कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और असफलता-२
Updated: June 10, 2012
विपिन किशोर सिन्हा कार्ल मार्क्स के जीवन का अधिकांश भाग इंगलैन्ड में व्यतीत हुआ था। उन्होंने संपूर्ण अध्ययन वहीं किया था। उनके मन-मस्तिष्क पर वहां…
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स्वतंत्रता राष्ट्रीय नमक हरामी के लिए नहीं है
Updated: May 29, 2012
छद्म धर्म निरपेक्षता से लकवाग्रस्त कांग्रेस और उसके कुछ अन्य समान विचारधारा वाले दलों का मानना है कि राजनीति (वास्तव में राष्ट्रनीति) से भला भगवाधारी…
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ये स्टालिनवादी वैचारिक बहुलता के विरोधी होते हैं / राकेश सिन्हा
Updated: June 28, 2012
राकेश सिन्हा (जनसत्ता ने अपने चार रविवारीय अंकों में वैचारिक एवं बौद्धिक संवाद पर बहस चलाया. कई न्यूनताओं के बावजूद यह एक सराहनीय एवं अभिनंदनीय…
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अबूझमाड़ में पीडीएस, एक नई सुबह की आहट
Updated: May 29, 2012
संजय शेखर उसने कहा कि 55 किलोमीटर से राशन दूकान पर चावल लेने आता है तो मुझे विश्वास नहीं हुआ। फिर सुबह के सात बजे…
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हल्की फूंक से ही कांपने लगते हैं वामपंथी / विजय कुमार
Updated: June 28, 2012
विजय कुमार संघप्रेरित विचार मंच (Think tank) ‘भारत नीति प्रतिष्ठान’ (India policy foundation) का मुख्यालय दिल्ली में है तथा इसका संचालन दिल्ली वि0वि0 में प्राध्यापक…
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चलो, कुछ समाजसेवा ही हो जाए
Updated: May 29, 2012
विजय कुमार हर दिन मिलने वाले शर्मा जी पिछले एक सप्ताह से नहीं मिले, तो मैंने फोन मिलाया। पता लगा कि वे हैं तो नगर…
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कांग्रेस की मजहबी राजनीति को करारा तमाचा है मजहबी आरक्षण पर रोक
Updated: May 29, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम कांग्रेस की धर्म आधारित राजनीति पर लगता है ग्रहण लगने लगा है| आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने कांग्रेसनीत संप्रग सरकार को ज़बर्दस्त झटका…
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मधेश अपडेट ६
Updated: May 29, 2012
वृषेश चन्द्र लाल नोट : भौगोलिक रूप से नेपाल को तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया हैः हिमालय, पहाड़ और मधेश। वैसे तो पूरा नेपाल…
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हर कोई गोलबंद है / चंचल चौहान
Updated: June 28, 2012
चंचल चौहान ओम थानवी की टिप्पणी ‘आवाजाही के हक में’ (‘अनन्तर’, 29 अप्रैल) अगर हिंदी लेखक समुदाय में व्याप्त संकीर्ण रुझानों को लेकर पीड़ा व्यक्त…
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न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद / के विक्रम राव
Updated: June 28, 2012
के विक्रम राव वैचारिक आवाजाही निर्मल-प्रवाह जैसी हो तो बौद्धिक विकास ही कहलाएगी। वरना सोच में कोई भी बदलाव अमूमन मौकापरस्ती का पर्याय बन जाता…
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यह छुआछूत उनकी ही देन है / अवनिजेश अवस्थी
Updated: June 28, 2012
अवनिजेश अवस्थी ओम थानवी के ‘अनन्तर’ पर पता नहीं चंचल चौहान इतना क्यों भड़क गए। थानवी जी की टिप्पणी के केंद्रीय मंतव्य- ‘‘क्या हम ऐसा…
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ताकि गर्द कुछ हटे / ओम थानवी
Updated: June 28, 2012
ओम थानवी एक पाठक ने ‘आवाजाही’ पर चली बहस पढ़ने के बाद प्रतिक्रिया की: यह हाल तो तब है जब ‘अनन्तर’ कभी-कभार छपता है। ‘कभी-कभार’…
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