सदाचार की शिक्षा और पत्रकारिता
Updated: December 7, 2011
प्रो. बृजकिशोर कुठियाला एक जिलाधीश के पास उस प्रदेश के मुख्यमंत्री का फोन आया। उनकी बात सुनने के बाद जिलाधीश ने मुख्यमंत्री को फोन पर…
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श्रीमद्भगद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-५
Updated: December 7, 2011
विपिन किशोर सिन्हा छद्म धर्मनिरपेक्षवादियों को जब कोई पुष्ट आरोप समझ में नहीं आता, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा द्वारा किए गए अच्छे कार्यों…
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अपमान को पुनर्परिभाषित करने की जरूरत
Updated: December 7, 2011
वीरेन्द्र जैन यह परम्परा सी बन गयी है कि प्रति वर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बाद हर क्षेत्र से दो एक समाचार ऐसे…
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आंतकवादः अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे
Updated: December 7, 2011
प्रमोद भार्गव साम्राज्यवादी चीन अपने ही देश में आतंकवादी हमलों का शिकार होने के बाद अहसास कर रहा है कि अब ऊॅट पहाड़ के नीचे…
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कर्ज संकट की आग में जल सकता है भारत
Updated: December 7, 2011
सतीश सिंह स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने अमेरिका की लॉन्ग टर्म कर्ज की रेटिंग को ‘ट्रिपल ए’ से कम करके ‘एए प्लस’ कर दिया है। रेटिंग…
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‘‘जनता आगे, नेता पीछे ’’
Updated: December 7, 2011
वीरेन्द्र सिंह परिहार अब यह कहने में कोई झिझक नही कि लोकपाल मुद्दे पर जनता आगे हो गई है, और हमारा राजनैतिक नेतृत्व पीछे हो…
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शिक्षा वहां, राजनीति यहां
Updated: August 8, 2011
विजय कुमार भारत में अधिकांश राजनेता धरती की राजनीति करने का दावा करते हैं, फिर भी धरातल की समस्याएं नहीं सुलझतीं। इसमें एक बड़ा दोष…
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श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-४
Updated: August 8, 2011
विपिन किशोर सिन्हा कर्म गीता का मूलमंत्र है। निष्काम कर्मयोग में सारे दर्शन समाहित हैं। Work is worship — कार्य ही पूजा है, का…
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ये कैसी आजादी
Updated: December 7, 2011
पंकज व्यास चाहे लोकपाल बिल हो, या काला धन भारत में लाने की मांग, इस आजाद (?)देश में विरोध के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी…
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बस्तर के ग्रीन कमांडो
Updated: December 7, 2011
सुजाता राघवन वीरेंद्र की इस यात्रा का लक्ष्य बारिश के पानी को बर्बादी से बचाना था। 1997 में इसकी शुरूआत करते समय उनके मन में…
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किसका महत्व अधिक है, हिना रब्बानी का या भारतीय सेना के जवानों का???
Updated: December 7, 2011
दिवस दिनेश गौड़ मित्रों हिना रब्बानी अब अपनी भारत यात्रा पूरी कर फिर से अपने देश पापी पाकिस्तान चली गयी है| अब तक इस विषय…
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उ.प्र. का निराशाजनक राजनीतिक परिदृश्य
Updated: December 7, 2011
सुनील अमर लोकतांत्रिक प्रणाली में प्रबल बहुमत क्या सत्तारुढ़ राजनीतिक दल के भविष्य के लिए बहुत मुफीद नहीं होता ? क्या ऐसा होना उन्हें प्रशासनिक…
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