अब आ गया आम का आनंद
Updated: June 22, 2015
मृत्युंजय दीक्षित ऋतुओं के देश भारत की विशेषता है कि यहां पर हर ऋतु के अनुकूल फल प्रकृति उपलब्ध कराती है। गर्मी में आवश्यकता…
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गोरी-काली नस्लों में बंटता अमेरिका
Updated: June 22, 2015
प्रमोद भार्गव अमेरिका में निरंतर नस्लीय हिंसा से जुड़ी निर्मम वारदातें सामने आ रही हैं। दक्षिण केरौलिना के चार्ल्सटन शहर में अश्वेतों के ऐतिहासिक…
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लंगड़ा आम का नामकरण कथा
Updated: June 22, 2015
अशोक “प्रवृद्ध” यूँ तो प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र बनारस आज भी बहुत-सी चीजों के लिए लोकप्रिय है, मशहूर है, तथापि जिस चीज…
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आमूल-चूल परिवर्तन से पूरा होगा सबके लिए घर का सपना
Updated: June 22, 2015
-सिद्धार्थ शंकर गौतम- हाल ही में मोदी कैबिनेट ने सभी के लिए घर योजना को मंजूरी दे दी है जिसमें शहरी गरीबों तथा कम आय…
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इन ‘ललितों’ का तो एेसा ही है…!
Updated: June 22, 2015
-तारकेश कुमार ओझा- उन दिनों किसी अखबार में पत्रकार होना आइएएस – आइपीएस होने से किसी मायने में कम महत्वपूर्ण नहीं था। तब किसी भी…
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रहते हुए भी हो कहां
Updated: June 22, 2015
-गोपाल बघेल ‘मधु’- (मधुगीति १५०६२१) रहते हुए भी हो कहाँ, तुम जहान में दिखते कहाँ; देही यहाँ बातें यहाँ, पर सूक्ष्म मन रहते वहाँ ।…
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हिण्डन-यमुना-गंगा नदी पंचायत निर्णय
Updated: June 22, 2015
-अरुण तिवारी- 1. संदर्भ: गंगा के प्रवाह में प्रदूषित पानी की आवक औसतन 700 क्युसेक है; जबकि यदि पूरी क्षमता के साथ वर्षा जल…
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केजरीवाल की सरकार को फ्लॉप होने से बचा रहे हैं मोदी
Updated: June 22, 2015
–इक़बाल हिंदुस्तानी- -दिल्लीवासियों की नज़र में ‘आप’ से हार का बदला ले रही बीजेपी !- दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के साथ इस…
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23-24 जून को उत्तरखण्ड विकास संवाद
Updated: June 22, 2015
-अरुण तिवारी- नीति आयोग ने इस नीति पर काम करना शुरु कर दिया है कि राज्य, केन्द्र की ओर ताकने की बजाय, अपने संसाधनों के…
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शर्म उनको मगर नहीं आई?
Updated: June 22, 2015
-तनवीर जाफरी- ऋषियों-मुनियों, साधू-संतों, पीरों-फकीरों तथा अध्यात्मवादियों की धरती समझा जाने वाला हमारा भारतवर्ष अपनी इसी पहचान के चलते सहस्त्राब्दियों से पूरे विश्व की नज़रों…
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खोया हूं मैं
Updated: June 22, 2015
–मनीष सिंह- खोया हूँ मैं हक़ीक़त में और फ़साने में , ना है तुम बिन कोई मेरा इस ज़माने में। तुम साथ थे…
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जब योग का कहीं कोई विरोध है ही नहीं तो उसे करवाने की आक्रामक नाटकीयता क्यों ?
Updated: June 20, 2015
आजकल शुद्ध सरकारी और उसका पिछलग्गू व्यभिचारी प्रचार तंत्र नाटकीय ढंग से योगाभ्यास के बरक्स आक्रामक और असहिष्णु हो चला है। दृश्य,श्रव्य ,पश्य, छप्य,डिजिटल,इलक्ट्रॉनिक ,मोबाइल और तमाम ‘प्रवचनीय’ माध्यमों दवरा बार -बार कहा जा…
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