कभी न खाना तंबाकू
Updated: October 10, 2012
किसी किराने की दुकान से तंबाकू के पाउच ले आते, गली गली में बच्चे दिखते खुल्ल्म खुल्ला गुटखा खाते। बाली उमर और ये गुट्खा…
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बिग बी संघर्ष के दिनों में सात साल महमूद साहब के घर में बतौर मेहमान रहे
Updated: October 10, 2012
जन्मदिन 11 अक्तूबर पर विशेष:- शादाब जफर शादाब शायद ही कोई ऐसा हो जो बिग बी यानि अमिताभ बच्चन से एक बार न मिलना चाहता…
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एकान्त का सूनापन
Updated: October 10, 2012
विजय निकोर ठिठुरता गहन सन्नाटा भीतर, अति निज कमरों का एकान्त अब और सुनसान – वर्ष पर वर्ष बीत जाते हैं पर जानें क्यूँ कोई…
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ममता ने दिल्ली में भरी हुंकार
Updated: October 10, 2012
प्रमोद भार्गव ममता ने दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ जो हुंकार भरी है, कांग्रेस और सपा को हैरान करने वाली है। राजग की बैचेनी…
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अस्मिता, आत्मकथा, हिन्दी जाति और रामविलास शर्मा (1)
Updated: October 10, 2012
रामविलास शर्मा के जन्मदिन (10 अक्टूबर) पर विशेष हिन्दी साहित्य में रामविलास शर्मा अस्मिता विमर्श के सबसे बड़े आलोचक हैं। हिन्दी में अस्मिता विमर्श स्त्रीसाहित्य…
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मासूमों के भविष्य से खेल रहे मोदी
Updated: October 10, 2012
मोहम्मद इफ्तेखार अहमद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही खुद को पूरे देश में विकास की प्रतिमूर्ति के रूप में पेश करते हों और…
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बर्फी की शादी
Updated: October 10, 2012
जिस दिन होना थी लड्डू की बर्फीजी से शादी, बर्फी बहुत कुरूप किसी ने झूठी बात उड़ा दी| गुस्से के मारे लड्डूजी जोरों से चिल्लाये|…
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कल आना है फिर संडे
Updated: October 10, 2012
छ:दिन बीते किसी तरह से ,कल आना है फिर संडे| खेल खेल के नये तरीके,और सीखेंगे नये फंडे| सुबह देर तक सोऊंगा मैं,कोई मुझे…
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भारत बनाना रिपब्लिक नहीं, कुप्रबंधन का शिकार है.
Updated: October 10, 2012
अवधेश पाण्डेय 121 करोड़ सक्षम लोगों के देश को बनाना रिपब्लिक का नाम दे दिया है राबर्ट वाड्रा ने. यह हमारे देश के लोगों की…
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हास्य-व्यंग्य/ जयराम रमेश मंदिर नहीं शौचालय जाएंगे?
Updated: October 9, 2012
बेटा: पिताजी! पिता: हाँ, बेटा। बेटा: ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि शौचालय हमारे मंदिरों से कहीं ज़्यादा शुद्ध और स्वच्छ हैं।…
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दलदल की गवाही
Updated: October 9, 2012
आज दादाजी फिर कहानी सुनाने बैठ गये| गरमी का समय था,बढ़िया कूलर की हवा का आनंद लेते हुये सब बच्चे उन्हें घेर कर बैठे थे|कहानी…
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कविता – असल में
Updated: October 9, 2012
मोतीलाल हमने समय की क्रूरता देखी देखी आदमी की गति समय के गति से भागते हुए । अगली तारीख में रोटियां गर्म नहीं हो…
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