Category: विविधा

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जलमंत्री कपिल मिश्रा को भी लगा राजरोग

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गौरतलब है कि पिछले साल श्री श्री रविशंकर की अगुवई में दिल्ली में विश्व सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया था। यह आयोजन मयूर फेज वन के सामने यमुना डूब क्षेत्र पर हुआ था। इसे लेकर यमुना जियो अभियान के श्री मनोज मिश्र ने राष्ट्रीय हरित पंचाट में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। आपत्तियों को महत्वपूर्ण मानते हुए हरित पंचाट ने आयोजकों को दोषी करार दिया था और एक विशेषज्ञ समिति को यह जिम्मा सौंपा था कि वह आकलन कर बताये कि यमुना पारिस्थितिकी को कितना नुकसान हुआ है और उसकी भरपाई में कितना खर्च व वक्त लगेगा। विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता भारत सरकार के जलसंसाधन मंत्रालय के सचिव शशिशेखर को सौंपी गई थी।

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“नागरिकों की सुरक्षा का प्रश्न” ….?

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पिछले माह हमारे सेनानायक जनरल विपिन रावत ने अपने एक संदेश में स्पष्ट कहा था कि "जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बल ज्यादा हताहत इसलिए हो रहें है क्योंकि 'स्थानीय लोग' उनके अभियान में बाधा डालते है और कई बार आतंकवादियों को भगाने में भी मदद करते है।'" इसके साथ ही उन्होंने अपने कड़े संदेश में स्थानीय कश्मीरी लड़कों को चेतावनी भी दी थी कि "जिन लोगों ने हथियार उठाये है और इस्लामिक स्टेट व पाकिस्तान के झंडे लहराकर आतंकवादी कृत्य करते है तो हम उनको राष्ट्रविरोधी तत्व मानेंगे और उनको पकड़ कर उन पर कड़ी कार्यवाही होगी ।" इस साहसिक बयान पर नेताओं समेत अनेक तथाकथित बुद्धिजीवियों की आलोचनाभरी नकारात्मक टिप्पणियां आयी थी।

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आर्थिकी राजनीति विविधा

राष्ट्रीय विकास में युवाओं की भूमिका सुनिश्चित करता भारत का युवा कौशल विकास मिशन

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आजकल देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों तथा सभी व्यावसायिक व तकनीकी स्कूलों और पोलिटेक्निक व अन्य व्यावसायिक कॉलेजों में युवा कौशल विकास के लिए अध्ययन प्रवर्तन उद्यमों से लेकर अनेक औपचारिक एवम् अनौपचारिक प्रशिक्षणों द्वारा स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए ई-लर्निंग और वेब-आधारित तथा दूरस्थ अध्ययन आधारित कौशल विकास प्रशिक्षणों की सुविधाएं दी जा रही हैं।

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विधि-कानून विविधा शख्सियत

बाबासाहेब – एक अनुकरणीय व्यक्तित्व

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पूना पैक्ट की पीठ तक की यात्रा तक में बाबा साहेब भारत की एक बड़े दलित राजनैतिक केंद्र और संस्था के रूप में स्थापित हो चुके थे. ब्रिटिशर्स और गांधी दोनों के ही प्रति जातिगत व्यवस्थाओं में परिवर्तन को लेकर उदासीनता को लेकर वे खिन्नता प्रकट करते थे. दलितों और अछूतों की स्वतंत्र राजनैतिक परिभाषा और पहचान को लेकर वे संघर्ष को तीक्ष्ण कर रहे थे उस दौर में बाबा साहेब ने गांधी के प्रति यह नाराजगी भी प्रकट किया था कि वे दलितों को हरिजन कहनें के पीछे जिस प्रकार का भाव प्रकट करते हैं उसमें दलित देश में एक करुणा मात्र की वस्तु बन कर रह गएँ हैं.

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विविधा

कश्मीर में पैलेट गन क्यों नही…

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जबकि यह सर्वविदित ही है कि वर्षो से कश्मीर घाटी में अलगाववादियों व आतंकवादियों द्वारा प्रति लड़के/युवक को 500 से 1500 रुपये तक देकर सुरक्षाबलों पर हमले करवायें जाते आ रहे है। परिणामस्वरूप अनेक सुरक्षाकर्मी मारे भी गये और साथ ही सरकारी संपत्तियों की भी भारी क्षति हुई है। पिछले कुछ वर्षों के अतिरिक्त भी जुलाई 2016 में आतंकी बुरहानवानी के मारे जाने के बाद इन पत्थरबाजों की टोलियों ने कई माह तक विशेषतौर पर दक्षिण कश्मीर में सामान्य जनजीवन को ही बंधक बना दिया था।

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