लेख अब तो बेरोजगारी की भयावह तस्वीर बदलें

अब तो बेरोजगारी की भयावह तस्वीर बदलें

– ललित गर्ग- दुष्यंत कुमार ने कहा था-हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।’ देश में बेरोजगारी…

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धर्म-अध्यात्म सृष्टिकर्ता ईश्वर सबसे महान है, उससे महान कोई नहीं

सृष्टिकर्ता ईश्वर सबसे महान है, उससे महान कोई नहीं

मनमोहन कुमार आर्य                 बुद्धिमानों व विद्वानों में एक प्रश्न यह भी हो सकता है कि संसार में सबसे महान कौन है? इसका सभी आस्तिकों…

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समाज भारतीय मूल्यों की रक्षार्थ…

भारतीय मूल्यों की रक्षार्थ…

यह कितना दुःखद है कि घृणित साम्प्रदायिक उन्माद की मानसिकता से ग्रस्त मुसलमान निरंतर देश में कहीं न कहीं मासूम हिन्दू बच्चियों की दुष्कर्म करके…

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राजनीति सावधानःआपके मकान-जमीन पर है भू-माफियाओं की नजर

सावधानःआपके मकान-जमीन पर है भू-माफियाओं की नजर

संजय सक्सेना लखनऊ का मंिड़यांव, हसनगंज, रायबरेली रोड से लेकर कानपुर और सुलतानपुर रोड तक का इलाका इन अपराधियों और दबंगों का अड्डा बन चुका…

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विविधा जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु अवश्य होगी

जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु अवश्य होगी

-मनमोहन कुमार आर्य                हम शरीर नहीं अपितु एक चेतन आत्मा है जो अत्यन्त अल्प परिमाण वाला है। हमारा आत्मा अत्यन्त सूक्ष्म एवं अदृश्य है।…

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लेख मानव धर्म और मनुस्मृति

मानव धर्म और मनुस्मृति

राकेश कुमार आर्य वैदिक धर्म में मनुस्मृति का विशेष और सम्मानजनक स्थान है । भारतीय साहित्य में मनुस्मृति का मनु संहिता , मानव धर्मशास्त्र, मानव…

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कविता जब जागो तभी सवेरा है

जब जागो तभी सवेरा है

हम क्या करें चारों तरफ अँधेरा है,हर तरफ मौत और खौफ का ही डेरा है।बीन बस आज बजाता है वो दिखावे का,आज साँपों से स्वयं…

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राजनीति गांव को उन्नत, खुशहाल बनाने में जुटे हुए हैं आर.के.सिन्हा

गांव को उन्नत, खुशहाल बनाने में जुटे हुए हैं आर.के.सिन्हा

मुरली मनोहर श्रीवास्तव पटना से महज 55 किलोमीटर दक्षिण कोइलवर पुल से पार करते ही एक गांव है बहियारा। इस इलाके के लोग 1934 में…

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राजनीति डॉ॰ हर्षवर्धन मूल्यों की राजनीति के प्रेरक

डॉ॰ हर्षवर्धन मूल्यों की राजनीति के प्रेरक

– ललित गर्ग – नरेन्द्र मोदी की दूसरी बार बनी केन्द्र सरकार के मंत्रिपरिषद में अनुभवी, कार्यक्षम एवं विशेषज्ञ नए-पुराने चेहरों की उपस्थिति नई सरकार…

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राजनीति भारतीय लोकतंत्र की बीमारी बनी भारतीय नौकरशाही

भारतीय लोकतंत्र की बीमारी बनी भारतीय नौकरशाही

शशांक कुमार राय भारतीय लोकतंत्र एक गम्भीर बीमारी की चपेट में है जिसका समय रहते इलाज नहीं हुआ तो इसका क्षरण होना तय है और…

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लेख आखिर कहां जाएं बेटियां?

आखिर कहां जाएं बेटियां?

-प्रो. संजय द्विवेदी    अलीगढ़ से भोपाल तक हमारी बेटियों पर दरिंदों की बुरी नजर है। आखिर हमारी बेटियां कहां जाएं जाएं ? इस बेरहम दुनिया में…

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व्यंग्य ले पंगा

ले पंगा

दिलीप कुमारकुछ वर्ष पहले सलमान खान की इमेज मेकओवर के लिये एक अखबार ने एक अभियान चलाया था और नारा दिया था ,”बैड इज न्यू…

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