‘आर्यसमाज विश्व की प्रथम धार्मिक सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर वेदों का प्रचार किया’
Updated: September 14, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, आर्य समाज की स्थापना गुजरात में जन्में स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई नगरी में की थी।…
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‘सत्यार्थ प्रकाश के प्रचार में शिथिलतायें दूर होनी चाहियें’
Updated: September 14, 2018
-मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द ने सत्यार्थप्रकाश एक ऐसा ग्रन्थ रचा है जो ‘भूतो न भविष्यति’ कथन को सार्थक सिद्ध करता है। ऋषि दयानन्द ने…
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हिन्दी आत्मा है भारत की
Updated: September 14, 2018
डॉ. मधुसूदन युनो में हिन्दी अटल जी ने, युनो में हिन्दी में, भाषण दे कर इतिहास रचा, उसी अंतराल में मैं म. प्रदेश, अपने ननिहाल…
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उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग को बदलते देखा है
Updated: September 13, 2018
हमने हर रोज जमाने को नया रंग बदलते देखा है उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग को बदलते देखा है वो जो चलते थे,तो शेर…
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हिंदी बिना हिंदुस्तान अधूरा
Updated: September 13, 2018
ब्रह्मानंद राजपूत, हिंदी शब्द है हमारी आवाज का हमारे बोलने का जो कि हिन्दुस्तान में बोली जाती है। आज देश में जितनी भी क्षेत्रीय भाषाएँ…
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हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न
Updated: September 13, 2018
लोकेन्द्र सिंह सर्वसमावेशी भाषा होना हिन्दी का सबसे बड़ा सौन्दर्य है। हिन्दी ने बड़ी सहजता और सरलता से, समय के साथ चलते हुए कई बाहरी भाषाओं…
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“स्वस्थ, सुखी व दीर्घ जीवन का आधार सन्ध्योपासना व इसके मन्त्रों का अर्थ सहित चिन्तन”
Updated: September 13, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य जीवन परमात्मा से हम सबको अपनी आत्मा की उन्नति के लिये मिला है। आत्मा की उन्नति का साधन सत्य ज्ञान की…
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ब्रज की सुधि हौं ना विसरावहुँ !
Updated: September 12, 2018
(मधुगीति १८०८१४ अ) ब्रज की सुधि हौं ना विसरावहुँ, जावहुँ आवहुँ कान्हा भावहुँ; वाल सखा संग प्रीति लगावहुँ, साखन सुरति करहुँ विचलावहुँ ! सावन मन भावन जब आवतु, पावन जल जब वो वरसावत; वँशी की धुनि हौं तव सुनवत, हिय हुलसत जिय धीर न पावत ! झोटा लेवत सखि जब गावत, ब्रह्मानन्द उमगि उर आवत; शीरी वायु गगन ते धावत, ध्यानावस्थित मोहि करि जावत ! श्याम- शाम शीतल सुर करवत, गान बहाय श्याम पहुँचावत; तानन तिरिया पियहिं बुलावत, मात पिता ग्रह अमृत घोलत ! पूछत कुशल भाव बहु भीने, चीन्हे अनचीन्हे सुर दीन्हे; ‘मधु’ माखन गोकुल कौ खावहुँ, मधुवन में मुरली सुनि जावहुँ ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’
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“मोक्ष प्राप्ति तक मनुष्य जन्म-मरण के बन्धन से मुक्त नहीं हो सकता”
Updated: September 12, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, हम मनुष्य हैं और हमारा जन्म हुआ है। श्रीमद्भगवद्-गीता का प्रसिद्ध वचन है ‘जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु धु्रवं जन्म मृतस्य च’ अर्थात्…
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प्रतिभाओ को मत काटो आरक्षण की तलवार से
Updated: September 12, 2018
नम्र निवेदन है मेरा भारत की इस सरकार से प्रतिभाओ को मत काटो,आरक्षण की तलवार से इन रेल पटरियों पर फैला,आज क्यों तमाशा है जाट-आन्दोलन…
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आप सरकार की कसौटी है जनता के द्वार योजना
Updated: September 12, 2018
ललित गर्ग: दिल्ली की ‘आप’ सरकार अब अपनी छवि को उजालने के प्रयास करती हुई दिखाई दे रही है। अपनी क्षमता एवं दक्षता का उपयोग…
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देश में पढ़े लिखे भिखारी
Updated: September 11, 2018
अनिल अनूप भीख मांगते लोगों के बारे में अगर आपकी भी यही धारणा है कि वे अशिक्षित और लाचार होने की वजह से मांग कर…
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