचार, अत्याचार, भेदभाव, मनमानी और गैर-बराबरी की जननी नीम-हकीमी न्याय व्यवस्था विधायिका और कार्यपालिका को तो नहीं दिखती, लेकिन न्यायपालिका क्यों चुप है? जबकि अपने ऊपर सवाल उठाने मात्र से तत्काल सबकुछ नजर आने लगता है! डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ सच बात तो ये है कि जमीन जायदाद आदि से सम्बन्धित सभी प्रकार के आपसी या […] Read more » Law Management
विधि-कानून जनलोकपाल का क्या हुआ? August 28, 2011 / December 6, 2011 by राकेश उपाध्याय | 3 Comments on जनलोकपाल का क्या हुआ? अन्ना का अनशन तो खत्म हो गया लेकिन उस जनलोकपाल बिल का क्या हुआ जिसे लेकर देश को टीम अन्ना ने अनशन की आग में झोंक दिया। क्या टीम अन्ना ने अपने रुख से समझौता नहीं किया। क्या जनलोकपाल के सवाल पर टीम अन्ना को मुंह की नहीं खानी पड़ी, इन तमाम सवालों की पड़ताल […] Read more » Janlokpal जनलोकपाल
विधि-कानून भोपाल में आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या August 26, 2011 / December 7, 2011 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव जान जोखिम में डालती जानकारी भ्रष्टाचार की भंडाफोड़ कोशिशें जानलेवा साबित हो रही हैं। भोपाल की आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या से पूरे देश में सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां लेने की जोखिम उठा रहे कार्यकर्ता हैरान हैं। इस कानून के लागू होने से लेकर अब तक 17 आरटीआई कार्यकर्ताओं की […] Read more » RTI आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या