भूल गया हूँ गाॉवं को,
Updated: September 25, 2014
भूल गया हूँ गाॉवं को, बड़े शहर की चकाचोंध में, रखकर अपने पॉवं को , शायद अब कुछ याद नहीं , भूल गया हूँ गाॉवं…
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मंगल पर ऐतिहासिक विजय
Updated: September 25, 2014
२४ सितम्बर, २०१४ का वह सुहाना सवेरा क्या कोई भारतीय भूल पाएगा? शायद कभी नहीं। यह दिन हमारे लिये उतना ही गौरवशाली और ऐतिहासिक…
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गिरवी
Updated: September 25, 2014
-अश्वनी कुमार कॉलेज ख़त्म होने का आखिरी दिन, सभी लोग एक दूसरे से विदा ले रहे हैं. गले मिल रहे हैं. अपना फ़ोन नंबर बदल…
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भारतीय संस्कृति का मौलिक चित्रण है एकात्म मानववाद
Updated: September 24, 2014
अशोक बजाज असाधारण प्रतिभा एवं विशाल व्यक्तित्व के धनी पं. दीनदयाल उपाध्याय एक महान देशभक्त, कुशल संगठनकर्ता, मौलिक विचारक, दूरदर्शी, राजनीतिज्ञ ,पत्रकार और प्रबुद्ध साहित्यकार…
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सुबह होने तक
Updated: September 24, 2014
(संस्मरण) बचाओ! बचाओ! की पुकार सुनकर यह समझने में देर नहीं लगी कि पूरब से आनेवाली आवाज़ रामनगीना बाबू के घरवाली की है। लुटेरे लूटपाट…
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’जुगाङ’ नीति लाये सरकार
Updated: September 24, 2014
अरुण तिवारी नवाचारों को नीति की दरकार ’’10 दिन के भीतर ई रिक्शा, दिल्ली की सङकों पर फिर से दौङने लगेंगे’’- भारत सरकार के परिवहन…
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सौफ़्टवेयर
Updated: September 24, 2014
गणित समझने मे हमे कभी भी दिक़्कत नहीं होती थी, अवधारणाये(concepts) सब समझ मे आ जाती थीं, बस गणना(calculation) ग़लत हो जाती थीं, जोड़, घटा…
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हनुमान जी की गदा
Updated: September 24, 2014
बी एन गोयल गत कुछ दिनों से हमारी मित्र मंडली में हनुमान जी के बारे में काफ़ी चर्चा चल रही है। इस का कारण है –…
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हज और भारतीय हाजी!
Updated: September 23, 2014
5 अक्टूबर को भारत में बकरीद अर्थात् इर्द उल अजहा है। संभवतः भारत या उपमहादीप में बकरीद मनाने से एक दो दिन पूर्व सउदी अरब…
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सीजर अधिक क्यों ?
Updated: September 23, 2014
डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव एक आम आदमी की धारण है कि सामान्य प्रसव से सीजर बहुत अधिक होते है। उनके अनुसार महिला चिकित्सक रूपयों…
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गांधी फिर कब आओगे ?
Updated: September 23, 2014
डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव (गांधी जयंती २ अक्टूबर २०१४) मोहनदास कमरचंद जी की, देश प्रेम की आंधी थी। पीछे देश खड़ा मर मिटने, एसी हस्ती…
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रे देवों के अंश जाग जा………
Updated: September 23, 2014
रे देवों के अंश जाग जा……… कौटिक देखे कर्मरत, पर तुझसा दिखा न कोई। इतने सर संधान किये,फिर क्यों तेरी भाग्य चेतना सोई।। आज…
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