महत्वपूर्ण लेख कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और असफलता-२

कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और असफलता-२

विपिन किशोर सिन्हा कार्ल मार्क्स के जीवन का अधिकांश भाग इंगलैन्ड में व्यतीत हुआ था। उन्होंने संपूर्ण अध्ययन वहीं किया था। उनके मन-मस्तिष्क पर वहां…

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हिंद स्‍वराज स्वतंत्रता राष्ट्रीय नमक हरामी के लिए नहीं है

स्वतंत्रता राष्ट्रीय नमक हरामी के लिए नहीं है

छद्म धर्म निरपेक्षता से लकवाग्रस्त कांग्रेस और उसके कुछ अन्य समान विचारधारा वाले दलों का मानना है कि राजनीति (वास्तव में राष्ट्रनीति) से भला भगवाधारी…

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राजनीति ये स्टालिनवादी वैचारिक बहुलता के विरोधी होते हैं / राकेश सिन्‍हा

ये स्टालिनवादी वैचारिक बहुलता के विरोधी होते हैं / राकेश सिन्‍हा

राकेश सिन्हा (जनसत्ता ने अपने चार रविवारीय अंकों में वैचारिक एवं बौद्धिक संवाद पर बहस चलाया. कई न्यूनताओं के बावजूद यह एक सराहनीय एवं अभिनंदनीय…

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विविधा अबूझमाड़ में पीडीएस, एक नई सुबह की आहट

अबूझमाड़ में पीडीएस, एक नई सुबह की आहट

संजय शेखर उसने कहा कि 55 किलोमीटर से राशन दूकान पर चावल लेने आता है तो मुझे विश्वास नहीं हुआ। फिर सुबह के सात बजे…

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राजनीति हल्की फूंक से ही कांपने लगते हैं वामपंथी / विजय कुमार

हल्की फूंक से ही कांपने लगते हैं वामपंथी / विजय कुमार

विजय कुमार संघप्रेरित विचार मंच (Think tank) ‘भारत नीति प्रतिष्ठान’ (India policy foundation) का मुख्यालय दिल्ली में है तथा इसका संचालन दिल्ली वि0वि0 में प्राध्यापक…

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विविधा चलो, कुछ समाजसेवा ही हो जाए

चलो, कुछ समाजसेवा ही हो जाए

विजय कुमार हर दिन मिलने वाले शर्मा जी पिछले एक सप्ताह से नहीं मिले, तो मैंने फोन मिलाया। पता लगा कि वे हैं तो नगर…

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राजनीति कांग्रेस की मजहबी राजनीति को करारा तमाचा है मजहबी आरक्षण पर रोक

कांग्रेस की मजहबी राजनीति को करारा तमाचा है मजहबी आरक्षण पर रोक

सिद्धार्थ शंकर गौतम कांग्रेस की धर्म आधारित राजनीति पर लगता है ग्रहण लगने लगा है| आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने कांग्रेसनीत संप्रग सरकार को ज़बर्दस्त झटका…

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विश्ववार्ता मधेश अपडेट ६

मधेश अपडेट ६

वृषेश चन्‍द्र लाल नोट : भौगोलिक रूप से नेपाल को तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया हैः हिमालय, पहाड़ और मधेश।  वैसे तो पूरा नेपाल…

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राजनीति हर कोई गोलबंद है / चंचल चौहान

हर कोई गोलबंद है / चंचल चौहान

चंचल चौहान ओम थानवी की टिप्पणी ‘आवाजाही के हक में’ (‘अनन्तर’, 29 अप्रैल) अगर हिंदी लेखक समुदाय में व्याप्त संकीर्ण रुझानों को लेकर पीड़ा व्यक्त…

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राजनीति न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद / के विक्रम राव

न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद / के विक्रम राव

 के विक्रम राव वैचारिक आवाजाही निर्मल-प्रवाह जैसी हो तो बौद्धिक विकास ही कहलाएगी। वरना सोच में कोई भी बदलाव अमूमन मौकापरस्ती का पर्याय बन जाता…

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राजनीति यह छुआछूत उनकी ही देन है / अवनिजेश अवस्‍थी

यह छुआछूत उनकी ही देन है / अवनिजेश अवस्‍थी

 अवनिजेश अवस्थी ओम थानवी के ‘अनन्तर’ पर पता नहीं चंचल चौहान इतना क्यों भड़क गए। थानवी जी की टिप्पणी के केंद्रीय मंतव्य- ‘‘क्या हम ऐसा…

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राजनीति ताकि गर्द कुछ हटे / ओम थानवी

ताकि गर्द कुछ हटे / ओम थानवी

ओम थानवी एक पाठक ने ‘आवाजाही’ पर चली बहस पढ़ने के बाद प्रतिक्रिया की: यह हाल तो तब है जब ‘अनन्तर’ कभी-कभार छपता है। ‘कभी-कभार’…

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