समाज बाजार जी! संभावनाएं यहां मत टंटोलिए -जयप्रकाश सिंह

बाजार जी! संभावनाएं यहां मत टंटोलिए -जयप्रकाश सिंह

‘घर से निकलते ही, कुछ दूर चलते ही’ आजकल अधिकांश व्यक्तियों का सामना बाजार से हो जाता है। मेरा भी आमना-सामना उनके अगणित रूपों में…

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राजनीति सार्वजनिक स्थान क्यों?

सार्वजनिक स्थान क्यों?

पेशाबघर सभी स्थानों पर। शौचालय सार्वजनिक स्थान पर। प्याऊ सार्वजनिक स्थान पर। बारात की आवभगत सार्वजनिक स्थान पर। घर की टैरेस से लेकर दुकान की…

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विश्ववार्ता जाने क्या बात हुई…

जाने क्या बात हुई…

सवाल है, बात करना किसकी मजबूरी है, हमारी या पाकिस्तान की? दाऊद हमें चाहिए, हाफिज सईद हमें चाहिए, कश्मीर में शांति हमें चाहिए, ईरान से…

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टॉप स्टोरी बिगड़ी हालत सेहत की-हिमांशु शेखर

बिगड़ी हालत सेहत की-हिमांशु शेखर

देश में जन स्वास्थ्य की हालत सुधारने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। हर साल इन योजनाओं पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए…

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व्यंग्य व्यंग्य/ तालियां! तलियां!! तलियां!!!

व्यंग्य/ तालियां! तलियां!! तलियां!!!

पहाड़ पर एक गांव था। गांव में सबकुछ था। पर पानी न था। कई बार चुनाव आए। वहां के लोगों से भरे पूरे मुंह मंत्रियों…

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लेख Share with Care : शेयर विथ केयर

Share with Care : शेयर विथ केयर

धन कमाने की लालसा, (उत्साह, ख्वाहिश) शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसमे न हो आज तो चारो तरफ वातावरण धनामय हो चूका है पूरब…

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टॉप स्टोरी बहन जी को गुस्सा क्यों आता है?

बहन जी को गुस्सा क्यों आता है?

उत्तर प्रदेश में ‘बलात्कार राजनीति’ एक नए मोड़ पर आ गई है। मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी की विवादित…

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लेख The True Beauty : द ट्रुथ इज ब्यूटी

The True Beauty : द ट्रुथ इज ब्यूटी

The True Beauty: ब्यूटी शब्द यानि सुन्दरता यानि आकर्षण से भरा हुवा शब्द.यह वो जादूई (तिलिस्म) शब्द है जिसे सुनते ही इंसान के दिमाग में…

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प्रवक्ता न्यूज़ शहादत व्यर्थ नहीं जायेगी ……..मगर कैसे?

शहादत व्यर्थ नहीं जायेगी ……..मगर कैसे?

दर्जनों सुरक्षाबल समेत जांबाज पुलिस अधिकारी स्व.विनोद चौबे की शहादत पर सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ मर्माहत है। अफसोस कि शोक की इस घड़ी में प्रदेश अकेला है,…

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व्यंग्य व्यंग्य : यार, लौट आओ!! – डॉ. अशोक गौतम

व्यंग्य : यार, लौट आओ!! – डॉ. अशोक गौतम

इस इश्तहार के माध्यम से सर्व साधारण को एक बार फिर सूचित किया जाता है कि हमारे मुहल्ले का पिछले कई महीनों से गुम हुआ…

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समाज पहचान – एक संघर्ष : Pehchaan – Ek Sangharsh

पहचान – एक संघर्ष : Pehchaan – Ek Sangharsh

जब से इस धरती पर चाहे इंसान हो या जानवर आया है वह अपनी पहचान के लिए हमेशा संघर्ष करता रहा है .अगर हम पुराण…

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व्यंग्य/ बिन जूते सब सून/ अशोक गौतम

विश्व आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा हो तो गुजरता रहे भाई साहब! मुझे विश्व की आर्थिक मंदी से कोई लेना देना नहीं। विश्व…

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