धर्म-अध्यात्म श्रीमद्भगवद्गीता और छद्मधर्मनिरपेक्षवादी : चर्चा-३

श्रीमद्भगवद्गीता और छद्मधर्मनिरपेक्षवादी : चर्चा-३

विपिन किशोर सिन्हा प्रवक्ता में इसी सप्ताह एक लंबे लेख में एक निरंकुश लेखक ने गीता के एक श्लोक को उद्धरित करते हुए टिप्पणी लिखी…

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राजनीति क्‍या दिग्विजय सिंह लश्‍कर-ए-तोयबा आदि संगठनों के एजेंट हैं

क्‍या दिग्विजय सिंह लश्‍कर-ए-तोयबा आदि संगठनों के एजेंट हैं

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री शुरु-शुरु में ऐसा माना जाने लगा था कि कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह के आतंकवाद को लेकर दिए गए बयानों को…

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विविधा गरीबी हटाने के सरकारी तरीके

गरीबी हटाने के सरकारी तरीके

डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव  वे जिला प्रमुख है। उनके कार्यालय के ऊपर कोई मंजिल नही है पर उन्हें ऊपर से आदेश आते रहते हैं। इस…

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प्रवक्ता न्यूज़ लोकमंगल हो मीडिया का ध्येयः स्वामी शाश्वतानंद

लोकमंगल हो मीडिया का ध्येयः स्वामी शाश्वतानंद

भोपाल, 6 अगस्त,2011। महामंडलेश्वर डा.स्वामी शाश्वतानंद गिरि का कहना है कि लोकमंगल अगर पत्रकारिता का उद्देश्य नहीं है तो वह व्यर्थ है। हमें हमारे सामाजिक…

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राजनीति भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और सोनिया कांग्रेस में अन्तर को समझना होगा

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और सोनिया कांग्रेस में अन्तर को समझना होगा

 डॉ0 कुलदीप चन्द अग्निहोत्री सोनिया कांग्रेस की गतिविधियों, उसके कार्यक्रमों और भारतीयता अथवा हिन्दुत्व के प्रति उसके एजेंडा को लेकर पिछले कुछ अर्से से व्यापक…

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जन-जागरण सबसे बड़ा डंडा खुद का चरित्र है…..क़ानून नहीं

सबसे बड़ा डंडा खुद का चरित्र है…..क़ानून नहीं

राजीव थेप्रा हम रोज-ब-रोज तरह-तरह के अपराधों के बारे में पढ़ते हैं,सुनते हैं और साथ ही बड़े लोगों के अपराधों के बारे या अपराधियों को…

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आलोचना असमानता की आजादी का जश्‍न!

असमानता की आजादी का जश्‍न!

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ 15 अगस्त, 2011 को हम आजादी की 65वीं सालगिरह मनाने जा रहे भारत में कौन कितना-कितना और किस-किस बात के लिये…

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साहित्‍य श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-२

श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-२

विपिन किशोर सिन्हा श्रीकृष्ण को अच्छी तरह समझे बिना गीता तक नहीं पहुंचा जा सकता। शरीर और आत्मा जैसी दो चीजें नहीं हैं। आत्मा का…

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दौरे-उल्फत की हर बात याद है मुझे

दौरे-उल्फत की हर बात याद है मुझे तुझसे हुई वह मुलाकात याद है मुझे। बरसते पानी में हुस्न का धुल जाना दहकी हुई वह बरसात…

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कविता अलग थलग दुनियाँ से फिर भी इस दुनियाँ में रहता हूँ

अलग थलग दुनियाँ से फिर भी इस दुनियाँ में रहता हूँ

श्यामल सुमन भावना अलग थलग दुनियाँ से फिर भी इस दुनियाँ में रहता हूँ अनुभव से उपजे चिन्तन की नव-धारा संग बहता हूँ   पद…

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लेख अराजकता के इस‌ दौर में देश में सैनिक शासन की संभावनायें

अराजकता के इस‌ दौर में देश में सैनिक शासन की संभावनायें

मेरा बड़ा बेटा स्टेशनरी की दुकान चलाता है|वहीं पर कम्प्यूटर फोटो कापी इत्यादि भी उप‌लब्ध हैं सेवा निवृति के बाद मैं भी इस दुकान में…

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कला-संस्कृति सांस्कृतिक साम्राज्यवाद

सांस्कृतिक साम्राज्यवाद

कैलाश बुधवार देश को स्वतंत्र हुए इतने वर्ष हो जाने के बाद भी अक्सर यह दुख दुहराया जाता है कि हमारी दास मानसिकता नहीं गई…

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