गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-73
Updated: March 21, 2018
राकेश कुमार आर्य    गीता का तेरहवां अध्याय और विश्व समाज ब्रहमाण्ड का क्षेत्रज्ञ कौन है? अब श्रीकृष्णजी कहते हैं कि अर्जुन! अब…
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नरदेवता
Updated: March 20, 2018
हिन्दु मत में तैंतीस करोड़ देवी देवताओं की बात कही गई है। इसकी हकीकत मेरी चेतना में उभड़ती है जब सोचता हूँ कि बिना संसाधन…
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देश बड़ा है नारों से
Updated: March 19, 2018
मोदी जी का नारा:- “बेटी बचाओ,बेटी पढाओ” लालू जी का नारा:- “एक नहीं,कम से कम दस बारह तो बनाओ उनको पढाओ,न पढाओ,राजनीति में तो लाओ…
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श्री देवी के अंतिम वाक्य
Updated: March 19, 2018
संसार एक थियेटर घर है अनेको पात्र इसमें आते है अपना अपना रोल निभा कर अपने घरो को चले जाते है मैं भी इस थियेटर…
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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-72
Updated: March 19, 2018
राकेश कुमार आर्य   गीता का तेरहवां अध्याय और विश्व समाज इस प्रकार श्रीकृष्णजी ने इन चौबीस तत्वों से ब्रह्माण्ड तथा पिण्ड के क्षेत्र…
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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-71
Updated: March 19, 2018
राकेश कुमार आर्य   गीता का तेरहवां अध्याय और विश्व समाज जैसे एक खेत का स्वामी अपने खेत के कोने-कोने से परिचित होता है…
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नीति नियोजन में मीडिया की भूमिका
Updated: March 19, 2018
अरुण तिवारी इण्डिया हैबिटेट सेंटर, लोदी रोड, नई दिल्ली में एक त्रिदिवसीय आयोजन (07-09 फरवरी, 2018) हुआ। इस त्रिदिवसीय ‘इवेलफेस्ट – 2018’ के दूसरे दिन…
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पहचान और श्रम मूल्य के संकट से जूझती घरेलू कामगार महिलायें
Updated: March 19, 2018
उपासना बेहार घरेलू काम दुनिया के सबसे पुराने रोजगार के साधनों में से एक रहा है। सूखा, खेती में हानि, रोजगार के विकल्प का ना होना, विकास के…
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मनुष्य की आबादी बढ़ी , 60 फीसदी घटी गौरैया
Updated: March 19, 2018
प्रभुनाथ शुक्ल गौरैया हमारी प्राकृतिक सहचरी है। कभी वह नीम के पेड़ के नीचे फूदकती और बिखेरे गए चावल या अनाज के दाने को चुगती।…
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ना ही शरीर ना ही मन हूँ !
Updated: March 18, 2018
ना ही शरीर ना ही मन हूँ, आत्म स्वयम्भू; क्यों वृथा व्यथा मैं हूँ सहूँ, विचरते विभु ! करते हैं नाट्य सब पदार्थ, प्राण त्राण वश; अस्तित्व कहाँ अपने, नृत्य करते वे विवश ! शक्ति है शिव की, प्रकृति कृति गति उन्हीं के हाथ; वे ही त्रिलोक विचरें सतत, पात्र हर के साथ ! हैं देश काल उनके, ब्रह्म-कण उन्हीं के गात; वे ही समात प्रष्फुरात, विहँसे सिहरे गात ! वे मेरे शीष दे अशीष, ‘शिवोऽहम्’ कहत; ‘मधु’ उनकी गोद बैठे रमत, रुनझुनात भू ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’
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बकरी दीदी क्यों कहलाती हैं ये महिलाएं?
Updated: March 18, 2018
उषा राय बकरियों की तीसरी बड़ी आबादी बिहार राज्य में पाई जाती है, यहां की कई महिलाएं पशु सखी और बकरी दीदी के नाम से…
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नक्सली कहर का सिलसिला
Updated: March 18, 2018
प्रमोद भार्गव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके में नक्सलियों ने एंटी लैंडमाइन वाहन को निशाना बनाकर सीआरपीएफ के 9 जवान हताहत कर…
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