कविता भूल गया हूँ गाॉवं को,

भूल गया हूँ गाॉवं को,

भूल गया हूँ गाॉवं को, बड़े शहर की चकाचोंध में, रखकर अपने पॉवं को , शायद अब कुछ याद नहीं , भूल गया हूँ गाॉवं…

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टेक्नोलॉजी मंगल पर ऐतिहासिक विजय

मंगल पर ऐतिहासिक विजय

      २४ सितम्बर, २०१४ का वह सुहाना सवेरा क्या कोई भारतीय भूल पाएगा? शायद कभी नहीं। यह दिन हमारे लिये उतना ही गौरवशाली और ऐतिहासिक…

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कहानी गिरवी

गिरवी

-अश्वनी कुमार कॉलेज ख़त्म होने का आखिरी दिन, सभी लोग एक दूसरे से विदा ले रहे हैं. गले मिल रहे हैं. अपना फ़ोन नंबर बदल…

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शख्सियत भारतीय संस्कृति का मौलिक चित्रण है एकात्म मानववाद

भारतीय संस्कृति का मौलिक चित्रण है एकात्म मानववाद

 अशोक बजाज असाधारण प्रतिभा एवं विशाल व्यक्तित्व के धनी पं. दीनदयाल उपाध्याय एक महान देशभक्त, कुशल संगठनकर्ता, मौलिक विचारक, दूरदर्शी, राजनीतिज्ञ ,पत्रकार और प्रबुद्ध साहित्यकार…

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विविधा सुबह होने तक

सुबह होने तक

(संस्मरण) बचाओ! बचाओ! की पुकार सुनकर यह समझने में देर नहीं लगी कि पूरब से आनेवाली आवाज़ रामनगीना बाबू के घरवाली की है। लुटेरे लूटपाट…

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टॉप स्टोरी ’जुगाङ’ नीति लाये सरकार

’जुगाङ’ नीति लाये सरकार

अरुण तिवारी नवाचारों को नीति की दरकार ’’10 दिन के भीतर ई रिक्शा, दिल्ली की सङकों पर फिर से दौङने लगेंगे’’- भारत सरकार के परिवहन…

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व्यंग्य सौफ़्टवेयर

सौफ़्टवेयर

गणित समझने मे हमे कभी भी दिक़्कत नहीं होती थी, अवधारणाये(concepts) सब समझ मे आ जाती थीं, बस गणना(calculation) ग़लत हो जाती थीं, जोड़, घटा…

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कला-संस्कृति हनुमान जी की गदा

हनुमान जी की गदा

बी एन गोयल गत कुछ दिनों से हमारी मित्र मंडली में हनुमान जी के बारे में काफ़ी चर्चा चल रही है। इस का कारण है –…

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विविधा हज और भारतीय हाजी!

हज और भारतीय हाजी!

5 अक्टूबर को भारत में बकरीद अर्थात् इर्द उल अजहा है। संभवतः भारत या उपमहादीप में बकरीद मनाने से एक दो दिन पूर्व सउदी अरब…

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महिला-जगत सीजर अधिक क्यों ?

सीजर अधिक क्यों ?

डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव   एक आम आदमी की धारण है कि सामान्य प्रसव से सीजर बहुत अधिक होते है। उनके अनुसार महिला चिकित्सक रूपयों…

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कविता गांधी फिर कब आओगे ?

गांधी फिर कब आओगे ?

डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव (गांधी जयंती २ अक्टूबर २०१४) मोहनदास कमरचंद जी की, देश प्रेम की आंधी थी। पीछे देश खड़ा मर मिटने, एसी हस्ती…

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कविता रे देवों के अंश जाग जा………

रे देवों के अंश जाग जा………

रे देवों के अंश जाग जा……… कौटिक देखे कर्मरत, पर तुझसा दिखा न कोई। इतने सर संधान किये,फिर क्यों तेरी भाग्य चेतना सोई।।   आज…

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