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दम तोड़ती भारत की जीवित जीवनदायिनी मैया यमुना

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इसका बड़ा कारण यह है कि दिल्ली के करीब 50 फीसद इलाकों में सीवर नेटवर्क नहीं है। जल बोर्ड के सीवरेज शोधन संयंत्रों की क्षमता करीब 604 एमजीडी है, लेकिन प्रतिदिन करीब 450 एमजीडी सीवरेज शोधित हो पाता है। जल बोर्ड ने 1962 करोड़ रुपये की लागत से इंटरसेप्टर सीवर लाइन का निर्माण वर्ष 2011 में शुरू कराया था। अभी तक इसका एक पैकेज पूरा हुआ है। इसके पांच पैकेजों का काम अधूरा है। इसके अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर छोटे नालों के गंदे पानी के शोधन के लिए 14 सीवरेज शोधन संयंत्र लगाने की योजना बनी थी।

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नदी जीवंतता को मिला अदालती आधार

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योगेन्द्र नाथ नसकर बनाम आयकर आयुक्त कोलकोता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था कि हिदुओं की देव प्रतिमायें न्यायाधिकार धारण करने की क्षमता रखने वाली सत्ता हैं। इसलिए समाज की आस्था और उसकी मान्यता की रक्षा करने के लिए गंगा और यमुना को जीवित व्यक्ति या न्यायाधिकार प्राप्त व्यक्ति के रूप मेें घोषित करने की ज़रूरत है। नदियों की जीवंतता को संवैधानिक दर्जा दिलाने के विचार और मांग की पूर्ति का संकल्प पहली बार तब सार्वजनिक हुआ, जब वर्ष 2013 के इलाहाबाद कुंभ के दौरान ’गंगा संसंद आयोजित की गई।

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विविधा

गंगा-यमुना मैया को जीवित मानव जैसा अधिकार मिला

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न्यायालय ने आठ सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को गंगा मैनेजमेंट बोर्ड बनाने का आदेश भी दिया है। यह महत्वपूर्ण एवं दूरगामी आदेश हरिद्वार निवासी मोहम्मद सलीम नामक व्यक्ति की एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति श्री राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति श्री आलोक सिंह की संयुक्त खंडपीठ ने जारी किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पूर्व सुनवाई में केंद्र सरकार को पांच दिसंबर तक गंगा मैनेजमेंट बोर्ड बनाए जाने के निर्देश दिए गए थे। पिछले साल पांच दिसंबर को कोर्ट ने तीन माह के भीतर गंगा प्रबंधन बोर्ड बनाने व परिसंपत्तियों का बंटवारा करने के आदेश पारित किए थे। अभी तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया है।

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पर्यावरण विविधा सार्थक पहल

यमुना का प्रदूषण और उमा भारती के प्रयास

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उमा भारती के अनुसार उन्होंने यमुना के लिए जो प्लान किया है उसमे दिल्ली से गंदा पानी अब मथुरा में नहीं आ पायेगा। नमामि गंगे प्रोजेक्ट में दिल्ली से आने वाला गंदा पानी ट्रीट होकर मथुरा की यमुना नदी में शुद्ध होकर आयेगा। जिसके लिए दिल्ली में भी कई प्रोजेक्ट्स को पहले ही लांच किया जा चुका है। इसके अलावा उमा भारती ने दिल्ली में यमुना को हाइब्रिड एन्यूटी पर ले जाकर पूरी की पूरी यमुना और उसके घाटों को ठीक करने की बात कही है। अगले चरण में आगरा की यमुना नदी को भी इस योजना का हिस्सा बनाने की बात की गयी है।’’ अब आगे देखने वाली बात होगी कि केंद्रीय मंत्री उमा भारती यमुना का कितना जीर्णोद्धार या कायाकल्प कर पाती हैं।

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बर्लिन अकादमी:*आदर्श-भाषा-स्पर्धा-(१७९४)* का इतिहास

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भाषा, उसके प्रयोगकर्ताओं की मानसिकता का दर्पण होता है। उस में, उस भाषा के प्रयोग-कर्ताओं का, बौद्धिक एवं नैतिक सार व्यक्त होता है। संक्षेप में, जंगली भाषाएं स्थूल और रूक्ष, होती हैं; और सभ्य भाषाएँ कोमल, और परिमार्जित होती है। (२)आगे कहता है, *क्षण-विशेष की माँग के अनुरूप अर्थ व्यक्त करने की क्षमता भाषा में होनी चाहिए। * उसी प्रकार *सूक्ष्म भाव एवं विचारों को भी अभिव्यक्त करे ऐसी भाषा ही आदर्श भाषा का पद प्राप्त कर सकती है।* (३) येनिश भाषा के चार गुण गिनाता है।

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विविधा

ऋषि-द्वय कह गए दुनिया से,युग-परिवर्तन नियति की नीयत है

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दोनों उच्च कोटि के पत्रकार-सम्पादक थे । अंग्रेजी शासन के विरूद्ध अरविन्द अंग्रेजी में ‘वन्देमातरम’ निकालते थे , तो श्रीराम हिन्दी में ‘सैनिक’ । किन्तु बाद में किसी दिव्यात्मा के सम्पर्क से दोनों योग-साधना के बदौलत चेतना के उच्च शिखर पर पहुंच कर दैवीय योजना के तहत अपनी-अपनी भूमिका को तदनुसार नियोजित कर राष्ट्रीय चेतना जगाने-उभारने के आध्यात्मिक उपचार में संलग्न हो गए ।

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विविधा सार्थक पहल

बिहार की ग्राम कचहरी का एक प्रत्यक्ष अनुभव

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बिहार के सन्दर्भ में ग्राम कचहरी में अब तक जो विवाद दाखिल हुए है और जिन पर कार्यवाही हुई है उनके सम्बन्ध में अब तक हुए अध्ययनों से जो तथ्य निकलते है उसमें जमींन सम्बन्धी विवाद 58% तथा घरेलु विवाद 20% है | इसमें से 85% विवाद दलित एवं पिछड़े वर्ग से सम्बंधित है | बिहार में ग्राम कचहरी में आये हुए इन विवादों का 90% हिस्सा समझौते के द्वारा तय हुआ है | अन्य 10% में 100 से 1000 रूपये तक का जुर्माना लगाया गया है | ज्यादातर मामलों में दोषी ने सहज रूप से जुर्माना भरा है | लगभग 03% विवाद ही ऊपर की अदालतों में अपील हेतु गए है |

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