Category: विविधा

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घर का जोगी जोगड़ा

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- 1967 में लोक नायक राम मनोहर लोहिया के गैर कांग्रेसवाद के नारे के परिणाम स्वरूप कई प्रदेशों में संयुक्त सरकारें बनीं. बाद में कांग्रेस के भी इंडिकेट-सिंडिकेट में दो टुकड़े हो गए. मगर अपने अपूर्व साहस, कल्पनाशीलता और समाजवादी आग्रहों से इन्दिरा गांधी ने कांग्रेस को फिर से नयी जान भरना शुरू कर दिया था. इन्दिरा गांधी ने अपने समय में प्रादेशिक छत्रपों को कभी उभरने नहीं दिया गया था और सत्ता को काफी हद तक केन्द्रीकृत कर रखा था. धीरे-धीरे कांग्रेस नेहरू-गांधी परिवार की विरासत बन गई.नेहरू-गांधी परिवार का नेतृत्व ही वह आंचल साबित हुआ जो कांग्रेसियों को आपस में जोड़कर रखता रहा है

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राम मंदिर सहमति से हल की उम्मीद ?

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हालांकि पुरातत्वीय सक्षों, निर्मोही अखाडे़ और गोपाल सिंह विशारद द्वारा मंदिर के पक्षपक्ष में जो सबूत और शिलालेख अदालत में पेश किए गए थे, उनसे यह स्थापित हो रहा था कि विंध्वस ढांचे से पहले उस स्थान पर राममंदिर था। जिसे आक्रमणकारी बाबर ने हिन्दुओं को अपमानित करने की दृष्टि से शिया मुसलमान मीर बांकी को मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाने का हुक्म दिया था। मस्जिद के निर्माण में चूंकि शिया मुसलमान मीर बांकी के हाथ लगे थे, इस कारण इस्लामिक कानून के मुताबिक यह शिया मुसलमानों की धरोहर था। इसकी व्यवस्था

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जन्मभूमि का नजराना देकर नजीर पेश करे मुस्लिम समाज

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भारतीय मुस्लिमों के समक्ष भी उच्चतम न्यायालय के समझौते के आग्रह के बाद एक बड़ा महत्वपूर्ण व एतिहासिक अवसर बनकर आया है. भारतीय मुस्लिमों को यह बात विस्मृत नहीं करना चाहिए कि बाबर (जिसके नाम पर वह बदनुमा दाग रुपी बाबरी मस्जिद थी) महज एक विदेशी आक्रमणकारी व लूटेरा था. भारतीय मुस्लिमों की रगों में बाबर का खून नहीं बल्कि उनके भारतीय (पूर्व हिन्दू) पुरखों का रक्त बहता है.

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नदियों के नागरिक अधिकार

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कायापलट के बाद साबरमती की तुलना अब लंदन की टेम्स और सिंगापुर की सिंगापुर नदी से की जाने लगी है। ये दोनों नदियां कभी नालें में तब्दील हो चुकी थीं, लेकिन अब नदियों का ही रूप ग्रहण कर लिया है। साबरमाती की सफाई मुहिम के नतीजतन इसका जो कायापलट हुआ है, उसकी मिसाल विकसित देशों की सफल परियोजनाओं के बरक्ष पेश की जाने लगी है। 1152 करोड़ के रिवर फ्रंट योजना की बदौलत यह परिवर्तन संभव हुआ अब अहमदाबाद के बीचोंबीच करीब 10.5 किमी की लंबाई में बहने वाली इस नदी में साफ पानी लबालब भरा रहता है।

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खुशियों के देश !

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धर्म में रूढ़ि और आडंबर को प्रचारित किया जा रहा है। जबकि खासतौर से सनातन धर्म अध्यात्म और विज्ञान का अद्भुत समन्वय है, जिसे आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में कम ही परिभाषित किया जा रहा है। मानव-शरीर सरंचना के परिप्रेक्ष्य में विज्ञान की पहुंच केवल अस्थि-मज्जा के जोड़ और जैविक रसायनों के घोल तक सीमित है। जबकि मानव शरीर महज जैविक रसायनों का संगठन भर नहीं है, बल्कि उसकी अपनी मनोवैज्ञानिक एवं उससे भी इतर आध्यात्मिक सत्ता भी है, जो मानसिक स्तर पर मानवीय चेतना एवं व्यक्तित्व विकास का प्रमुख आधार तत्व है।

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