लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-73

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-73

राकेश कुमार आर्य    गीता का तेरहवां अध्याय और विश्व समाज ब्रहमाण्ड का क्षेत्रज्ञ कौन है? अब श्रीकृष्णजी कहते हैं कि अर्जुन! अब…

Read more
विविधा नरदेवता

नरदेवता

 हिन्दु मत में तैंतीस करोड़ देवी देवताओं की बात कही गई है। इसकी हकीकत मेरी चेतना में उभड़ती है जब सोचता हूँ कि बिना संसाधन…

Read more
कविता देश बड़ा है नारों से 

देश बड़ा है नारों से 

मोदी जी का नारा:- “बेटी बचाओ,बेटी पढाओ” लालू जी का नारा:- “एक नहीं,कम से कम दस बारह तो बनाओ उनको पढाओ,न पढाओ,राजनीति में तो लाओ…

Read more
कविता श्री देवी के अंतिम वाक्य

श्री देवी के अंतिम वाक्य

संसार एक थियेटर घर है अनेको पात्र इसमें आते है अपना अपना रोल निभा कर अपने घरो को चले जाते है मैं भी इस थियेटर…

Read more
प्रवक्ता न्यूज़ गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-72

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-72

राकेश कुमार आर्य   गीता का तेरहवां अध्याय और विश्व समाज इस प्रकार श्रीकृष्णजी ने इन चौबीस तत्वों से ब्रह्माण्ड तथा पिण्ड के क्षेत्र…

Read more
लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-71

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-71

राकेश कुमार आर्य   गीता का तेरहवां अध्याय और विश्व समाज जैसे एक खेत का स्वामी अपने खेत के कोने-कोने से परिचित होता है…

Read more
मीडिया नीति नियोजन में मीडिया की भूमिका

नीति नियोजन में मीडिया की भूमिका

अरुण तिवारी इण्डिया हैबिटेट सेंटर, लोदी रोड, नई दिल्ली में एक त्रिदिवसीय आयोजन (07-09 फरवरी, 2018) हुआ। इस त्रिदिवसीय ‘इवेलफेस्ट – 2018’ के दूसरे दिन…

Read more
समाज पहचान और श्रम मूल्य के संकट से जूझती घरेलू कामगार महिलायें

पहचान और श्रम मूल्य के संकट से जूझती घरेलू कामगार महिलायें

उपासना बेहार घरेलू काम दुनिया के सबसे पुराने रोजगार के साधनों में से एक रहा है। सूखा, खेती में हानि, रोजगार के विकल्प का ना होना, विकास के…

Read more
विविधा मनुष्य की आबादी बढ़ी , 60 फीसदी घटी गौरैया 

मनुष्य की आबादी बढ़ी , 60 फीसदी घटी गौरैया 

प्रभुनाथ शुक्ल गौरैया हमारी प्राकृतिक सहचरी है। कभी वह नीम के पेड़ के नीचे फूदकती और बिखेरे गए चावल या अनाज के दाने को चुगती।…

Read more
कविता ना ही शरीर ना ही मन हूँ !

ना ही शरीर ना ही मन हूँ !

ना ही शरीर ना ही मन हूँ, आत्म स्वयम्भू; क्यों वृथा व्यथा मैं हूँ सहूँ, विचरते विभु ! करते हैं नाट्य सब पदार्थ, प्राण त्राण वश; अस्तित्व कहाँ अपने, नृत्य करते वे विवश ! शक्ति है शिव की, प्रकृति कृति गति उन्हीं के हाथ; वे ही त्रिलोक विचरें सतत, पात्र हर के साथ ! हैं देश काल उनके, ब्रह्म-कण उन्हीं के गात; वे ही समात प्रष्फुरात, विहँसे सिहरे गात ! वे मेरे शीष दे अशीष, ‘शिवोऽहम्’ कहत; ‘मधु’ उनकी गोद बैठे रमत, रुनझुनात भू ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

Read more
समाज बकरी दीदी क्यों कहलाती हैं ये महिलाएं?

बकरी दीदी क्यों कहलाती हैं ये महिलाएं?

उषा राय बकरियों की तीसरी बड़ी आबादी बिहार राज्य में पाई जाती है, यहां की कई महिलाएं पशु सखी और बकरी दीदी के नाम से…

Read more
विविधा नक्सली कहर का सिलसिला

नक्सली कहर का सिलसिला

प्रमोद भार्गव             छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके में नक्सलियों ने एंटी लैंडमाइन वाहन को निशाना बनाकर सीआरपीएफ के 9 जवान हताहत कर…

Read more