Category: विविधा

विविधा

अयोध्या मे भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिये आना चाहिये मुस्लिमों को आगे

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भगवान श्रीराम चंद्र जी के जीवन से सभी को भक्तिभाव के पथ पर चलने की सीख लेनी चाहिए और मर्यादा का पाठ सीखना चाहिए। भगवान श्रीराम चंद्र जी ने अपने जीवन का उद्देश्य अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करना बताया, इसीलिए भगवान विष्णु ने सातवें अवतार के रूप में अयोध्या में जन्म लिया और दुष्ट रावण का वध कर उसके पापों से लोगों को मुक्ति दिलाई। भगवान राम के जीवन से हमें एक बेदाग और मर्यादा पूर्ण जीवन जीने की सीख मिलती है।

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टेक्नोलॉजी विविधा

शारीरिक अक्षमताओं की चुनौतियों पर खरा उतरते कृत्रिम हाथ-पैर और रोबोटिक अंग

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त्वचा की तरह कवर से ढंके होने के कारण ये दिखने में भी वास्तविक लगते हैं। हाथ व पैर वाले अधिकांश कृत्रिम अंगों में अनुलग्नकों की आवश्यकता होती है। आजकल इसी पर आधारित ओसिओ-एकीकरण नामक अस्थि-संयोजन प्रक्रिया का काफी उपयोग किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में अस्थिमज्जा में कृत्रिम अंग को प्रत्यारोपित कर जैविक प्रतिक्रिया का संचालन कराया जाता है। इस तरह जैव संगत प्रत्यारोपण द्वारा बाहरी कृत्रिम अंग और भीतरी जीवित ऊतक के मध्य इंटरफेस जैव गतिविधि के माध्यम से एक सशक्त व दीर्घावधिक स्थायी संबंध जैव एकीकरण से स्थापित किया जाता है।

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विविधा

उद्योगों के लाभ से ज्यादा जरूरी है मानव स्वास्थ्य

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वाहन प्रदूषण की वजह से लोगों में गला,फेफड़ें और आंखों की तकलीफ बढ़ रही हैं। कई लोग मानसिक अवसाद की गिरफ्त में भी आ रहे हैं। हालांकि हवा में घुलता जहर महानगरों में ही नहीं छोटे नगरों में भी प्रदूषण का सबब बन रहा है। कार-बाजार ने इसे भयावह बनाया है। यही कारण है कि लखनऊ, कानपुर, अमृतसर, इंदौर और अहमदाबाद जैसे शहरों में भी प्रदूषण खतरनाक स्तर की सीमा लांघने को तत्पर है। उद्योगों से धुंआ उगलने और खेतों में बड़े पैमाने पर औद्योगिक व इलेक्ट्रोनिक कचरा जलाने से भी इन शहरों की हवा में जहरीले तत्वों की सघनता बढ़ी है। इस कारण दिल्ली दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल है। वैसे भी दुनिया के जो 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहर हैं,उनमें भारत के 13 शहर शामिल हैं।

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कला-संस्कृति विविधा

अयोध्या राम की जन्मस्थली मात्र नहीं आदर्शों की विरासत है !

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विरासतें इतिहास के संरक्षण के लिए होती हैं, कल जब आपकी अगली पीढ़ी पूछेगी ये राम कौन थे? कहाँ रहते थे? तब आपके पास किताबों के उत्तर सम्भवतः हों लेकिन दर्शन हेतु कुछ नहीं होगा, हालांकि ये किताबी ज्ञान भी धीरे धीरे विलुप्त हो जायेगा, फिर कैसा ज्ञान और कैसे राम! हम कितने ही विलुप्त इतिहास के गवाह हैं जो अब किसी पन्ने तक में दर्ज नहीं । आज जो आख्यान हम किताबों में पढ़ते हैं और जब उन्हें देखने की जिज्ञाशा होती है किसी म्यूजियम में उनके होने का एहसास करने का प्रयास करते हैं लेकिन राम को हम कहाँ पायेंगे? किस अयोध्या को रामराज का साक्षी बतायेंगे ?

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कला-संस्कृति विविधा

राम और रामराज्य

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गांधीजी कहते थे- ‘‘अपराधी से नहीं अपराध से घृणा होनी चाहिये।’’ कितना भी बड़ा अपराध क्यों न हो, उसे एहसास करनें वाला, लज्जित होने वाला अपराध का परिमार्जन कर देता है। निश्चित रूप से अपराधबोध से ग्रस्तव्यक्ति का व्यक्तित्व भी विभाजित होगा और ऐसे व्यक्ति एक आदर्श समाज बनाने मे सहायक नहीं हो सकते। श्री राम को यह बात अच्छी तरह पता है। यद्यपि सत्ता के लिये निकटतम सम्बंधियों की हत्याओं से इतिहास भरा पड़ा है। मुस्लिमों की परम्पराओं पर इस सम्बंध में अलग से कुछ कहने की जरूरत नहीं है। वहीं सिंहासन की जगह वनवास दिलाने वाली कैकेयी को श्री राम लज्जित समझकर सबसे पहले उसी से मिलकर उसे अपराध बोध से मुक्त कराते हैं। इस तरह से श्रीराम जैसे उदात्त दृष्टि वाले शासक अथवा अग्रणी व्यक्ति होंगे, तभी इस धरती पर रामराज्य संभव है।

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