राजनीति अखिलेश-मुलायम दंगल, भिड़ने से बचे January 2, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment जैसा कि मैंने कल लिखा था, अपने टीवी चैनल और अखबार लखनऊ के मामले में जरुरत से ज्यादा आशावादी दिखाई पड़ रहे थे। मैंने मुंबई में बैठे हुए लिखा था कि लखनऊ में होने वाले समाजवादी पार्टी के अधिवेशन में धमाका हो सकता है। मैंने समाजवादी पार्टी के टूटने की भी आशंका व्यक्त की थी। […] Read more » अखिलेश-मुलायम अखिलेश-मुलायम दंगल
राजनीति तो क्या फिर भड़केगी गुर्जर आरक्षण की आग ? January 2, 2017 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment जग मोहन ठाकन गुर्जर फिर स्तब्ध हैं और नौ साल की लंबी अवधि की लड़ाई के बाद पुनः जहां से चले थे वहीं पहुँच गए हैं । राजस्थान हाई कोर्ट ने गुर्जर सहित पाँच जातियों को एसबीसी में पाँच प्रतिशत आरक्षण देने के अधिनियम -2015 को रद्द कर गुर्जर आरक्षण पर खुशियाँ मना रहे गुर्जर […] Read more » Gujjar Reservation politics on Gujjar reservation कैप्टन गुर्विन्दर सिंह गुर्जर आरक्षण गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बेंसला
राजनीति सपा का नाटक कहीं प्रायोजित तो नहीं ? January 2, 2017 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिंदुस्थानी उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी में जिस प्रकार से विभाजन की पटकथा लिखी जा रही है, वह पूरी तरह से प्रायोजित कार्यक्रम की तरह ही दिखाई दे रहा है। सपा में एक समय मुख्यमंत्री के दावेदार के तौर पर दिखाई देने वाले मुलायम सिंह के भाई शिवपाल सिंह को इस दावेदारी से अलग करने […] Read more » Akhilesh ji UP drama of sp sponsored Featured Mulayam Ji UP sp सपा का नाटक सपा का नाटक प्रायोजित
राजनीति कुनबे की कलह से ढहेगा समाजवादी साम्राज्य December 31, 2016 / December 31, 2016 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment अखिलेश यादव के पार्टी से निष्कासन पर विशेष ‘वंशवाद’शब्द नेहरू-गांधी परिवार की निंदा के लिए विद्वत्ता का मुखौटा लगाने का अवसर देता है। किन्तु जब परिवारवाद की गिरफ़्त में रहकर राजनीतिक अवधारणा का नवसिंचन होता है तो पौध भी अल्पविकसित होने का राग ही आलापती है| राजनीति में वंशवाद को लेकर हमारे जनमानस में […] Read more »
राजनीति कंगाली के पचास दिन और देश का विश्वास December 31, 2016 by निरंजन परिहार | Leave a Comment निरंजन परिहार लालू यादव भले ही देश को याद दिला रहे हो कि 31 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए किसी चौराहे का इंतजाम कर लीजिए। लेकिन सवाल न तो किसी चौराहे का है और ना ही प्रधानमंत्री द्वारा गोवा से देश को दिए संदेश में उनके 50 दिन में सब कुछ ठीक हो […] Read more » 50 days of demonetization 50 days of notebandi Featured notebandi कंगाली के पचास दिन देश का विश्वास
राजनीति शख्सियत जेटली की जिंदगी का राजनीतिक मायाजाल December 31, 2016 by निरंजन परिहार | Leave a Comment निरंजन परिहार- अरुण जेटली का अतीत दुनियादारी के अंदाज में काफी सफल रहा है। दिल्ली युनिवर्सिटी में जब वे पढ़ते थे, तब भले ही बस के पैसे भी उनके पास नहीं हुआ करते थे, लेकिन आज सैकंड के हिसाब से वकालात की फीस की गणना करनेवाले देश के शिखर के वकीलों में जेटली नंबर वन […] Read more » Featured अरुण जेटली का राजनीतिक मायाजाल अरुण जेटली की जिंदगी जेटली की जिंदगी का राजनीतिक मायाजाल
राजनीति देश मजहब-प्रेम से ऊपर है December 31, 2016 / December 31, 2016 by अनुश्री मुखर्जी | Leave a Comment दीदी का मुस्लिम प्रेम ही था कि उन्होंने 30000 मदरसों को 2500 रुपये और 1500 मस्जिदों को 1500 रुपए प्रतिमाह देने का फैसला कर लिया था, जिसकी भविष्य में गंभीरता को देखते हुए माननीय कोलकाता हाईकोर्ट ने उस फैसले को ही खारिज कर दिया था। मां, माटी और मानुष की राजनीति के नारे की उस वक्त भी पोल खुली, जब मालदा हमले के ठीक पहले एक मदरसे के प्रधानाध्यापक काजी मसूम अख्तर पर इसलिए हमला कर दिया गया क्योंकि काजी छात्रों से राष्ट्रीय गान सुनना चाहते थे। यही नहीं सरकार ने कुछ मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा आपत्ति जताने के बाद बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन द्वारा लिखी गई पटकथा वाले नाटक सीरीज के प्रसारण पर भी रोक लगा दी और सलमान रुश्दी को कोलकाता आने पर प्रतिबंध लगा दिया। Read more » communal riots communal riots in Dhulagarh communal riots in west bengal Featured Muslim atrocity on Hindus in Mamta's West Bengal कोलकाता हाईकोर्ट तृणमूल कांग्रेस धुलागढ़ धुलागढ़ सांप्रदायिक हिंसा पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल का धुलागढ़ सांप्रदायिक हिंसा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुस्लिम-प्रेम सांप्रदायिक हिंसा
राजनीति आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा तक पर एतराज क्यों ..? December 29, 2016 / December 29, 2016 by संदीप त्यागी | 1 Comment on आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा तक पर एतराज क्यों ..? धीरे-धीरे ही सही लेकिन चीजें बदलनी शुरू हुई हैं। दलित और पिछड़े समाज का शहरी युवा भी राजनैतिक दलों के इस गोरखधंधे को बखूबी समझने लगा है और समझने लगा है, कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रतियोगिता से ही पार पाया जा सकेगा। यही नहीं आरक्षण के बूते दलित और पिछड़े समाज के राजनैतिक मठाधीशों को लेकर भी समाज में माहौल अब बदल रहा है। लोग मानने लगें कि आरक्षण का यह लाभ जरूरतमंदों तक न पहँुचकर कुछ लोगों की जागीर बन रहा है। दलित और पिछड़े समाज के जागरूक युवाओं में भी यह धारणा बन रही है, कि आरक्षण व्यवस्था का लाभ जातिगत न होकर जरूरतमंदों को मिले तो समाज की तस्वीर ज्यादा तेजी के साथ बदलेगी। Read more » Featured Reservation System आरक्षण व्यवस्था आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा
राजनीति बेनकाब मायावती December 29, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment ८ नवंबर की रात के बाद मोदी द्वारा नोटबन्दी किए जाने के बाद लगभग सभी विपक्षी दल विक्षिप्त हो गए। अब उन्होंने खुद ही प्रमाण देना शुरु कर दिया है कि उनकी यह दशा क्यों हुई। कल दिनांक २६ दिसंबर को प्रवर्तन निर्देशालय द्वारा जारी की गई सूचना में यह खुलासा हुआ है कि बसपा […] Read more » Featured बसपा प्रमुख मायावती बेनकाब मायावती मायावती
राजनीति यूपी की चर्तुभुज सियासत ! December 29, 2016 by संजय सक्सेना | Leave a Comment कहने को कांगे्रस ने ब्राहमण नेता और दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित को यूपी का भावी सीएम प्रोजेक्ट कर दिया है,लेकिन शीला जी को यही नहीं पता है कि अगर कांगे्रस का सपा से चुनावी तालमेल हो जायेगा तो चुनाव में उनकी क्या हैसियत रहेगी। इसके अलावा राहुल गांधी पीएम मोदी को भ्रष्टाचारी साबित करने के लिये कथित तौर पर जो कागज लिये घूम रहे हैं,उसमें शीला दीक्षित का भी नाम है, इससे भी शीला असहज महसूस कर रही है। Read more » Featured UP election 2017 उत्तर प्रदेश चुनाव उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव उप्र विधान सभा चुनाव
राजनीति सपा में फिर बढ़ी अंदरुनी कलह December 28, 2016 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिन्दुस्थानी उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी में कोहराम थमने का नाम नहीं ले रहा है, प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव अपने राजनीतिक अस्तित्व का प्रदर्शन यदाकदा करते हुए दिखाई देते हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चाहते हैं कि प्रदेश की जनता सपा सरकार के प्रदर्शन के आधार पर ही विरोध या समर्थन करेंगे। ऐसे में एक […] Read more » Featured upelection विधानसभा चुनाव
राजनीति चुनावी चंदे में पारदर्शिता का सवाल December 28, 2016 / December 28, 2016 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on चुनावी चंदे में पारदर्शिता का सवाल जिस ब्रिटेन से हमने संसदीय सरंचना उधार ली है,उस बिट्रेन में परिपाटी है कि संसद का नया कार्यकाल शुरू होने पर सरकार मंत्री और संासदो की संपति की जानकारी और उनके व्यावसायिक हितों को सार्वजानिक करती है। अमेरिका में तो राजनेता हरेक तरह के प्रलोभन से दूर रहें, इस दृष्टि से और मजबूत कानून है। वहां सीनेटर बनने के बाद व्यक्ति को अपना व्यावसायिक हित छोड़ना बाघ्यकारी होता है। जबकि भारत में यह पारिपाटी उलटबांसी के रूप में देखने में आती है। यहां सांसद और विधायाक बनने के बाद राजनीति धंधे में तब्दील होने लगती है। ये धंधे भी प्रकृतिक संपदा के दोहन, भवन निर्माण, सरकारी ठेके, टोल टैक्स, शराब ठेके और सार्वजानिक वितरण प्रणाली के राशन का गोलमाल कर देने जैसे गोरखधंधो से जुड़े होते है। Read more » Featured transparency in election funds आॅनलाइन भुगतान व्यवस्था केंद्र सरकार केन्द्रीय सूचना आयोग चंदे में पारदर्शिता चल- अचल संपति का खुलासा राज्यसभा सचिवालय विमुद्रीकरण