पर्यावरण वन्य जीवों और पेड़ों के लिए अपनी जान पर खेलता बिश्नोई समाज

वन्य जीवों और पेड़ों के लिए अपनी जान पर खेलता बिश्नोई समाज

-सत्यवान ‘सौरभ’ बिश्नोई आंदोलन पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण और हरित जीवन के पहले संगठित समर्थकों में से एक है। बिश्नोइयों को भारत का पहला पर्यावरणविद…

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कविता आयु निर्धारण सिर्फ जन्म नहीं मानसिक आत्मिक स्थिति से होती

आयु निर्धारण सिर्फ जन्म नहीं मानसिक आत्मिक स्थिति से होती

—विनय कुमार विनायकमानव की आयु का निर्धारणसिर्फ जन्म नहीं मानसिक स्थितिऔर आत्मा के पूर्व जन्मों सेसंग्रहित ज्ञान व यादाश्त से होती! सब मानव समकालीन होते…

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आर्थिकी भारत ने विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में लगाई लम्बी छलांग

भारत ने विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में लगाई लम्बी छलांग

अभी हाल ही में, 15 जून 2022 को, स्विटजरलैंड स्थित प्रबंधन विकास संस्थान (इन्स्टिटयूट फोर मेनेजमेंट डेवलपमेंट) द्वारा विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक जारी किया गया है।…

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राजनीति भारत के लिए G7 शिखर सम्मेलन के मायने

भारत के लिए G7 शिखर सम्मेलन के मायने

डॉ. संतोष कुमार भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने G-7 (ग्रुप ऑफ सेवन) के तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के विशेष निमंत्रण पर…

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राजनीति मुर्मू के बहाने आदिवासी विकास का मर्म

मुर्मू के बहाने आदिवासी विकास का मर्म

-ः ललित गर्गः- आदिवासी लोगों के मूलभूत अधिकारों (जल, जंगल, जमीन) को बढ़ावा देने और उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और न्यायिक सुरक्षा के लिए द्रौपदी…

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लेख खिलौनों की दुनिया के वो मिट्टी के घर याद आते हैं।

खिलौनों की दुनिया के वो मिट्टी के घर याद आते हैं।

-प्रियंका ‘सौरभ’ सदियों से मिटटी के घर बनाने की जो परम्परा चली आ रही है; भारत में 118 मिलियन घरों में से 65 मिलियन मिट्टी…

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धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म का समग्रता से प्रचार गुरुकुलीय शिक्षा से ही सम्भव

वैदिक धर्म का समग्रता से प्रचार गुरुकुलीय शिक्षा से ही सम्भव

–मनमोहन कुमार आर्य   गुरुकुल एक लोकप्रिय शब्द है। यह वैदिक शिक्षा पद्धति का द्योतक शब्द है। वैदिक धर्म व संस्कृति का आधार ग्रन्थ वेद है। वेद चार हैं जिनके नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद हैं। यह चार वेद सृष्टि के आरम्भ में सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, अनादि, अनन्त, न्यायकारी, सृष्टिकर्ता और जीवों को उनके कर्मानुसार सुख-दुःख व मनुष्यादि जन्म देने वाले ईश्वर से चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य व अंगिरा को प्राप्त हुए थे। वेद ईश्वर की अपनी भाषा संस्कृत में हैं जो लौकिक संस्कृत से भिन्न है और जिसके शब्द व पद रूढ़ न होकर योगरूढ़ हैं। वेदों को जानने व समझने के लिए वैदिक संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक है और इसके लिए वर्णोच्चारण शिक्षा सहित व्याकरण के अष्टाध्यायी व महाभाष्य आदि ग्रन्थों का बाल व युवावस्था में लगभग तीन वर्ष तक अध्ययन करना व कराना आवश्यक है। यह अध्ययन किसी एक गुरु से किया जा सकता है। प्राचीन काल में वेदों के विद्वान जिन्हें ब्राह्मण कहा जाता था, वह शिक्षा व व्याकरण आदि का ज्ञान वनों में स्थित अपने गुरुकुल, अर्थात् गुरु के कुल, में कराया करते थे जहां अनेक विद्यार्थी एक गुरु से व्याकरण व उसके बाद निरुक्त आदि वेदांगों व उपांगों आदि अनेक ऋषिकृत ग्रन्थों का अध्ययन करते थे। यह परम्परा महाभारत के बाद यवन व अंग्रेजों के समय में भंग कर दी गई थी जिसका उद्देश्य वैदिक धर्म व संस्कृति को समाप्त कर विदेशी मतों को महिमा मण्डित करना था। इसका उद्देश्य लोगों का येन केन प्रकारेण धर्मान्तरण व मतान्तरण करना मुख्य था। इस कारण दिन प्रति दिन वैदिक धर्म व संस्कृति का पतन हो रहा था। महर्षि दयानन्द ने इस स्थिति को यथार्थ रूप में समझा था और संस्कृत का अध्ययन कराने के लिए एक के बाद दूसरी कई संस्कृत पाठशालाओं का अलग अलग स्थानों पर स्थापन किया था। किन्हीं कारणों से इन पाठशालाओं को आशा के अनुरुप सफलता न मिलने पर उन्हें बन्द करना पड़ा तथापि ऋषि दयानन्द ने जहां एक ओर सत्यार्थप्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, संस्कारविधि, आर्याभिविनय व ऋग्वेद-यजुर्वेद भाष्य आदि का प्रणयन किया वहीं उन्होंने व्यापकरण पर भी अनेक महत्वपूर्ण ग्रन्थ लिखकर अपने अनुयायियों को गुरुकुल स्थापित कर संस्कृत व वेदादि ग्रन्थों के पठन पाठन का मार्ग भी प्रशस्त किया था।  ऋषि दयानन्द धर्मवेत्ता एवं समाज सुधारक सहित सच्चे देशभक्त, ऋषि, योगी व समस्त वैदिक साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान थे। उन्होंने वैदिक धर्म, इसकी मान्यताओं एवं सिद्धान्तों के प्रचार सहित समाज सुधार का अभूतपूर्व कार्य किया। 30…

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लेख अमृत महोत्सव की परिकल्पना को साकार करता एकल अभियान

अमृत महोत्सव की परिकल्पना को साकार करता एकल अभियान

पूरा देश स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मना रहा है। 75 वर्षों की स्वतंत्रता ने भारत को दुनिया के अग्रणी राष्ट्रों की कतार में सम्मिलित करवा…

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कविता ये कैसा स्वर्ग लोक जन्नत कश्मीर है?

ये कैसा स्वर्ग लोक जन्नत कश्मीर है?

—विनय कुमार विनायकये कैसा स्वर्ग लोक जन्नत कश्मीर है?बहुत बहाया इसने मानव का रुधिर है! आरंभ में कश्मीर था जनपद गांधार का,गांधार, कम्बोज था जंबूद्वीप…

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राजनीति अफ़ग़ानिस्तान : कोई देखे या न देखे अल्लाह देख रहा है

अफ़ग़ानिस्तान : कोई देखे या न देखे अल्लाह देख रहा है

                                                                            तनवीर जाफ़री  तालिबानी अतिवादी व कट्टरपंथी हिंसक गतिविधियों के चलते पूरी दुनिया में कुख्यात अफ़ग़ानिस्तान में विगत मात्र तीन दिनों के भीतर हुये दो…

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कविता पहला प्यार नहीं मिलता।।

पहला प्यार नहीं मिलता।।

हो जाती है शादी जबरनदिल का द्वार नहीं खुलताइस दुनिया में कभी किसी कोपहला प्यार नहीं मिलता । मिला साथ ना जीवन भर काबस कुछ…

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लेख ओबीसी के साथ क्रीमीलेयर का भेदभाव क्यों?

ओबीसी के साथ क्रीमीलेयर का भेदभाव क्यों?

सत्यवान ‘सौरभ’ आरक्षण, सात दशकों के बावजूद, हमारे विषम समाज में कई समूहों के लिए लाभों के समान वितरण में अनुवादित नहीं हुआ है। नतीजतन,…

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