विविधा ताकि अगली पीढ़ी जीवित रह सके। April 19, 2017 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment 22 अप्रैल 1970 से इस दिन की शुरुआत हुई। तब से पूरा विश्व इस दिन को बड़ी गंभीरता से मनाता है। जगह जगह पर वृक्षारोपण करना, स्कूल-कॉलेज के विद्धाथिर्यों द्वारा पर्यावरणीय मुद्दों पर वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना, सेमिनार का आयोजन करना, सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा नुक्कड़ नाटक के जरिये पर्यावरण की रक्षा हेतू लोगो को प्रोत्साहित करना, प्लास्टिक तथा कीटनाशक के दुष्प्रभाव के प्रति लोगो को जागरुक करना इत्यादि इस दिन के क्रियाकलापों में से हैं। Read more » पीढ़ी
विविधा दवाइयों में लूट-पाट बंद करें April 19, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment तो ये ठप्पेदार (ब्रांडेंड) दवा इतनी मंहगी कैसे बिकती है? इसके पीछे पूरा षडयंत्र होता है। इन दवाओं को बनाने वाली कंपनियां इनके विज्ञापनों पर करोड़ों रु. खर्च करती हैं। डाक्टर सिर्फ इन्हीं दवाओं को लिख कर दें, इसके लिए उन्हें नगद कमीशन मिलता है, मुफ्त दवाइयां मिलती हैं, मुफ्त विदेश-यात्राएं मिलती हैं, बहुत मंहगे तोहफे मिलते हैं, उनके बच्चों को विदेशों में पढ़ाने की सुविधाएं मिलती हैं। Read more » ‘दाम बांधों’ नीति दवा दवाइयों में लूट दवाइयों में लूट-पाट दवाओं पर ‘दाम बांधों’ नीति
विविधा गांधीवाद की परिकल्पना -4 April 19, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment जहां तक उनकी अहिंसा नीति का प्रश्न है तो इस गांधीवादी अहिंसा की तो परिभाषा ही बड़ी विचित्र है। यदि एक ओर उन्होंने अपनी पत्नी को डॉक्टर से इंजेक्शन न लगवाने का कारण इसमें हिंसा होना बताया था तो दूसरी ओर उनकी अहिंसा का हृदय हिंदू हत्याओं की हो रही भरमार को भी देखकर कभी पिघला नहीं। अपितु मुस्लिमों के हाथों मरने के लिए उन्हें अकेला छोड़ दिया गया। हमारी अनाथ और असहाय माताओं, बहनों और ललनाओं पर किये गये मुस्लिमों के अमानवीय अत्याचारों को देखकर भी उनका हृदय द्रवित नही हुआ था, क्या इसलिए कि वे अहिंसा प्रेमी थे? Read more » Featured असहयोग आंदोलन गाँधीजी गांधीजी और असहयोग आंदोलन गाँधीवाद गांधीवाद की परिकल्पना
विविधा गांधीवाद की परिकल्पना – 3 April 19, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राष्ट्र की युवा पीढ़ी बुद्घिजीवी और निर्माणात्मक सोच के अच्छे लोग गांधीवादियों से ऐसा पूछें-यह आज की राजनीति का यक्ष प्रश्न है, अन्यथा गांधीवाद का यह रामराज्य का कथित सपना इस राष्ट्र को बहुत देर तक छलता रहेगा। क्योंकि गांधीजी के कुछ आदर्शों की हत्या करके भी कुछ लोग उन्हें मात्र इसलिए जीवित रखना चाहते हैं कि उनके आदर्शों के नाम पर उनकी राजनीतिक दुकानदारी चलती रहे। अब यह इस देश की जनता को देखना है कि वह इन राजनीतिक नायकों के झांसे में कब तक और कहां तक आती है? वास्तव में गांधीजी का रामराज्य का सपना भी उनका मौलिक चिंतन नहीं था। Read more » कमीशन की राजनीति Featured गाँधीवाद गांधीवाद की परिकल्पना परिकल्पना
विविधा गांधीवाद की परिकल्पना – 2 April 18, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गांधीवाद समस्या की इस जड़ को सदैव बनाये रखना चाहता है। गांधीवादी विचारधारा के ध्वजवाहक नेहरू जी ने भारी उद्योगधंधों का प्रचलन भारत में किया। इससे लाखों करोड़ों लोगों के परम्परागत काम धंधे यथा लुहार, बढ़ई, चर्मकार, जुलाहा आदि बेरोजगार हो गये। कुछ लोगों को रोजगार मिला तो आनुपातिक दृष्टिकोण से बहुत से लोगों का धंधा छिना भी-अर्थात वे बेरोजगार हुए। बड़े उद्योगों के स्थान पर लघु उद्योगों और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाता तो हमारी सामाजिक स्थिति आज कुछ दूसरी ही होती। Read more » Featured गाँधीवाद गांधीवादी परम्परा
विविधा कोश परम्परा : सिंहावलोकन April 18, 2017 by डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री | Leave a Comment डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री, 0.0 मानव सभ्यता के विकास में भाषा का विशेष स्थान है और भाषा के विकास में कोशों का विशेष स्थान है । कोश परंपरा का सिंहावलोकन करते हुए हिंदी से संबंधित कुछ कोशों का संक्षिप्त इतिहास यहाँ प्रस्तुत है । 0 .1 कोश बनाम कोष : सबसे पहले इस शब्द की वर्तनी […] Read more » कोश का उद्गम कोश का विकास कोश परंपरा कोश परंपरा का सिंहावलोकन कोश बनाम कोष सिंहावलोकन
विविधा गांधीवाद की परिकल्पना April 18, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  ‘भारत नेहरू-गांधी का देश हो गया है।’ तथा इसकी विचारधारा गांधीवादी हो गयी है। ये विशेषण है जो हमारे कर्णधारों ने विशेषत: स्वतंत्र भारत में उछाले हैं। वास्तव में सच ये है कि इन विशेषणों के माध्यम से देश को बहुत छला गया है। वाद क्या होता है? हमें कभी ये […] Read more » Featured what is gandhiwad? गाँधीवाद
विविधा आइये, संजो लें विरासत के ये निशां April 18, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment आंकङों से इतर विरासत का वैश्विक पक्ष चाहे जो हो, भारतीय पक्ष यह है कि विरासत सिर्फ कुछ परिसंपत्तियां नहीं होती। बाप-दादाओं के विचार, गुण, हुनर, भाषा, बोली और नैतिकता भी विरासत की श्रेणी में आते हैं। संस्कृृृृृति को हम सिर्फ कुछ इमारतों या स्थानों तक सीमित करने की भूल नहीं कर सकते। भारतीय संास्कृतिक विरासत का मतलब 'अतिथि देवो भवः' और 'वसुधैव कुटुम्बकम' से लेकर 'प्रकृति-माता, गुरु-पिता तक है। गौ, गंगा, गीता और गायत्री आज भी हिंदू संस्कृति के प्रमुख निशान माने जाते हैं। Read more » Featured world heritage day विश्व विरासत दिवस
विविधा देश निर्णय करे April 18, 2017 / April 18, 2017 by मृदुल श्रीवास्तव | Leave a Comment वर्तमान में सेकुलरिज्म की परिभाषा को कुछ विकृत मानसिकता के लोगों द्वारा विकृति कर दिया गया है, अब #सेकुलरिस्म शब्द दिखते ही जेएनयू से पूछने वाली भारत विरोधी नारे,एक आतंकी के जनाजे में शरीक 18000 लोग, भगवान श्री कृष्ण के प्रति कुंठा व्यक्त करते हुए विकृत लोग, एक आतंकवादी का पक्ष लिए सुप्रीम कोर्ट में फरियाद के लिए पहुंचे लोगों की ही छवि उभरकर सामने आती है यह वही लोग हैं जो होली और दीपावली को पर्यावरण के लिए दोषी मानते हैं और जीव हत्या इन्हें इको फ्रेंडली लगती है Read more » Featured कश्मीर में पत्थरबाज स्टोन पेल्टर कश्मीर
विविधा टूरिज्म पर टैरेरिज्म हावी क्यों April 17, 2017 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment अगर पत्थर बाज अपने देश के लिए पत्थर फेंक रहे हैं तो हमारे जवान किसके लिए पत्थर और गोलियाँ खा रहे हैं? अगर देश को पत्थर बाजों को समझने की जरूरत है तो क्या आपको देश और जवानों के सब्र को समझने की जरूरत नहीं है? अबदुल्ला साहब का कहना है कि आप लोगों को देश की परवाह है लेकिन पत्थर बाजों की नहीं तो क्या आप पत्थर बाजों को इस देश का हिस्सा नहीं मानते? हाल के चुनावों में वो कौन लोग थे जिन्होंने बन्दूक की नोंक पर कश्मीरी आवाम को वोट डालने से रोका? कश्मीर का युवा हाथ में बन्दूकें या पत्थर लेकर इस मुद्दे का हल चाह रहे हैं ? Read more » Featured Terrorism in Kashmir tourism in Kashmir टूरिज्म टैरेरिज्म
विविधा आखिर कब जड़ेगा उत्तर प्रदेश में “मधुशाला पर ताला”?? April 17, 2017 / April 17, 2017 by अपूर्व बाजपेयी | Leave a Comment अवैध धंधो की तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी की नजर टेढ़ी होते ही महिलाओं ने भी शराब बंदी का पुरजोर समर्थन , कहीं तोड़फोड़ तो कहीं मारपीट से किया. उन महिलाओं की नजर में यह एक ऐसा जहर है जो पूरे परिवार की खुशियों को उनसे छीन रहा है पर वर्तमान परिदेश्य के मुताबिक अब सरकार को शराब बंदी की अच्छाइयों के प्रति समाज में जागरूकता फ़ैलाने की आवश्यकता है. स्कूल कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित कर इससे होने वाली परेशानियों से अवगत कराने की जरूरत है तभी इस धीमे जहर से कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है . Read more » मधुशाला मधुशाला पर ताला शराब बंदी शराब बंदी का पुरजोर समर्थन
विविधा लद्दाख के कचरा प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका April 17, 2017 / April 17, 2017 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment इस बारे में 47 वर्षीय गृहिणी जेरिंग डोल्मा जो अमा सोग्स्पा की सदस्य हैं उन्होंने बताया कि “वे कचरे को अलग किए बिना ही इकट्ठा करती हैं और जलाती हैं। क्या वह स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर कचरे को अंधाधुंध जलाने के प्रभावों को जानती हैं? पूछने पर उन्होने कहा 'नहीं'। वह वास्तव में यह जानकर अचरज में थी कि प्लास्टिक जलाने पर खतरनाक रासायनिक पदार्थों का उत्सर्जन होता है। Read more » लद्दाख लद्दाख के कचरा प्रबंधन