Category: विविधा

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सच्चाई को समझें भारतीय मुसलमान

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सबसे बड़ा सत्य तो यह है कि भारत और पाकिस्तान में निवास करने वाले मुसलमान के पूर्वज पहले हिन्दू ही थे। अगर वे इतिहास उठाकर देखेंगे, तो उन्हें इस सच्चाई का पता चल जाएगा। वैसे भारत के कई मुसलमान आज भी इस सत्य को बेहिचक स्वीकार करने का साहस दिखाते हैं। यह भी सच है कि दुनियाभर में जितने भी मुसलमान निवास करते हैं, उनमें सबसे ज्यादा सुरक्षित भारत में ही हैं। आज कुछ मुसलमान संदेह की दृष्टि से देखे जा रहे हैं, उसके पीछे भी सबसे बड़ा कारण स्वयं मुसलमान ही हैं।

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गौरक्षा एवं भक्ति हिंसक क्यों?

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देश में समय-समय पर गौहत्या के विरोध में आन्दोलन हुए हैं। 1967 में गौ-हत्या को लेकर उग्र आन्दोलन हुआ, संसद भवन को साधु-सन्तों ने घेरा था तो पुलिस ने उन पर बल प्रयोग किया था और लाठी-गोलियां भी चलाई थीं। तत्कालीन गृहमन्त्री स्व. गुलजारी लाल नन्दा को इस्तीफा देना पड़ा था। तत्कालीन इन्दिरा सरकार ने भारत की सांस्कृतिक एवं धार्मिक आस्था से जुड़े इस मसले को गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। क्योंकि गाय भारत की आत्मा है, जन-जन की आस्था का केन्द्र है।

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गौ-रक्षा का बदनाम होता उद्देश्य

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गौ-हत्या पर रोक का कानून बनता है तो दुध का उत्पादन तो बढ़ेगा ही, जैविक खाद से खेती भी होने लग जाएगी। फिलहाल देश में दुग्ध उत्पादन में कमी अनुभव की जाने लगी है। जिसकी भरपाई नकली दूध से की जा रही है। जो नई-नई बीमारियां परोसने का काम कर रहा है। दूध की दुनिया में सबसे ज्यादा खपत भारत में है। देश के प्रत्येक नागरिक को औसतन 290 गा्रम दूध रोजाना मिलता है। इस हिसाब से कुल खपत प्रतिदिन 45 करोड़ लीटर दूध की हो रही है। जबकि शुद्ध दूध का उत्पादन करीब 15 करोड़ लीटर ही है। मसलन दूध की कमी की पूर्ति सिंथेटिक दूध बनाकर, यूरिया और पानी मिलाकर की जा रही है। दूध की लगातार बढ़ रही मांग के करण मिलावटी इस दूध का कारोबार गांव-गांव फैलता जा रहा है।

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दशकों से बंद है बुन्देलखण्ड की इकलौती ग्लास फैक्ट्री

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सन 2004 में मुलायम सिंह यादव की सरकार में आदित्य बिरला इस फैक्ट्री को नीलामी में खरीदना चाहते थे लेकिन मुलायम सिंह से आदित्य की नह बनी । बाद में मायावती इस फैक्ट्री को 15% में बेंचना चाहती थी मगर आदित्य बिरला अब फैक्ट्री खरीदने के लिए राजी नही हुए । तब से आज तक बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री इन पूर्ववर्ती यूपी सरकारों की नाकामी पर इन्हें कोश रही है । इन नेताओं ने बुन्देलखण्ड को खूब ठगा है और देश तथा प्रदेश की जनता को भी खूब लूटा है । इनका कभी भला होने वाला नही है ।इस ग्लास फैक्ट्री के बन जाने से बुन्देलखण्ड के लगभग 20 हजार युवाओं को रोजगार मिलता लेकिन ऐसा हुआ ही नही ।

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जीवन के अलौकिक संकेत प्रतीक व बिम्ब

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पूरी तरह से खिले हुए फूल को प्रस्फुटित फूल कहा जाता है। देखने में बहुत प्यारा तथा मन को आनन्दित करता हैं परन्तु उसका दर्द दूसरा कोई नहीं समझता है। किसी को उसकी वेदना का आभास भी शायद ना होता हो। माली पुजारी नारी या युवा ? यहां तक कि उसे माध्यम बनाकर पे्रम का इजहार करने वाले अपने लक्ष्य को साध लेते हैं पर वे प्रस्फुटित फूल कीवेदना को शायद ही समझ पाते हों या समझना चाहते हों।

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महाबलीपुरम के संगतराश

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नक्काशीकार और सीप का सामान बेचने वाले दुकानदार रामाचन्दरन के अनुसार ''महाबलीपुरम के तट पर सौ से अधिक पत्थर और सीप के सामान की दुकानें हैं। मछुआरों से सीप ख़रीदकर एसिड से उसकी सफाई करते हैं। इसके बाद चाभी का छल्ला, झुमर और अन्य श्रृंगार के सामान बनाते हैं। इसके अलावा कुछ सामान हम आगरा से भी मंगवाते हैं, लेकिन दुकानदारी कभी होती है, कभी बिल्कुल नहीं। ऐसा भी हुआ कि पूरे पूरे दिन न कोई पत्थर का सामान बिका और न ही सीप का। हैरानी तब होती है जब घरेलू पर्यटकों की तरह विदेशी पर्यटक भी मोलभाव करते हैं और विदेशी समझते हैं कि भारतीयों ने जो कीमत तय किया है, वह उचित नहीं हालांकि ऐसी कोई बात नहीं हमारी कड़ी मेहनत का उन्हें सही अनुमान नहीं होता। ''

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