Category: राजनीति

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केरल सरकार का असंवैधानिक कृत्य घोर निन्दनीय

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केन्द्र सरकार के नीति का विरोध करना ना तो राज्य के हित में है और ना ही प्रजातंत्र के। जहां वीफ को मर्यादित ढ़ंग से मनाने की छूट है वहीं भारतीय संविधान द्वारा चुनी हुई भारत सरकार को खुली चुनौती देना असंवैधानिक तथा देश विरोधी भी है।इससे ज्यादा तो देश की बहुत बड़ी आवादी की भावनाओं का सम्मान ना करते हुए खुलेआम एसी अनैतिक हरकत करना भी देश विरोधी की श्रेणी में आता है।

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माया के जाल में मायावती

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सवर्ण नेतृत्व को दरकिनार कर दलित और पिछड़ा नेतृत्व तीन दशक पहले इसलिए उभरा था, जिससे लंबे समय तक केंद्र व उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों की सत्ता पर काबिज रही कांग्रेस शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के जो लक्ष्य पूरे नहीं कर पाई थीं, वे पूरे हों। सामंती, बाहूबली और जातिवादी कुच्रक टूटें। किंतु ये लक्ष्य तो पूरे हुए नहीं, उल्टे सामाजिक शैक्षिक और आर्थिक विशमता उत्तोत्तर बढ़ती चली गई। सामाजिक न्याय के पैरोकारों का मकसद धन लेकर टिकट बेचने और आपराधिक पृष्ठभूमि के बाहुबलियों को अपने दल में विलय तक सिमट कर रह गए।

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जन विश्वास की कसौटी पर: मोदी सरकार

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यह पूछा जा सकता है कि मोदी सरकार भी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? इसके उत्तर में निसंदेह कहा जा सकता है कि भारतीय संविधान में कानून के समक्ष जो समानता का अधिकार दिया गया है, उसे मोदी सरकार ने बखूबी कायम किया है। अब यह कहावत बिल्कुल उलट चली है कि कानून गरीबों पर शासन करता है और अमीर कानून पर शासन करता है। इसी का नतीजा है कि बड़े राजनीतिज्ञ जैसे ओम प्रकाश चैटाला, छगन भुजबल जैसे लोग जेल में हैं, तो कई जेल जाने की प्रक्रिया में गुजर रहे हैं।

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नये मोड़ पर व्यापम घोटाला

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‘कैग’ की रिपोर्ट कांग्रेस को हमलावर होने का मौका दे दिया था विपक्ष के नेता अजय सिंह ने शिवराजसिंह का इस्तीफ़ा मांगते हुए कहा था कि “अब यह सवाल नहीं है कि मुख्यमंत्री व्यापमं घोटाले में दोषी हैं या नहीं लेकिन यह तो स्पष्ट हो चुका है कि यह घोटाला उनके 13 साल के मुख्यमंत्रित्व काल में हुआ है, उनके एक मंत्री सहित भाजपा के पदाधिकारी जेल जा चुके हैं और उनके बड़े नेताओं से लेकर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सब जाँच के घेरे में हैं इसलिए अब उन्हें मुख्यमंत्री चौहान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है.” दूसरी तरफ भाजपा ने उलटे “कैग” जैसी संवैधानिक संस्था पर निशाना साधा था और कैग’ द्वारा मीडिया को जानकारी दिए जाने को ‘सनसनी फैलाने वाला कदम बताते हुए उस पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का आरोप लगाया था

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कहीं अपने होने का अर्थ ही न खो दें राहुल गांधी !

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राहुल गांधी शुरू से ही राजनीति को लेकर दुविधा में दिखते रहे हैं। वे सार्वजनिक रूप से यहां तक कह चुके हैं कि सत्ता तो जहर है। लेकिन फिर भी मनमोहन सिंह की पहली सरकार में ही मंत्री बन गए होते, तो देश चलाना सीख जाते और सत्ता का जहर पीना भी। कांग्रेस ने अगली बार फिर जब मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया था, तब भी उनको न बनाकर, राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बना दिया जाता, तो कोई कांग्रेस का क्या बिगाड़ लेता ?

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राजनीति

तीन साल तो मात्र एक पड़ाव है

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अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद को नीति के रूप में प्रयोग कर रहे पाकिस्तान को भारत ने अलग थलग करने में भी सफलता हासिल की है इसी कारण आज पाकिस्तान पर अमेरिका से लेकर कई देशों ने दबाव बनाया है कि वह आतंकवाद को प्रश्रय देना बंद करे। यह मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी है। चीन की दादागिरी को भी बढ़ने न देना सरकार की सफलता है। चीन जहां एक तरफ पाकिस्तान की मदद कर रहा है वहीं भारत के कई हिस्से पर अपना दावा करता रहा है। एलएसी को वह स्वीकार नहीं कर रहा है। लेकिन कई दशकों बाद भारत ने लेह के आगे अपने 100 टैंक भेजे और युद्धाभ्यास किया। वहीं अरुणाचल प्रदेश के विकास और सीमा पर सड़क निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया गया।

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राजनीति

प्रबंधन कौशल के तीन वर्ष

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अनेक अनोखे तर्क विमर्श में हैं जिनमें एक यह भी है कि अविवाहित और परिवार त्यागी व्यक्ति आखिर किस लिए भ्रष्टाचार करेंगे। अथवा देश में पहली बार हिन्दू धर्म की विजय पताका फहराने वाला सशक्त नेता सत्ता में है,उसका विरोध किया तो आजीवन बहुसंख्यक होने के बावजूद अल्पसंख्यक की भांति रहना होगा। नोट बंदी और डिजिटल इकॉनॉमी आम नागरिक के लिए भ्रष्टाचार के अवसर कम करने के उपाय हैं किंतु नॉन परफार्मिंग एसेट्स की रीस्ट्रक्चरिंग तो वह अनूठी सूझ है जो कॉर्पोरेट्स की सहूलियत के लिए गढ़ी गई है।

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महिला-जगत राजनीति

महिला कल्याण पर केन्द्रीत मोदी सरकार के तीन वर्ष

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स्टार्टअप में बेटियों के लिए खास प्रयास किए गए हैं. यह सच है कि जो बेटियां घर की जिम्मेदारी सम्हाल सकती हैं, वे अपने उद्योग-धंधे की सफल कप्तान भी बन सकती हैं. आवश्यकता है तो उनके भीतर छिपे उस हुनर को तराशने की जो आने वाले दिनों में उन्हें कामयाब बनाएगी. स्टार्टअप में सरकार ने यही कोशिश की है और परिणाम आने लगा है. महिलाओं में बचत की आदत होती है लेकिन इसे बैंकिंग व्यवस्था से जोडऩे की खास पहल की है. सुकन्या, धनलक्ष्मी नाम से कुछ ऐसी योजनाएं जो महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती हैं.

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