राजनीति ढपोर शंख

ढपोर शंख

     कल शाम को मैं बरामदे में बैठा था कि शर्मा जी आ गये। हम भावी लोकसभा चुनाव पर चर्चा करने लगे। कांग्रेस ने कई…

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राजनीति कांग्रेस का घोषणा पत्र और कश्मीर

कांग्रेस का घोषणा पत्र और कश्मीर

सुरेश हिन्दुस्थानीप्राय: कहा जाता है कि आज कश्मीर की जो स्थिति है, उसमें देश की उन सरकारों का गहरा सरोकार है, जिसमें कांग्रेस नीति नियंता…

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राजनीति हिंदुओं के लिए पाकिस्तान बना नर्किस्तान

हिंदुओं के लिए पाकिस्तान बना नर्किस्तान

1947 में भारत विभाजन के उपरांत पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने अपने पहले भाषण में कहा था कि ‘हमें अपने व्यवहार और विचार…

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प्रवक्ता न्यूज़ ‘कर्मवीर’ संपादक माखनलाल चतुर्वेदी

‘कर्मवीर’ संपादक माखनलाल चतुर्वेदी

– लोकेन्द्र सिंह आज की पत्रकारिता के समक्ष जैसे ही गोकशी का प्रश्न आता है, वह हिंदुत्व और सेकुलरिज्म की बहस में उलझ जाता है। इस बहस…

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कविता नववर्ष मंगलमय हो !

नववर्ष मंगलमय हो !

सत्य सनातन सभ्यता के रक्षक , हे उन्नत विचारों वाले , क्रुर , दु:सह दु:ख – जड़ता का विध्वंसक , हे उन्मत्त ! सुधारों वाले…

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लेख जलालशाह और मीरबाकी द्वारा कपटपूर्ण ढ़ंग से मस्ज्दि का निर्माण

जलालशाह और मीरबाकी द्वारा कपटपूर्ण ढ़ंग से मस्ज्दि का निर्माण

 राम जन्मभूमि मन्दिर का सच्चा इतिहासडा. राधेश्याम द्विवेदीवैदिक नगर वास्तु-परम्परा कालिदास के रघुवंश में चतुर्मुखी तोरण-धारिणी ब्रह्मा के रूप में प्राप्त है। ब्रिटिश और मुसलमानी…

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राजनीति अच्छे दिन की तलाश किसे?

अच्छे दिन की तलाश किसे?

आकाश कुमार पाँच वर्ष पूर्व की बात है। सोलहवीं लोकसभा का आगाज हुआ ही था। सभी कद्दावर नेता अपने अपने क्षेत्र में जुगलबंदी करते हुए…

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लेख यह सुधार समझौतों वाली मुझको भाती नहीं ठिठोली

यह सुधार समझौतों वाली मुझको भाती नहीं ठिठोली

पं. माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर विशेष(4 अप्रैल,1989) -प्रो. संजय द्विवेदी     पं.माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में एक ऐसा नाम हैं, जिसे छोड़कर…

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राजनीति लोकतंत्र समझने का असली औजार शिक्षा, कमजोर

लोकतंत्र समझने का असली औजार शिक्षा, कमजोर

लोकतंत्र का असली पर्व आते ही सियासी तवा गर्म होने लगा जिस पर सियासी लोग रोटी सेकने का  अपना -अपना हुनर और तजुर्बा दिखाएंगे। सत्ता…

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व्यंग्य चोरी का राष्ट्रीय उद्यम

चोरी का राष्ट्रीय उद्यम

एक समय था जब चोरी करना या चोरी होना बहुत बड़ी घटना होती थी। मेरे गांव में जब चोरी होती थी तो महीनों तक चर्चा…

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कविता बुरा मत मानिए कि देखिए इलेक्शन है।।

बुरा मत मानिए कि देखिए इलेक्शन है।।

बुरा मत मानिए कि देखिए इलेक्शन है।। बदले है भेष और करते हैं द्वेष, मगर आते ही चुनाव बढ़ जाता परफेक्शन है। आशीष जो देते…

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कविता चुनाव का बाजार लगा हुआ है |

चुनाव का बाजार लगा हुआ है |

चुनाव का बाजार लगा हुआ है | देखो ! ये कितना सजा हुआ है || चारो तरफ पोस्टर लगे हुये है | बैनर और झंडे…

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