स्वतंत्रता की 65वीं वर्षगांठ
Updated: August 13, 2012
भारत के साथ सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि इसका इतिहास जो आज विद्यालयों में पढ़ाया जा रहा है वह इसका वास्तविक इतिहास नही है।…
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आई.ए.सी और टीम केजरीवाल…दो भिन्न समूह…
Updated: August 13, 2012
किशोर बडथ्वाल लगभग ढाई वर्ष पूर्व कुछ लोगों ने फेसबुक पेज के माध्यम से एक आंदोलन की परिकल्पना की, और तकनीकि रूप से कुशल व्यक्तियों…
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भ्रष्टाचार की शुरुआत कहाँ से…?
Updated: August 13, 2012
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ आजादी के बाद से अनेक मोर्चों पर मनमानी और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ छोटे-बड़े अनेक आन्दोलन देश में होते रहे हैं।…
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थायलॅंन्ड पर संस्कृत का प्रभाव — डॉ. मधुसूदन
Updated: August 13, 2012
(१) विकलांग मानसिकता सफलता प्राप्ति के लिए, सबसे पहले हमें, अपनी विकलांग मानसिकता से ऊपर उठना होता है। ”अहं ब्रह्मास्मि” (मैं ब्रह्म हूँ।) का घोष,…
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नियम
Updated: August 13, 2012
पियूष द्विवेदी ‘भारत’ आज दो दिन हो गए थे उसको गाँव आए! करीब दस साल बाद वो गाँव आया था! इन दस सालों में उसके…
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माई एहा पूत जण जेहा दुर्गादास
Updated: August 13, 2012
13 अगस्त वीर दुर्गादास जयंती पर विशेष भारतीय इतिहास में वीर शिरोमणि दुर्गादास के नाम को कभी परिचय की आवश्यकता नहीं रही. मारवाड़ के इस…
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देख दौलत की खनक हम भी फिसल सकते थे…..
Updated: August 13, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी सबको संग लेके बड़ी दूर निकल सकते थे, तूने चाहा ही नहीं हालात बदल सकते थे। तुम तो उलझे रहे वंदना…
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‘क्रांति अन्ना’ की असफलता के निहितार्थ
Updated: August 13, 2012
तनवीर जाफ़री गत् तीन दशकों से भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुखरित होकर अपनी आवाज़ बुलंद करने वाले तथा गांधीवादी सिद्धांतों पर चलते हुए अनशन व सत्याग्रह…
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कविता:थार रेगिस्तान से….
Updated: August 12, 2012
बीनू भटनागर रेत के टीले रेत का सागर, मीलो तक इनका विस्तार, तेज़ हवा से टीले उड़कर, पंहुच रहे कभी दूसरे गाँव, दूर दूर बसे…
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कविता:ये मेरा देश
Updated: August 12, 2012
राजेश कुमार ये मेरा देश है, जहां अजीब से किस्से होते हैं रोने वाली बात पर हंसते हैं लोग, और चुटकुलों पर रोते हैं बदलाव…
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व्यक्तित्व को ढालना है हमारे हाथ
Updated: August 12, 2012
डॉ. दीपक आचार्य व्यक्तित्व को ढालना है हमारे हाथ रचनात्मक बनायें या विध्वंसात्मक व्यक्तित्व का निर्माण व्यक्ति के अपने हाथ में होता है। इसे वह…
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कविता – महानगर के मायने
Updated: August 12, 2012
मोतीलाल यहाँ मुझे कोई नहीँ पहचानता आकाश की तरह शून्य यहाँ मुझे कोई नहीँ जानता हवाओँ की तरह मुक्त यहाँ मुझे कोई नहीँ…
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