समाज पाश्चात्य समीक्षकों की दृष्टि में गीतांजलि

पाश्चात्य समीक्षकों की दृष्टि में गीतांजलि

डॉ. छन्दा बैनर्जी सन् 1913 का वर्ष न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए आध्यात्मिक-ऐश्वर्य का अभूतपूर्व वर्ष था । इसी वर्ष…

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राजनीति राजस्थान सरकार और महिला विकास की बयार

राजस्थान सरकार और महिला विकास की बयार

डॉ मनोज चतुर्वेदी राजस्थान ऐतिहासिक रूप से वीर महिलाओं की गाथाओं से भरा राज्य है. फिर भी वर्तमान संदर्भ में पितृसत्ता, सामंती मानसिकता और रुढ़िवादी…

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राजनीति सामाजिक समरसता एवम् डॉ .भीमराव अांबेडकर

सामाजिक समरसता एवम् डॉ .भीमराव अांबेडकर

डॉ .प्रेरणा चतुर्वेदी भारतीय संस्कृति की आत्मा समरसता परिपूर्ण है .धर्म सापेक्षीकरण ,धर्म निरपेक्ष करण ,सर्वधर्म समभाव, मानवतावाद ,बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय, आदि अवधारणा सामाजिक…

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कविता सुनो सुजाता : एक

सुनो सुजाता : एक

सुनो सुजाता : एक सुनो सुजाता मैं नहीं जानता तुम्हारा समाज-सत्य। शब्दार्थ की रपटीली पगडंडियाँ यदि हैं,आपका सचेत चुनाव तो आओ, बैठो बातें करो। सुनो…

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कला-संस्कृति लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप के शादी से लेकर , आडवाणी युग से जवानी युग में लौट रहे कुमार विश्वास

लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप के शादी से लेकर , आडवाणी युग से जवानी युग में लौट रहे कुमार विश्वास

तेजप्रताप के शादी के बाद तेजस्वी के शादी में क्या मिलेगा बारातियों को ? केजरीवाल के बेवफाई के बाद कुमार को मिला भाजपा का विश्वास।…

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राजनीति मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी में

मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी में

डॉ. वेदप्रताप वैदिक आजकल मैं इंदौर में हूं। यहां के अखबारों में छपी एक खबर ऐसी है कि जिस पर पूरे देश का ध्यान जाना…

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कविता समर्पण बढ़ रहा है प्रभु चरण में!

समर्पण बढ़ रहा है प्रभु चरण में!

समर्पण बढ़ रहा है प्रभु चरण में, प्रकट गुरु लख रहे हैं तरंगों में; सृष्टि समरस हुई है समागम में, निगम आगम के इस सरोवर में ! शान्त हो स्वत: सत्व बढ़ जाता, निमंत्रण प्रकृति से है मिल जाता; सुकृति हो जाती विकृति कम होती, हृदय की वीणा विपुल स्वर बजती ! ठगा रह जाता नृत्य लख लेता, स्वयम्बर अम्बरों का तक लेता; प्राण वायु में श्वाँस उसकी ले, परश मैं उसका पा सिहर लेता ! वे ही आए सजाए जग लगते, संभाले लट ललाट लय ललके; साथ चल दूर रह उरहिं उझके, कबहु आनन्द की छटा छिटके ! कराएँगे न जाने क्या मगों में, दिखा क्या क्या न देंगे वे पलों में; जहान जादूगरी है झाँकते बस, मिला कर नयन ‘मधु’ उनके नयन में ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

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समाज स्तरहीन कवि सम्मेलनों से हो रहा हिन्दी की गरिमा पर आघात

स्तरहीन कवि सम्मेलनों से हो रहा हिन्दी की गरिमा पर आघात

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ कवि सम्मेलनों का समृद्धशाली इतिहास लगभग सन १९२० माना जाता हैं । वो भी जन सामान्य को काव्य गरिमा के आलोक…

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धर्म-अध्यात्म जन्म व पुनर्जन्म का आधार हमारे पूर्व जन्मों व वर्तमान जन्म के शुभाशुभ कर्म

जन्म व पुनर्जन्म का आधार हमारे पूर्व जन्मों व वर्तमान जन्म के शुभाशुभ कर्म

–मनमोहन कुमार आर्य हम प्रतिदिन संसार में नये बच्चों के जन्म के समाचार सुनते रहते हैं। इसी प्रकार पशु व पक्षियों आदि के बच्चे भी…

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कविता ज़िन्दगी का रंग

ज़िन्दगी का रंग

पंखुरी सिन्हा   बिना उसका नाम लिए बिना कहे वह शब्द क्योंकि इतना बड़ा है जीवन किसी भी भाषा की अभिव्यक्ति से जगमगा जाता है…

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समाज ‘उदन्त मार्तण्ड’  की परम्परा निभाता हिन्दी पत्रकारिता

‘उदन्त मार्तण्ड’  की परम्परा निभाता हिन्दी पत्रकारिता

30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष आलेख मनोज कुमार कथाकार अशोक गुजराती की लिखी चार पंक्तियां सहज ही स्मरण हो आती हैं कि राजा…

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कविता मन का मेला

मन का मेला

  मेरे अतीत के आँगन में है,अनगिन सुधियों का मेला । कहाँ कहाँ ये जीवन बीता , कहाँ कहाँ ये  है खेला ।। * रंग-बिरंगी…

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