मीडिया मीडिया का स्वनियंत्रण बनाम बाह्यनियंत्रण और सर्वोच्च न्यायालय के दो निर्णय

मीडिया का स्वनियंत्रण बनाम बाह्यनियंत्रण और सर्वोच्च न्यायालय के दो निर्णय

रवि शंकर पिछले कुछ दिनों से मीडिया यानी कि पत्रकारिता पर अंकुश लगाए जाने की खबरें काफी चर्चा में रही हैं। सरकार जहां एक ओर…

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राजनीति कुछ पेड़ों पर पैसे लगते हैं प्रधानमंत्री जी

कुछ पेड़ों पर पैसे लगते हैं प्रधानमंत्री जी

डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले दिनों देश को चेतावनी दी कि पैसे पेड़ों पर नहीं लगते । वे आर्थिक क्षेत्र में…

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महत्वपूर्ण लेख सार्थक जीवन जिया सुदर्शन जी ने / मा. गो. वैद्य

सार्थक जीवन जिया सुदर्शन जी ने / मा. गो. वैद्य

शनिवार १५ सितंबर २०१२ को पूर्व सरसंघचालक श्री सुदर्शन जी का रायपुर में निधन हुआ. कुप्पहळ्ळी सीतारामय्या सुदर्शन यह उनका पूरा नाम. वे जन्म से…

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विविधा हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता और हिन्दी का गिरता स्तर

हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता और हिन्दी का गिरता स्तर

 एक बार फिर हिन्दी दिवस पर सैकड़ों आयोजन हुए। जिनमें हिन्दी के बढ़ते महत्व पर व्याख्यान दिए गए, तो कहीं हिन्दी की गिरावट पर चर्चा…

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गजल हज़ार बहानो से बेरुख़ी अच्छी

हज़ार बहानो से बेरुख़ी अच्छी

हज़ार बहानो से बेरुख़ी अच्छी – हज़ार कोशिशों से बेबसी अच्छी ! आबरू पर आंच आने लगे तो – हज़ार जवाबों से खामुशी अच्छी !…

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महत्वपूर्ण लेख ‘अ’सत्यमेव जयते!

‘अ’सत्यमेव जयते!

हिमांशु शेखर लोकप्रिय फिल्म अभिनेता आमिर खान ‘सत्यमेव जयते’ के जब छोटे पर्दे पर आए तो यहां भी वे बेहद सफल रहे और उनके कार्यक्रम…

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कविता गिरगिट‌ दादा-प्रभुदयाल श्रीवास्तव

गिरगिट‌ दादा-प्रभुदयाल श्रीवास्तव

मिले सड़क पर गिरगिट दादा लगे मुझे दुख दर्द बताने| बहुत देर तक रुके रहे वे अपने मन की व्यथा सुनाने|   बोले ‘सदियों सदियों…

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राजनीति अन्ना-केजरीवाल, अलग राह पर मकसद एक

अन्ना-केजरीवाल, अलग राह पर मकसद एक

 सिद्धार्थ शंकर गौतम क्या अब अन्ना का वह जादू युवा वर्ग पर फिर उसी तरह सर चढ़कर बोलेगा जिस तरह एक-डेढ़ साल पहले बोलता था?…

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महत्वपूर्ण लेख अन्ना हजारे, अरविन्द केजरीवाल और राजनैतिक विकल्प

अन्ना हजारे, अरविन्द केजरीवाल और राजनैतिक विकल्प

दिनांक १८ अगस्त मंगलवार की शाम को मैं संयोग बस Constitution क्लब पहुँच गया था।उड़ती उड़ती खबर मिली थी कि वहाँ अन्ना हजारे आने वाले…

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आर्थिकी आखिर क्या हैं पैसे पेड़ पर नहीं उगते के निहितार्थ ?

आखिर क्या हैं पैसे पेड़ पर नहीं उगते के निहितार्थ ?

प्रवीण गुगनानी * अभावपूर्ण मध्यमवर्ग के लिए मनमोहनसिंह का उच्चवर्गीय, निर्मम व भावहीन भाषण * खाद के मूल्य, गरीबी, महंगाई, भ्रष्टाचार जैसे अनेक विषय क्यों…

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राजनीति सरकार भ्रष्ट ही नही झूठी भी है।

सरकार भ्रष्ट ही नही झूठी भी है।

शादाब जफर ‘‘शादाब ’’ आज सत्ता के राजनीतिक गलियारो में जो भी राजनीतिक ड्रामा हो रहा है वो सिर्फ और सिर्फ लोकसभा 2014 के चुनाव…

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पर्यावरण निर्धारित हों अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मापदं

निर्धारित हों अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मापदं

तनवीर जाफ़री वर्तमान कठिन दौर में जबकि लगभग सारा संसार अपने जीविकोपार्जन हेतु संघर्षरत है,दुनिया में मंहगाई,बेरोज़गारी तथा कुपोषण बढ़ता जा रहा है। उधर प्रकृति…

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