राजनीति नीतीश कुमार : “चलनी दूसे सूप को” February 13, 2015 / February 13, 2015 by आलोक कुमार | 1 Comment on नीतीश कुमार : “चलनी दूसे सूप को” माँझी-नीतीश की कुर्सी की ‘हाई-वोल्टेज’ लड़ाई में नीतीश जी लगातार ये कहते दिख रहे हैं “बिहार में संवैधानिक संस्थाओं व परम्पराएँ मज़ाक बन कर रह गई हैं ” उनका इशारा किस संवैधानिक संस्था की ओर है इसे ,नीतीश-माँझी प्रकरण के संदर्भ में , समझना ‘रॉकेट-साइन्स’ के गूढ विज्ञान जैसा जटिल भी नहीं है , लेकिन नीतीश जी के मुँह से ऐसी बात सुन कर हँसी आना , हतप्रभ होना तो […] Read more » नीतीश कुमार माँझी-नीतीश की कुर्सी
राजनीति भाजपा की हार या आप की जीत ! February 13, 2015 / February 13, 2015 by संजय द्विवेदी | 2 Comments on भाजपा की हार या आप की जीत ! -संजय द्विवेदी दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम में भाजपा की पराजय की चर्चा हर जुबान पर है। जाहिर तौर पर इस हार ने भाजपा के अश्वमेघ के अश्व को रोक दिया है और नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी के जलवे में भी कमी आई है। दिल्ली का चुनाव सही मायने में बहुत छोटा चुनाव है, […] Read more » आप की जीत ! भाजपा की हार
राजनीति राष्ट्रीय विकल्प तो भाजपा ही है February 12, 2015 / February 12, 2015 by सुरेश हिन्दुस्थानी | 1 Comment on राष्ट्रीय विकल्प तो भाजपा ही है सुरेश हिन्दुस्थानी दिल्ली में जिस प्रकार के चुनाव परिणाम आए, उससे धर्मनिरपेक्षता का आवरण ओढ़े उन ताकतों को चिल्लाने अवसर मिल गया है जो राजनीतिक तौर पर पतन की ओर अग्रसर हो चुके हैं। लेकिन सत्य यह है कि आम आदमी पार्टी की यह अकल्पनीय जीत उन दलों के लिए भी किसी बड़े खतरे का […] Read more » राष्ट्रीय विकल्प तो भाजपा ही है
राजनीति भाजपा सबक ले और आगे बढ़े…. February 11, 2015 / February 11, 2015 by नरेश भारतीय | 2 Comments on भाजपा सबक ले और आगे बढ़े…. नरेश भारतीय दिल्ली में हुए चुनावों में अपनी घोर पराजय की सम्यक समीक्षा करते समय भाजपा को यह ध्यान में लेने की महती आवश्यकता है कि वह किसी भी परिस्थिति में अपने स्थानीय नेतृत्व की उपेक्षा करने से बचे. स्पष्ट है कि पहले से ही विभाजित दिल्ली के भाजपा नेताओं का मनोबल चुनाव से मात्र […] Read more » भाजपा सबक ले
राजनीति ये ‘जुमलों’ पर ‘जुनून’ की जीत है! February 10, 2015 / February 10, 2015 by राजेश कश्यप | Leave a Comment राजेश कश्यप दिल्ली विधानसभा के चुनावी परिणाम…अद्भूत और अप्रत्याशित। देश के चुनावी इतिहास का उल्लेखनीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। बड़े-बड़े दिग्गज, चुनावी विश£ेषक और राजनीति के धुरंधर दिल्ली की जनता का यह मिजाज नहीं भांप पाये। दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिणाम ने स्पष्ट कर दिया कि अब ‘जुमलों’ की राजनीति देश […] Read more » जुनून की जीत है
राजनीति जनादेश बड़ा होता है तो जनाकांक्षाएँ भी बड़ी होती हैं February 10, 2015 / February 10, 2015 by आलोक कुमार | 2 Comments on जनादेश बड़ा होता है तो जनाकांक्षाएँ भी बड़ी होती हैं दिल्ली में आम आदमी पार्टी की इस ‘सुपर लैंड-स्लाईड विक्ट्री’ से ये स्पष्ट है कि जनता के मिजाज और नब्ज को केजरीवाल और उनकी टीम ने बाकी ‘सबों’ से बेहतर भाँपा l इस ‘सब’ में केजरीवाल विरोधी पार्टियाँ भी हैं , मीडिया का वो तबका भी है जो आम आदमी पार्टी की जीत का आक्लन तो कर रहा था लेकिन उसे भी ‘ऐसी’ जीत की उम्मीद […] Read more » जनादेश बड़ा होता है
राजनीति नीतीश अड़े और मांझी भी डटे February 10, 2015 / February 10, 2015 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिन्दुस्थानी बिहार में चल रहे राजनीतिक उठापटक के खेल में यूं तो दिग्गज राजनेता माने जाने वालों के लिए एक चुनौती बनकर सामने आए मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने यह कहकर कि मैं बहुमत साबित करूंगा, नीतीश कुमार के सामने बहुत बड़ा पेंच स्थापित कर दिया है। ऐसे में तमाम प्रयास करने के बाद भी […] Read more » नीतीश अड़े मांझी भी डटे
राजनीति ये तो होना ही था … शाह जी ! February 10, 2015 / February 10, 2015 by अलकनंदा सिंह | Leave a Comment 1946 में लिखी बाबा नागार्जुन की ये कविता ईश्वर के प्रति आस्था की मांग के बजाय अनास्था मांगती है जो वैचारिक साहस था उनका। उस समय इस कविता को दो तरह की प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा, एक तो आश्चर्य का भाव देतीं और दूसरी निंदा का। आपातकाल के पश्चात् प्रकाशित हुए अपने कविता संग्रह […] Read more »
राजनीति हिमाचल में आसान नही तीसरे विकल्प की डगर February 6, 2015 by बी.आर.कौंडल | Leave a Comment बी.आर.कौंडल हिमाचल प्रदेश की वादियाँ आजकल भले ही प्राकृतिक ठंड से सिकुड़ गई हो लेकिन राजनितिक गलियारों में काफी गर्माहट महसूस की जा रही है | वर्तमान सरकार द्वारा राज्य की बागडोर सम्भालते ही प्रतिपक्ष पर ताबड़तोड़ हमले करके सत्ता पक्ष ने यह साबित कर दिया कि वह वादाखिलाफी नही करती | आखिर यही मुद्दा […] Read more » तीसरे विकल्प की डगर हिमाचल
राजनीति अरविन्द केजरीवाल – चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाये हम दोनो February 5, 2015 by डा. अरविन्द कुमार सिंह | 1 Comment on अरविन्द केजरीवाल – चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाये हम दोनो डा. अरविन्द कुमार सिंह गलतियाॅ दो प्रकार की होती है। एक जो क्षमायोग्य होती है तथा दूसरी जो सजायोग्य होती है। सीमा पर यदि किसी प्रहरी के सोने से बीस जवानो की जान चली जाती है तो यह गलती क्षमायोग्य नही है। जो गलती अनजाने में हो जाये वो क्षमायोग्य है। पर जो गलती सब […] Read more » अरविन्द केजरीवाल
राजनीति दिल्ली का दंगल : दिल्ली में जो देखा – सुना February 5, 2015 by आलोक कुमार | Leave a Comment आज की तारीख में मीडिया के लगभग सभी माध्यम आम आदमी पार्टी को दिल्ली के चुनाव में बढ़त हासिल करते हुए दिखा-बता रहे हैं, चुनावी – सर्वे का बाजार ‘गर्म’ है l लेकिन जैसा अंतर इन आकलनों में बताया जा रहा है नतीजे वैसे ही होंगे इसमें मुझे संदेह है ! इन सर्वेक्षणों के संदर्भ में ही अगर बात करूँ […] Read more » दिल्ली का दंगल दिल्ली में जो देखा – सुना
राजनीति कांग्रेस में तू चल मैं आया का दौर February 4, 2015 by सुरेश हिन्दुस्थानी | 1 Comment on कांग्रेस में तू चल मैं आया का दौर सुरेश हिन्दुस्थानी वर्तमान में भयंकर निराशा के दौर से गुजर रही कांग्रेस में धुरंधर कांग्रेसियों में तू चल मैं आया का खेल प्रारंभ हो गया है। कोई कांग्रेसी आज पार्टी छोड़कर कहीं जाता है, तो अगले ही दिन किसी दूसरे कांग्रेसी नेता के बारे में कयास लगना प्रारंभ हो जाते हैं। कांग्रेस के लिए इस […] Read more » कांग्रेस तू चल मैं आया