विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-19

विश्वगुरू के रूप में भारत-19

राकेश कुमार आर्य  भारत की स्थापत्य कला में देखने वाली बात ये होती है कि हजारों वर्ष पूर्व निर्मित किये गये भव्य-भवन, राजप्रासाद, दुर्गादि…

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व्यंग्य शपथ ग्रहण समारोह 

शपथ ग्रहण समारोह 

इस शीर्षक से आप भ्रमित न हों। मेरा मतलब पिछले दिनों दिल्ली में हुए शपथ ग्रहण से नहीं है। उसमें कुछ मंत्रियों की कुर्सी ऊंची…

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कविता अक्सर …

अक्सर …

बारिशो के मौसम में ; यूँ ही पानी की तेज बरसाती बौछारों में ; मैं अपना हाथ बढाता हूँ कि तुम थाम लो  , पर सिर्फ तुम्हारी यादो…

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समाज अणुव्रत के आदर्शों का हो नया भारत 

अणुव्रत के आदर्शों का हो नया भारत 

ललित गर्ग- सत्तर वर्ष पूर्व भारत की स्वतंत्रता के बुनियादी पत्थर पर नव-निर्माण का सुनहला भविष्य लिखा गया था। इस लिखावट का हार्द था कि…

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विविधा मुहिम २०१९ की!

मुहिम २०१९ की!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मंत्रिमण्डल में तीन साल में तीसरा विस्तार आवश्यकता का पुख्ता आधार तो दर्शता ही है यह भी बताता है  कि मोदी…

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विविधा वक्त की जरूरत है इस्लामी मदरसों का आधुनिकीकरण

वक्त की जरूरत है इस्लामी मदरसों का आधुनिकीकरण

आशीष रावत हाल ही में देश के सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम समाज में प्रचलित तीन तलाक पर 6 महीने की रोक लगा दी है मगर…

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विविधा उत्तर कोरियाः सनकी तानाशाह के हाथ में ब्रह्मास्त्र

उत्तर कोरियाः सनकी तानाशाह के हाथ में ब्रह्मास्त्र

प्रमोद भार्गव उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर अमेरिका, जापान और भारत समेत दुनिया के अनेक देशों को चोंका दिया है। संयुक्त राष्ट्र…

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लेख कोई पूछे तो सही, अशोक अब तक वाजपेयी क्‍यों हैं

कोई पूछे तो सही, अशोक अब तक वाजपेयी क्‍यों हैं

रामकुमार वर्मा ने अपने महाकाव्‍य ”एकलव्‍य” में लिखा है, ”तुम नहीं वत्‍स, यह समय  ही शूद्र है”। हमेशा से ही ”शूद्र” शब्‍द को दलितों का…

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विविधा स्वादिष्ट भोजन में कंकड़ की तरह है कर्नाटक का हिंदी विरोध ….!!

स्वादिष्ट भोजन में कंकड़ की तरह है कर्नाटक का हिंदी विरोध ….!!

तारकेश कुमार ओझा     छात्र जीवन में अनायास ही एक बार दक्षिण भारत की यात्रा का संयोग बन गया। तब तामिलनाडु में हिंदी विरोध…

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विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-18

विश्वगुरू के रूप में भारत-18

राकेश कुमार आर्य फल फूल से लदी हों औषध अमोघ सारी देशवासियों को पर्जन्य समय पर बरसकर अन्नादि की पूर्ति करते हैं, साथ ही समय…

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कविता ये नौकर

ये नौकर

  घर का कोई पुराना नौकर, ईमानदार वफ़ादार सा नौकर, हर व्यक्ति की सेवा करता मुश्किल से मिलता था ये नौकर लैण्ड लाइन सा ना…

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प्रवक्ता न्यूज़ कुछ लफ्ज़ तेरे नाम …………

कुछ लफ्ज़ तेरे नाम …………

    मेरे उम्र के कुछ दिन , कभी तुम्हारे साडी में अटके तो कभी तुम्हारी चुनरी में …. कुछ राते इसी तरह से ;…

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