विविधा व्यंग्य/ मेरी ऐनक प्लीज!

व्यंग्य/ मेरी ऐनक प्लीज!

अशोक गौतम इधर सरकार ने महंगाई से त्रस्त बंदे को महंगाई भत्ता देने की घोषणा भर की तो सुबह उधर लाला ने आटा बीस से…

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राजनीति महाराष्ट्र में राजनीतिक उथल-पुथल / मा. गो. वैद्य

महाराष्ट्र में राजनीतिक उथल-पुथल / मा. गो. वैद्य

मराठी में ‘घड़ामोड़’ (बनना-बिगड़ना) यह एक बहुत अच्छा अर्थपूर्ण शब्द है. ‘घड़ामोड़’ मतलब जिसमें कुछ बनता है और कुछ बिगड़ता भी है. बात सही तरीके…

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विविधा ‘हिंदी प्रलाप’ – अरुण माहेश्वरी

‘हिंदी प्रलाप’ – अरुण माहेश्वरी

दक्षिण अफ्रीका के विश्व हिंदी सम्मेलन से घूम कर आने के ठीक बाद हिंदी के प्रोफेसर और भारत सरकार के केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के पूर्व…

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बच्चों का पन्ना यहां कुत्ते रहते हैं

यहां कुत्ते रहते हैं

बहुत दिनों बाद इंदौर आना हुआ तो पुराने साथियों की याद आ गई|जय प्रकाश गुप्ता और मैं कई साला एक ही विभाग में काम करते…

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विविधा महाराजा की वापसी

महाराजा की वापसी

सतीश सिंह सरकार द्वारा बरती अनियमितता, गलत प्रबंधन और अंदरुनी गड़बडि़यों की वजह से आज महाराजा कंगाली के कगार पर है। एक जनहित याचिका में…

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महिला-जगत स्त्री-आकर्षण का केन्द्र : अनुभूति, ताकत नहीं – सारदा बनर्जी

स्त्री-आकर्षण का केन्द्र : अनुभूति, ताकत नहीं – सारदा बनर्जी

आम तौर पर पुरुषों में यह धारणा प्रचलित रही है कि स्त्रियां पुरुषों के मर्दानगी वाले एटीट्यूड, बलिष्ठ भुजाओं वाले ताकतवर शरीर से ही आकर्षित…

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गजल बस उलझन की बात यही है

बस उलझन की बात यही है

श्यामल सुमन किसकी गलती कौन सही है बस उलझन की बात यही है   हंगामे की जड़ में पाया कारण तो बिलकुल सतही है  …

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कविता कविता-चींटी

कविता-चींटी

चींटी मिश्री के इक दाने को, लाखों चलीं उठाने को, अपने घर ले जाने को, ऐसा संगठन नहीं मिलता, इंसानो को।   ये हैं छोटी…

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बच्चों का पन्ना थोड़ा सा फर्क

थोड़ा सा फर्क

“दादाजी दादाजी ‘बनाना’ को हिंदी में क्या बोलते हैं?” “बेटे ‘बनाना’ को हिंदी में केला कहते हैं|” “और दादाजी वो जो राउंड ,राउंड, ऱेड, रेड…

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जरूर पढ़ें तमिलनाडु में हिन्दी लोकप्रिय?

तमिलनाडु में हिन्दी लोकप्रिय?

डॉ. मधुसूदन उवाच ॐ प्रति वर्ष ६ लाख हिन्दी के परीक्षार्थी। ॐ सर्वाधिक लोकप्रिय तृतीय भाषा ॐ हिन्दी प्रचार सभा काफी व्यस्त ॐ जपानी का…

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कविता कविता-पुनर्जन्म:विजय निकोर

कविता-पुनर्जन्म:विजय निकोर

तुम्हारा अंकुरित स्नेह सुकुमार ज्यों अकलंकित आकाश ने फेंक दिए सितारे सारे मेरी झोली में आज, और फिर भी मैं डरा-डरा-सा खड़ा रहा कितने कटु…

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आर्थिकी आर्थिक-सुधारों की राजनीती और बदहाल जन

आर्थिक-सुधारों की राजनीती और बदहाल जन

 पियुष द्विवेदी ‘भारत’ ममता बनर्जी द्वारा किराने में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नीतिगत मतभेद के चलते यूपीए-२ को नमस्कार करने के बाद, आर्थिक-सुधारों के निहितार्थ…

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