थोरियम घोटाला : पड़ताल एक कदम आगे : भाग-1
Updated: October 7, 2012
अभिनव शंकर पिछले लेख में मुख्यतः इस घोटाले की “परिकल्पना” बतायी गयी थी, पृष्ठभूमि समझाई गयी थी,बताया गया की कैसे एक बेहद सुनियोजित,सामरिक रूप से…
Read more
ममता बरसी मगर इस बार मनमोहन पर नहीं
Updated: October 7, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम केंद्र सरकार के खुदरा व्यापार में ५१ फ़ीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, डीजल के दामों में बढ़ोतरी, घरेलू गैस सिलेंडरों पर सब्सिडी घटाने…
Read moreअपलक देखतें सपनें
Updated: October 7, 2012
आँखों में था पूरा ही आकाश तब भी और अब भी और थे उसमें से झाँकतें निहारतें कृतज्ञता के ढेरों सितारें. और थे उसमें…
Read more
गांधी संग्राहलय में एक दिन…
Updated: October 8, 2012
वन्दना शर्मा “आने वाली पीढ़ी को शायद ही यह यकीन होगा कि गांधी जैसा भी कोई हाड़-मांस का पुतला इस धरती पर चला होगा” यह…
Read more
कल आ जाइये
Updated: October 6, 2012
एक सौ बीस करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश मे अगर कमी है तो बस आदमी की। विचित्र विडम्बना है, कि जिस देश की जनसंख्या…
Read moreअम्मा बापू
Updated: October 6, 2012
सुबह-सुबह जब धूप गुनगुनी, छत पर आती है| सूरज कि किरणों में बैठी, मां मुस्कराती है। आसमान भी देख देख कर, गदगद हो जाता|…
Read more
नाक पकड़ ,सारी मत बोलो
Updated: October 6, 2012
आद्ध्या बोली,नाक पकड़ सारी मत बोलो दादाजी| नियम कायदे नहीं जानते ,पोल न खोलो दादाजी| कान पकड़कर ही तो सारी ,बोला जाता है हरदम, किंतु…
Read more
बंदरजी
Updated: October 6, 2012
बंदरजी भाई बंदरजी, कैसे आये अंदरजी| बंद पड़ा था दरवाजा| तुमने किससे खुलवाया| दरवाजा दो टन का था| भारी बहुत वज़न का था| जिसने…
Read moreहिंदी दादी अमर रहेगी
Updated: October 6, 2012
अंग्रेजी चाची ने हिंदी, दादी पर हमला बोला| डर के मारे दादी का, सिंहासन है थर थर डोला| चुपके चुपके दादी माँ ,अपने दड़बे मे…
Read more
सुविधाओं से वंचित नौनिहाल
Updated: October 6, 2012
डॉ. आशीष वशिष्ठ बच्चे देश का भविष्य हैं लेकिन देश के नौनिहाल जिन विषम परिस्थितियों में जीवन बसर कर रहे हैं वो किसी भी दृष्टिïकोण…
Read more
एक था टाइगर
Updated: October 6, 2012
नवनीत कुमार गुप्ता पिछले दिनों बाघ संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर काफी चर्चा हुई है। कोर्ट के फैसले…
Read more
जलछाजन क्षेत्र में सामुदायिक सहभागिता का परिणाम
Updated: October 6, 2012
शैलेन्द्र सिन्हा परंपरागत रूप से नदियों, पहाड़ों, झरनों एवं जोरिया से पानी पीकर वर्षों से मनुष्य अपना जीवन यापन करता आ रहा है। राष्ट्रीय स्तर…
Read more