गंगोत्री के हरे पहरेदारों की पुकार सुनो
Updated: June 8, 2017
लेखक: सुरेश भाई एक ओर ‘नमामि गंगे’ के तहत् 30 हजार हेक्टेयर भूमि पर वनों के रोपण का लक्ष्य है तो दूसरी ओर गंगोत्री से…
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क्यों न फिर से निर्भर हो जाए
Updated: June 9, 2017
जरा एक पल रुक कर सोचिए तो सही कि यह भौतिकवादी संस्कृति हमें कहाँ लेकर जा रही है? क्यों हमारे समाज में जहाँ समाज और…
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किस काम की है, यह मौत की सजा ?
Updated: June 8, 2017
बलात्कार की सजा इतनी सख्त होनी चाहिए कि किसी के मन में बलात्कार का विचार पैदा होते ही उसकी सजा की भयंकरता घनघनाने लगे। याने…
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पौधों को वृक्ष बनने के लिए किसी मार्केटिंग की जरूरत नहीं
Updated: June 8, 2017
दूसरी शोध रिपोर्ट कहती है कि अच्छी नींद से वजन कम होता है, ये बिल्कुल नाक को घुमाकर पकड़ने वाली बात है। अच्छी नींद के…
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भारत के राष्ट्रपुरुष शिवाजी महाराज
Updated: June 8, 2017
ललित कौशिक जब देश परतंत्र में जाता है तब शासनकर्ता की जमात का अनुकरण और अनुसरण लोग करने लगते हैं और समाज का नेतृत्व करने…
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भीड़तंत्र की हिंसा से जख्मी होता समाज
Updated: June 8, 2017
-ललित गर्ग- उत्तर प्रदेश के आगरा में भाजपा नेता की हत्या के बाद भीड़ ने ही दो हमलावरों में से एक को पीट-पीटकर मार डाला।…
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सडक़ों पर बिकता ‘ज़हर’:शासन-प्रशासन मौन?
Updated: June 8, 2017
खबरों के मुताबिक चीन से ही आयातित कोई विशेष रासायनिक पाऊडर ऐसा है जिसकी एक छोटी सी पुडिय़ा जिसका वज़न मात्र दस ग्राम ही होता…
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मूसा तुम आतंकी हम देशप्रेमी भारतीय!
Updated: June 8, 2017
मिस्टर मूसा अलबत्ता तुम ठहरे सारी दुनिया के खुदाई फौजदार, इस् लाम और इंसानियत के दुश्मन तो तुम अपना यह गंदाखूनी खेल कश्मीर तक ही…
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सीबीआई ने धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई की है या एनडीटीवी की स्वतंत्रता के खिलाफ? – एस. गुरुमूर्ति
Updated: June 8, 2017
पूरे यूपीए सरकार के कार्यकाल में, एनडीटीवी ने अपनी शेल सहायक कंपनियों में निवेशकों की पहचान का खुलासा करने से इनकार कर दिया। यहाँ तक…
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शिक्षा से जुड़े सवालों का अनुत्तरित होना
Updated: June 8, 2017
ललित गर्ग- दुनिया के परिदृश्य में भारत में जिस रफ्तार से प्रगति हो रही है, चाहे वह आर्थिक हो, सांस्कृतिक हो, वैज्ञानिक हो, कृषि की…
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ये ज़रूरी तो नहीं
Updated: June 8, 2017
मैं ख़ुद से ही रूठी रहती हूँ, कोई मनाये मुझको आकर, ये ज़रूरी तो नहीं, मैं ख़ुद को ही मना लेती हूँ। कुछ भी…
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कम्युनिस्टों का एजेंडा, सेना को करो बदनाम
Updated: June 8, 2017
कम्युनिस्ट विचारधारा के लेखक पार्थ चटर्जी का अंग्रेजी में लिखा एक लेख दो जून को कम्युनिस्ट एजेंडे पर संचालित वेबस्थल 'द वायर' पर प्रकाशित होता…
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