टॉप स्टोरी पश्चिम बंगाल के बहाने

पश्चिम बंगाल के बहाने

अरुण माहेश्वरी पश्चिम बंगाल की आज की दशा देख कर सचमुच काफी आश्चर्य होता है। कहावत है कि जैसा स्वामी वैसा दास। इसीप्रकार, कहा जा…

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बच्चों का पन्ना मन को भा जानेवाले दिन‌

मन को भा जानेवाले दिन‌

याद मुझे अक्सर आ जाते,आने,दो आने वाले दिन| दूध मलाई गरम जलेबी,और रबड़ी खाने वाले दिन||   तीस रुपये में मझले काका, दिल्ली तक होकर…

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बच्चों का पन्ना पिज्जा बर्गर कभी न खाओ|

पिज्जा बर्गर कभी न खाओ|

आओ आओ सब बच्चो आओ सबको, सच्ची बात बताओ| जोर जोर से सब चिल्लाओ पिज्जा बर्गर कभी न खाओ|   फास्ट फूड के सेवन से…

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बच्चों का पन्ना ‘ देवपुत्र ‘ पढ़ पाऊँ हर दिन

‘ देवपुत्र ‘ पढ़ पाऊँ हर दिन

मुझको चंदा पर जाना है मुझको यान दिला दो न माँ| एक अटेची नई दिला दो ट्रेक सूट सिलवा दो न माँ|   टिफिन बाक्स…

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बच्चों का पन्ना बच्चों के चेहरे चेहरे पर जगह जगह पर राम लिखा है

बच्चों के चेहरे चेहरे पर जगह जगह पर राम लिखा है

बच्चों के चेहरे चेहरे पर जगह जगह पर राम लिखा है| कहीं कहीं पर कृष्ण लिखा है कहीं कहीं बलराम लिखा है|   अल्लाह अल्लाह…

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जरूर पढ़ें बिहार आज भी है …………|

बिहार आज भी है …………|

जीवन प्रकाश शांति के दूत गौतम बुद्ध और सम्राट अशोक की पावन धरती बिहार से अपनी रोजी-रोटी चलाने व उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए…

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कविता खुशियों के कुछ पलों के लिए

खुशियों के कुछ पलों के लिए

बलबीर राणा “भैजी” खुशियों के कुछ पलों के लिए घोंसले में चहकता है पंछी पंखो के बाहुपाश में समेटता चमन को । चोंच टकराता घरोंदे…

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कविता आस्था

आस्था

बीनू भटनागर मेरी आस्था मेरी पूजा का नाता मन मस्तिष्क से है, और है आत्मा से।   मेरी पूजा मे ना पूजा की थाली है,…

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जन-जागरण शास्त्री जी को इस कहानी से छुट्टी दो…

शास्त्री जी को इस कहानी से छुट्टी दो…

अरुण कान्त शुक्ला किसी गाँव में रहने वाला एक छोटा लड़का अपने दोस्तों के साथ गंगा नदी के पार मेला देखने गया। शाम को वापस…

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कविता ” आप ” और ” तुम “

” आप ” और ” तुम “

 विजय निकोर औरों से अधिक अपना लाल रवि की प्रथम किरण-सा कौन उदित होता है मन-मंदिर में प्रतिदिन मधुर-गीत-सा मंजुल, मनोग्राही, भर देता है आत्मीयता…

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बच्चों का पन्ना भेद भाव यह कैसा मम्मी

भेद भाव यह कैसा मम्मी

भैया तो शाला जाता है, मुझे नहीं जाने देती माँ| भैया दूध मलाई खाता, मुझे नहीं खाने देती माँ||   मैं लड़की हूं शायद इससे,…

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राजनीति दादा आप तो राष्ट्रपति भवन जाकर भी “प्रणब दा” ही रहे !!!

दादा आप तो राष्ट्रपति भवन जाकर भी “प्रणब दा” ही रहे !!!

• महामहिम जैसे शब्दों और औपनिवेशिक व्यवहार को समाप्त करने का आव्हान से एक नया वातावरण बनेगा ! • राजनीतिज्ञों को लेना होगी सीख और…

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